संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सांविधिक, विनियामक एवं विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।
संदर्भ: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतरराज्यीय परिषद आदेश, 1990 में संशोधन किया है, ताकि राष्ट्रपति शासन से संबंधित निर्दिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान लागू होने पर परिषद की बैठकों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की भागीदारी का प्रावधान किया जा सके।
अन्य संबंधित जानकारी
- अंतरराज्यीय परिषद (संशोधन) आदेश, 2026 को गृह मंत्रालय द्वारा संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत अधिसूचित किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हुआ और भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया।
- इस संशोधन द्वारा अंतरराज्यीय परिषद आदेश, 1990 के खंड 2 के मौजूदा परंतुक को चार भागों वाले एक प्रावधान से प्रतिस्थापित किया गया है, जिसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि किन परिस्थितियों में संबंधित राज्यपाल या उपराज्यपाल को परिषद की बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा।
संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ
- अनुच्छेद 356 के तहत राज्य: किसी राज्य में राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 356 के तहत जारी उद्घोषणा लागू होने पर उस राज्य के राज्यपाल को आमंत्रित किया जाएगा।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली: जब राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 239AB के तहत जारी आदेश लागू हो, तब दिल्ली के उपराज्यपाल को आमंत्रित किया जाएगा।
- पुडुचेरी: जब राष्ट्रपति द्वारा संघ राज्य क्षेत्र शासन अधिनियम, 1963 की धारा 51 के तहत जारी आदेश लागू हो, तब पुडुचेरी के उपराज्यपाल को आमंत्रित किया जाएगा।
- जम्मू और कश्मीर: जब राष्ट्रपति द्वारा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73 के तहत जारी आदेश लागू हो, तब जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल को आमंत्रित किया जाएगा।
- इस प्रकार, संशोधन अनुच्छेद 356 के तहत राज्यों से संबंधित प्रावधान को बनाए रखता है तथा दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू और कश्मीर के लिए विशिष्ट प्रावधान जोड़ता है, जिससे 1990 के ढाँचे को उनकी वर्तमान संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्थाओं के अनुरूप अद्यतन किया गया है।
संशोधन का महत्व
- 1990 के ढाँचे को अद्यतन करता है: यह संशोधन केंद्र शासित प्रदेशों की वर्तमान संवैधानिक और प्रशासनिक संरचना को प्रतिबिंबित करने के लिए अंतर-राज्यीय परिषद आदेश को अद्यतन करता है।
- 2019 के बाद के जम्मू और कश्मीर को शामिल करता है: यह जम्मू और कश्मीर की पूर्व संवैधानिक व्यवस्था के पुराने संदर्भ को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत लागू प्रावधान से प्रतिस्थापित करता है।
- विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करता है: यह विशेष रूप से दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपालों की भागीदारी का प्रावधान करता है, जब निर्दिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान लागू हों।
- भागीदारी की एक विशिष्ट व्यवस्था प्रदान करता है: यह संशोधन उन अवधियों के दौरान राज्यपालों और संबंधित उपराज्यपालों की अंतर-राज्यीय परिषद की बैठकों में भागीदारी के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था स्थापित करता है, जब केंद्र द्वारा प्रशासन से संबंधित सूचीबद्ध प्रावधान लागू हों।
अंतर-राज्यीय परिषद के बारे में
- अंतर-राज्यीय परिषद की स्थापना अनुच्छेद 263 के तहत 28 मई, 1990 के राष्ट्रपति आदेश द्वारा, केंद्र-राज्य संबंधों पर सरकारिया आयोग की सिफारिश के बाद की गई थी।
- अनुच्छेद 263 के तहत कार्य: अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को एक ऐसी परिषद स्थापित करने में सक्षम बनाता है जो राज्यों के बीच विवादों की जाँच एवं उन पर सलाह देने, संघ और राज्यों के बीच अथवा राज्यों के बीच सामान्य हित के विषयों पर चर्चा करने तथा नीतियों और कार्यों के बेहतर समन्वय के लिए सिफारिशें करने का कार्य करती है।
- संरचना: परिषद में प्रधानमंत्री अध्यक्ष के रूप में, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधान सभाओं वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, विधान सभा के बिना केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक तथा प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट रैंक के छह केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं।
- मूल 1990 के आदेश में 19 जुलाई, 1990 को संशोधन किया गया, जिसके तहत राष्ट्रपति शासन के अधीन किसी राज्य के राज्यपाल को परिषद की बैठकों में भाग लेने का प्रावधान किया गया। इसके बाद 24 दिसंबर, 1996 को संशोधन कर अध्यक्ष को अन्य केंद्रीय मंत्रियों में से स्थायी आमंत्रित सदस्यों को नामित करने का प्रावधान किया गया।
