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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय  विषय।

संदर्भ: 11वाँ आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर 2026 को स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद विषय के तहत मनाया जा रहा है।

आयुर्वेद दिवस के बारे में

  • आयुर्वेद 5,000 से अधिक वर्ष पुराना जीवन-विज्ञान है, जो ऋग्वेद के समय का  हैं।
  • आयुर्वेद शब्द आयु (जीवन) और वेद (विज्ञान) से मिलकर बना है। इसका मूल उद्देश्य—“स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं।”—स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखना तथा रोगी व्यक्ति के रोग का उपचार करना है।
  • आयुर्वेद वास्तविक स्वास्थ्य को शरीर की चयापचय संबंधी इकाइयों के सामंजस्यपूर्ण संतुलन के रूप में परिभाषित करता है। इसके लिए जैव-ऊर्जाओं (दोष), चयापचय अग्नि (अग्नि), शारीरिक ऊतकों (धातु) और अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन (मल) के बीच उचित संतुलन आवश्यक है। इसके साथ ही आत्मा (आत्मा), मन (मनस्) और इंद्रियों (इंद्रिय) का संतुलन भी आवश्यक माना जाता है।
  • पौधों, पशु-उत्पादों और खनिजों के औषधीय एवं चिकित्सीय गुणों का वर्णन चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में किया गया है।
  • सरकार ने इस विरासत को सम्मानित करने और बढ़ावा देने के लिए 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद दिवस मनाने की शुरुआत की।
  • नई दिल्ली में आयोजित एकल संगोष्ठी से शुरू होकर आयुर्वेद दिवस अब 150 से अधिक देशों में चलने वाले एक व्यापक अभियान के रूप में विकसित हो चुका है। 2025 में 21,874 गतिविधियाँ पंजीकृत की गई थीं।
  • 2025 से 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाने की निश्चित तिथि निर्धारित की गई है।

दिवस का महत्व

  • वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य: यह दिवस आयुर्वेद की समकालीन प्रासंगिकता को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, साक्ष्य-आधारित प्रमाणीकरण और गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देता है।
  • स्वास्थ्य सेवा में एकीकरण: आयुष क्लीनिकों, अस्पतालों, विभागों, टेलीमेडिसिन और एकीकृत स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से समकालीन स्वास्थ्य सेवा के साथ आयुर्वेद के बढ़ते एकीकरण का पता चलता है।
  • शिक्षा और अनुसंधान: आयुर्वेद महाविद्यालयों, स्नातक एवं स्नातकोत्तर सीटों, अनुसंधान कार्यक्रमों और उत्कृष्टता केंद्रों के विस्तार से शैक्षिक एवं अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो रहा है।
  • वैश्विक मान्यता: विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोगों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण के 11वें संशोधन मॉड्यूल में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी की शब्दावली को शामिल किया गया है, जिससे पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित निदानों के मानकीकृत अभिलेखीकरण में सहायता मिलती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय पहुँच: अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों, आयुष सूचना प्रकोष्ठों, अकादमिक चेयर्स, अनुसंधान सहयोगों और वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा पहलों के माध्यम से आयुर्वेद की वैश्विक पहुँच का विस्तार हो रहा है।

आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल

  • राष्ट्रीय आयुष मिशन: 2014–15 से 2025–26 के बीच, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के माध्यम से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ₹6,406.99 करोड़ से अधिक की राशि जारी की। 19 सितंबर 2026 तक 12,260 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) कार्यरत हैं।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और टेलीमेडिसिन: 13,249 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में आयुष सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें 6,302 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 3,191 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 475 जिला अस्पताल और 3,281 अन्य स्वास्थ्य सुविधाएँ शामिल हैं। ई-संजीवनी के माध्यम से आयुष ओपीडी सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • शिक्षा और अनुसंधान: मार्च 2026 तक, भारत में 593 आयुर्वेद महाविद्यालय, 45,245 स्नातक सीटें और 5,673 स्नातकोत्तर सीटें हैं। आयुर्ज्ञान, आयुर-स्वास्थ्य योजना और सीसीआरएएस अनुसंधान, नैदानिक अध्ययन, औषधि अनुसंधान और उत्कृष्टता केंद्रों को सहायता प्रदान करते हैं।
  • गुणवत्ता और विनियमन: आयुर्वेदिक औषधियों का विनियमन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत किया जाता है। ई-औषधि पोर्टल औषधि लाइसेंसिंग में सहायता करता है, जबकि आयुर्वेद आहार आयुर्वेदिक आहार उत्पादों के लिए एक विनियामक ढाँचा प्रदान करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत ने 27 देश-से-देश समझौता ज्ञापनों, 16 अकादमिक चेयर समझौता ज्ञापनों और 57 संस्थान-से-संस्थान समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। 43 विदेशी देशों में 46 आयुष सूचना प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं तथा विदेशी नागरिकों को 104 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की गई हैं।
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