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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन –2: विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप तथा उनके निर्माण और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
संदर्भ: 4 अक्टूबर 2026 को उन्नत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन योजना (PM-SETU) का एक वर्ष पूरा हुआ। यह भारत में आधुनिक, उद्योग-अनुरूप और मांग-आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण की दिशा में बदलाव को दर्शाता है।
पीएम-सेतु के बारे में

- 4 अक्टूबर 2025 को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा शुरू की गई पीएम-सेतु योजना का उद्देश्य सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को आधुनिक और उद्योग-अनुरूप कौशल विकास संस्थानों में परिवर्तित करना है।
- इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय पाँच वर्षों में ₹60,000 करोड़ है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा ₹30,000 करोड़, राज्य सरकारों द्वारा ₹20,000 करोड़ और उद्योग जगत द्वारा ₹10,000 करोड़ का योगदान शामिल है।
दो घटक
- 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन: इसके अंतर्गत 200 केंद्र आईटीआई और 800 संबद्ध आईटीआई को केंद्र-संबद्ध मॉडल के तहत उन्नत किया जाएगा।
- प्रत्येक केंद्र आईटीआई से औसतन चार संबद्ध आईटीआई जुड़े होंगे, जिससे उन्नत अवसंरचना, आधुनिक व्यवसायों, डिजिटल शिक्षण प्रणालियों और उद्भवन सुविधाओं तक साझा पहुँच संभव होगी।
- 5 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता में वृद्धि: भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों तथा प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण के माध्यम से सुदृढ़ किया जाएगा।
प्रमुख विशेषताएँ
- उद्योग-नेतृत्व वाला शासन: रणनीतिक निवेश योजनाएँ, विशेष प्रयोजन माध्यम और प्रमुख उद्योग भागीदार कौशल विकास समूहों के विकास एवं संचालन का मार्गदर्शन करेंगे।
- उद्योग का स्वामित्व: प्रस्तावित विशेष प्रयोजन माध्यम की संरचना में 51% स्वामित्व प्रमुख उद्योग भागीदार के पास होगा, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों के पास 24.5%-24.5% हिस्सेदारी होगी।
- आधुनिक प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र: केंद्र आईटीआई में नवाचार केंद्र, प्रशिक्षक प्रशिक्षण की अवसंरचना, उत्पादन इकाइयाँ और रोजगार उपलब्ध कराने की सेवाएँ उपलब्ध होंगी, जबकि संबद्ध आईटीआई साझा संसाधनों तक पहुँच का विस्तार करेंगे।
- मांग-आधारित प्रशिक्षण: यह योजना मॉड्यूलर शिक्षण, मिश्रित शिक्षण, प्रशिक्षुता, कार्यस्थल पर प्रशिक्षण और उद्योग से प्रत्यक्ष परिचय को बढ़ावा देती है।
- नवीन युग के कौशल: कौशल विकास महानिदेशालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, विद्युत वाहन, अर्धचालक प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, हरित हाइड्रोजन, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सौर ऊर्जा, 5जी और सॉफ्टवेयर परीक्षण जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हुए 32 नवीन युग के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।
- वैश्विक साझेदारियाँ: सिंगापुर (राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान, चेन्नई), फ्रांस (राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान, कानपुर) और ऑस्ट्रेलिया (राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान, भुवनेश्वर) ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि जर्मनी (राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान, हैदराबाद) ने संयुक्त आशय घोषणा का आदान-प्रदान किया है। ये साझेदारियाँ उन्नत कौशल विकास और वैश्विक मानकों को बढ़ावा देने में सहायक हैं।
पीएम-सेतु की उपलब्धियाँ

- 850 आईटीआई की पहचान: इनमें 172 केंद्र आईटीआई और 678 संबद्ध आईटीआई शामिल हैं, जो 1,000 आईटीआई के लक्ष्य की दिशा में प्रगति को दर्शाता है।
- देशव्यापी विस्तार को मंजूरी: राष्ट्रीय संचालन समिति ने प्रायोगिक चरण से आगे बढ़कर सभी 200 चिन्हित आईटीआई समूहों में देशव्यापी विस्तार को मंजूरी दी।
- 14 समूहों को मंजूरी: आठ राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के 14 आईटीआई समूहों की रणनीतिक निवेश योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें ₹3,446 करोड़ का निवेश शामिल है।
- राज्य स्तर पर कार्यान्वयन: 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने समूहों की पहचान कर अलग बजट मदें बनाई हैं; 35 ने राज्य संचालन समितियों का गठन किया है; और 26 ने उद्योगों की भागीदारी शुरू की है।
- आईटीआई नेटवर्क का विस्तार: कुल आईटीआई की संख्या 2014 में 9,776 से बढ़कर 2026 में 13,888 हो गई है, जबकि नामांकन 2014–15 में 9.51 लाख से बढ़कर 2025–26 में 14.70 लाख हो गया।
पीएम-सेतु की आवश्यकता एवं महत्त्व
- कौशल अंतर को पाटना: प्रशिक्षण को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप बनाकर प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार करना।
- भविष्य के लिए तैयार कार्यबल: युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, विद्युत गतिशीलता, रोबोटिक्स और हरित प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए तैयार करना।
- आधुनिक व्यावसायिक प्रशिक्षण: आधुनिक अवसंरचना, उपकरणों और डिजिटल शिक्षण के माध्यम से आईटीआई प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता में सुधार करना।
- प्रशिक्षण से रोजगार तक संबंध: उद्योग से प्रत्यक्ष परिचय, प्रशिक्षुता और रोजगार सहायता के माध्यम से प्रशिक्षण से रोजगार तक संक्रमण को सुदृढ़ करना तथा विकसित भारत 2047 के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल तैयार करने में सहायता करना।
पीएम-सेतु की कमियां या चुनौतियाँ
- अपूर्ण कवरेज: पहले वर्ष में लक्षित 1,000 आईटीआई में से केवल 850 आईटीआई की पहचान की गई है; सभी आईटीआई का पूर्ण रूपांतरण अभी जारी है।
- सीमित उद्योग भागीदारी: केवल 26 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने उद्योगों की भागीदारी आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
- कार्यान्वयन क्षमता में असमानता: राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में औद्योगिक आधार, संस्थागत क्षमता और तैयारी के स्तर में अंतर के कारण कार्यान्वयन और परिणामों में असमानता हो सकती है।
- परिणामों का मापन: दीर्घकालिक सफलता केवल अवसंरचना के निर्माण पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों की भागीदारी, रोजगार के परिणाम और निरंतर रोजगार क्षमता पर भी निर्भर करेगी।
