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सामान्य अध्ययन-3: देश के विभिन्न भागों में प्रमुख फसलें एवं फसल प्रतिरूप, कृषि उपज का परिवहन एवं विपणन तथा इससे संबंधित मुद्दे एवं बाधाएँ; किसानों की सहायता में ई-प्रौद्योगिकी।

संदर्भ: भारत ने अपने कृषि कार्बन बाजार के खेत-स्तरीय कार्यान्वयन की दिशा में कदम बढ़ाया है। पंजाब और हरियाणा के 2,550 किसानों को पुनर्योजी कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए डिजिटल भुगतान प्राप्त हुआ है।

भारत में पहली मृदा-कार्बन भुगतान पहल के बारे में

  • पहला मृदा-कार्बन भुगतान: पहला मृदा-कार्बन भुगतान पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना में ‘आदि’ किसान कार्बन कार्यक्रम के तहत जारी किया गया।
  • कार्यान्वयन: कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक ने भाग लेने वाले किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भुगतान शुरू किया।
  • कार्यक्रम: ‘आदि’ कार्यक्रम को ग्रो इंडिगो (Grow Indigo) द्वारा 2019 में ICAR के तकनीकी मार्गदर्शन में शुरू किया गया था।
  • भाग लेने वाले किसान: पंजाब और हरियाणा के कुल 2,550 छोटे और सीमांत किसानों को डिजिटल भुगतान प्राप्त हुआ।
  • भुगतान राशि: किसानों को उनके खेतों से उत्पन्न कार्बन क्रेडिट में हिस्सेदारी के आधार पर लगभग ₹3,000–₹15,000 का भुगतान प्राप्त हुआ।
  • कुल भुगतान: भाग लेने वाले किसानों को कुल ₹2.9 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई।

मुख्य विशेषताएँ

  • पुनर्योजी कृषि पद्धतियाँ: 2019 से 2022 के बीच भाग लेने वाले किसानों ने प्रत्यक्ष बीजारोपण वाली धान खेती (DSR), कम जुताई तथा फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन जैसी पद्धतियाँ अपनाईं।
  • वैज्ञानिक मापन और सत्यापन: कार्बन क्रेडिट जारी करने से पहले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी और मृदा कार्बन में वृद्धि का मापन किया गया तथा स्वतंत्र रूप से इसका सत्यापन किया गया।
  • कार्बन क्रेडिट का सृजन: ‘आदि’ कार्यक्रम सात राज्यों में 20 लाख एकड़ से अधिक भूमि और 1 लाख से अधिक किसानों को कवर करता है। इसके तहत वेरा VM0042 पद्धति के अनुसार कृषि कार्बन क्रेडिट जारी किए गए हैं।
  • अग्रिम भुगतान तंत्र: कार्बन क्रेडिट की पूरी बिक्री होने से पहले ही ग्रो इंडिगो ने अपने स्वयं के कोष से भुगतान जारी किया, जिससे किसानों को बिक्री से प्राप्त आय की प्रतीक्षा किए बिना भुगतान मिल सका। किसान निश्चित अग्रिम भुगतान या क्रेडिट की बिक्री के बाद प्राप्त शुद्ध कार्बन राजस्व का 75% प्राप्त करने में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते थे।
  • वैज्ञानिक सहयोग: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) सहित ICAR के संस्थानों ने ग्रीनहाउस गैसों के लेखांकन, फसल-सिमुलेशन मॉडलिंग, मृदा नमूना लेने की प्रोटोकॉल, क्षेत्रीय टीमों के प्रशिक्षण और रिमोट सेंसिंग आधारित दृष्टिकोणों में योगदान दिया।

महत्त्व

  • किसानों के लिए अतिरिक्त आय: कार्बन भुगतान सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करता है और छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर उत्पन्न करता है।
  • जल संरक्षण: पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में प्रत्यक्ष बीजारोपण वाली धान खेती (DSR) सिंचाई की आवश्यकता को कम कर सकती है। कार्यक्रम के अनुसार, 2019–2022 के दौरान अपनाई गई पद्धतियों से 45 अरब लीटर पानी बचाने में मदद मिली।
  • वायु प्रदूषण में कमी: फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन से पराली जलाने में कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम के अनुमान के अनुसार, 2 लाख टन से अधिक फसल अवशेषों को जलने से बचाया गया, जिससे लगभग 1,000 टन PM2.5 उत्सर्जन को रोका जा सका।
  • जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा: न्यूनतम मृदा व्यवधान, फसल अवशेषों को बनाए रखना और बेहतर मृदा प्रबंधन जैसी पद्धतियाँ मृदा स्वास्थ्य, संसाधन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की लचीलापन क्षमता बढ़ाने में योगदान कर सकती हैं।
  • पर्यावरणीय परिणामों को आर्थिक प्रोत्साहनों से जोड़ना: यह पहल दर्शाती है कि मृदा कार्बन में वैज्ञानिक रूप से मापी गई वृद्धि को कार्बन क्रेडिट में परिवर्तित करके किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ से जोड़ा जा सकता है। इससे भारत में पुनर्योजी कृषि के व्यापक स्तर पर अपनाए जाने को बढ़ावा मिल सकता है।
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