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सामान्य अध्ययन-2: विकसित और विकासशील देशों की नीतियों एवं राजनीति का भारत के हितों तथा भारतीय प्रवासियों पर प्रभाव।
संदर्भ: V4 की स्लोवाक अध्यक्षता के तहत न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान पहली V4+भारत विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई।
बैठक की प्रमुख विशेषताएँ
- भारत और विसेग्राद समूह के बीच समूह के रूप में विदेश मंत्री स्तर की यह पहली बैठक थी।
- मंत्रियों ने वार्षिक विदेश मंत्रियों की बैठकों सहित घनिष्ठ राजनीतिक सहयोग स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।
- उन्होंने आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें व्यवसायों के बीच अधिक संवाद स्थापित करने के लिए वार्षिक व्यापार मंच आयोजित करना शामिल है।
- निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया जाएगा :
- व्यापार और निवेश
- प्रौद्योगिकी और नवाचार
- अनुसंधान और शिक्षा
- लचीली आपूर्ति शृंखलाएँ
- रक्षा और सुरक्षा
- कनेक्टिविटी
- अंतरिक्ष
- गतिशीलता और लोगों के बीच आदान-प्रदान
- मंत्रियों ने भारत और V4 सदस्य देशों के व्यवसायों, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों तथा अन्य हितधारकों के बीच अधिक संवाद और सहभागिता की संभावनाओं पर चर्चा की।
- उन्होंने वैश्विक एवं क्षेत्रीय घटनाक्रमों, शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रम शामिल थे।
- देशों ने सुधरे हुए बहुपक्षवाद की आवश्यकता तथा ग्लोबल साउथ को प्रभावित करने वाली चुनौतियों सहित समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर चर्चा की।
- चारों V4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने भी कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
विसेग्राद समूह (V4) के बारे में
- विसेग्राद समूह (V4) चार मध्य यूरोपीय देशों—पोलैंड + हंगरी + स्लोवाकिया + चेक गणराज्य—का एक सांस्कृतिक और राजनीतिक गठबंधन है।
- इसका उद्देश्य सैन्य, आर्थिक, सांस्कृतिक और ऊर्जा संबंधी मामलों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
- V4+भारत समूह एक राजनयिक संवाद प्रारूप है, जो भारत और विसेग्राद समूह को एक साथ लाता है।
- भारत के चारों V4 देशों के साथ लंबे समय से सुदृढ़ और व्यापक द्विपक्षीय संबंध हैं।
- V4+भारत प्रारूप संवाद और सहयोग के लिए एक अतिरिक्त मंच प्रदान करता है, जो पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के साथ भारत के मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाता है।
V4 और बैठक का महत्व
- मध्य यूरोप के साथ संबंधों को मजबूत करना: यह प्रारूप भारत को चार मध्य यूरोपीय देशों के साथ सामूहिक रूप से जुड़ने के लिए एक अतिरिक्त मंच प्रदान करता है।
- राजनीतिक सहयोग: वार्षिक विदेश मंत्रियों की बैठकें भारत और V4 के बीच नियमित राजनीतिक संवाद को बढ़ावा दे सकती हैं।
- आर्थिक सहयोग: प्रस्तावित वार्षिक व्यापार मंच भारतीय और V4 देशों के व्यवसायों के बीच अधिक संवाद को बढ़ावा देने तथा व्यापार और निवेश सहयोग को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार: देशों ने प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है।
- रक्षा सहयोग: भारत के सभी V4 देशों के साथ रक्षा सहयोग का मजबूत इतिहास रहा है और यह बैठक रक्षा सहयोग को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है।
- कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंध: कनेक्टिविटी, गतिशीलता, सांस्कृतिक सहयोग और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्र में सहयोग भारत और मध्य यूरोप के बीच संबंधों को और मजबूत कर सकता है।
- रणनीतिक सहयोग: शांति और सुरक्षा, वैश्विक एवं क्षेत्रीय घटनाक्रमों तथा बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा रणनीतिक जुड़ाव के लिए एक अतिरिक्त मार्ग प्रदान करती है।
- बहुपक्षवाद: सुधारित बहुपक्षवाद और ग्लोबल साउथ को प्रभावित करने वाले मुद्दों सहित समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को मजबूत करता है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए समर्थन: चारों V4 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए व्यक्त किया गया समर्थन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के भारत के प्रयासों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- भारत–यूरोपीय संघ संबंधों का पूरक: V4+भारत प्रारूप चारों V4 देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के साथ भारत के बढ़ते संबंधों को भी पूरक बना सकता है।
