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सामान्य अध्ययन-2: संघ और राज्यों के कार्य एवं उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों एवं वित्त का हस्तांतरण तथा उससे संबंधित चुनौतियाँ।
संदर्भ: केंद्र ने लद्दाख को अतिरिक्त संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए नए संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 371(K) प्रस्तावित किया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- हितधारकों के बीच चर्चा: यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के बीच हुई चर्चाओं के बाद सामने आया है।
- विशिष्ट शासन मॉडल: प्रस्ताव में लद्दाख के लिए विशेष रूप से तैयार विशिष्ट (Sui Generis) शासन मॉडल की परिकल्पना की गई है। हालांकि, पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को दीर्घकालिक आकांक्षा के रूप में बनाए रखा गया है।
- विधायी शक्तियाँ: प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित शासी निकाय स्थापित किया जाएगा। इसे भूमि, संस्कृति एवं भाषा, वन, पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित मामलों में विधायी शक्तियाँ प्राप्त होंगी।
- सैद्धांतिक स्तर: प्रस्ताव अभी सैद्धांतिक स्तर पर है। इसका कोई मसौदा अभी तैयार नहीं किया गया है। साथ ही, कार्यपालिका, वित्तीय, योजना, पुलिस तथा कानून-व्यवस्था संबंधी शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न अभी अनसुलझे हैं।
लद्दाख संवैधानिक सुरक्षा की मांग क्यों कर रहा है?
- 2019 के बाद हुए बदलाव: लद्दाख की अधिक राजनीतिक एवं संवैधानिक सुरक्षा की मांग अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद तेज हुई। इसके बाद लद्दाख बिना विधानमंडल वाले एक अलग केंद्रशासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आया।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व: 2019 से पहले लद्दाख का तत्कालीन जम्मू-कश्मीर विधानसभा में चार विधायकों के माध्यम से प्रतिनिधित्व था। केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद इसका प्रशासन काफी हद तक नौकरशाहों द्वारा संचालित होने लगा। इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर चिंताएँ बढ़ीं।
- भूमि,रोजगार और पहचान: जम्मू-कश्मीर में अधिवास नियमों में बदलाव के बाद लद्दाख में भूमि, रोजगार, जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक पहचान से संबंधित चिंताएँ और बढ़ीं।
- लद्दाख में दो पर्वतीय परिषदें—लेह और कारगिल हैं, लेकिन इन्हें छठी अनुसूची के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है और इनकी शक्तियाँ सीमित हैं।
- लद्दाख के प्रतिनिधियों की मांगें: लद्दाख के प्रतिनिधियों ने पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण तथा अलग लद्दाख प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा की मांग दोहराई है।
छठी अनुसूची के बारे में
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 244 के अंतर्गत छठी अनुसूची निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों (ADCs) की स्थापना का प्रावधान करती है। इन परिषदों को विधायी, न्यायिक और प्रशासनिक स्वायत्तता का एक स्तर प्राप्त होता है।
- लागू क्षेत्र एवं शक्तियाँ: छठी अनुसूची वर्तमान में असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों में लागू है।
- इन परिषदों को भूमि, वन, जल, कृषि, ग्राम प्रशासन, सामाजिक रीति-रिवाज, उत्तराधिकार और खनन से संबंधित मामलों में शक्तियाँ प्राप्त हो सकती हैं।
- लद्दाख और छठी अनुसूची: सितंबर 2019 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने लद्दाख की मुख्यतः जनजातीय आबादी और विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए इसे छठी अनुसूची के अंतर्गत शामिल करने की सिफारिश की।
- हालांकि, अभी तक पूर्वोत्तर के बाहर किसी भी क्षेत्र को छठी अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है।
अनुच्छेद 371(K) छठी अनुसूची से कैसे अलग होगा?

- प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) के तहत केवल छठी अनुसूची को लद्दाख तक विस्तारित करने के बजाय लद्दाख के लिए एक अलग और विशेष संवैधानिक व्यवस्था स्थापित की जाएगी।
- छठी अनुसूची संवैधानिक रूप से निर्धारित शक्तियों वाले स्वायत्त जिला-स्तरीय संस्थानों का प्रावधान करती है। इसके विपरीत, प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) के तहत केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर एक प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित शासी निकाय की परिकल्पना की गई है, जिसे निर्दिष्ट विषयों पर विधायी अधिकार प्राप्त होंगे।
- हालांकि, दोनों व्यवस्थाओं के बीच वास्तविक अंतर प्रस्तावित संवैधानिक प्रावधान के अंतिम मसौदे और उसकी भाषा पर निर्भर करेगा।
प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) से जुड़े प्रमुख मुद्दे
- शक्तियों का दायरा: सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि प्रस्तावित निर्वाचित निकाय को वास्तव में कितनी शक्तियाँ प्रदान की जाएंगी।
- अनसुलझी शक्तियाँ: केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच इसकी कार्यकारी, वित्तीय एवं योजना संबंधी शक्तियों तथा पुलिस एवं कानून-व्यवस्था में इसकी भूमिका को लेकर अभी सहमति नहीं बनी है।
- अस्पष्ट स्वायत्तता: जब तक विस्तृत मसौदा तैयार नहीं होता, तब तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित निकाय को वास्तव में कितनी स्वायत्तता प्राप्त होगी।
- संसदीय संशोधन: अनुच्छेद 371(K) को संविधान में शामिल करने के लिए संसद द्वारा संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा, क्योंकि कार्यपालिका इसे स्वतंत्र रूप से लागू नहीं कर सकती।
लद्दाख के लिए महत्व
- प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) लद्दाख को उसकी भूमि, संस्कृति, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए एक विशेष रूप से तैयार संवैधानिक ढाँचा प्रदान कर सकता है। साथ ही, यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को भी मजबूत कर सकता है।
- इसका विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह एक केंद्रशासित प्रदेश के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था स्थापित करने की संभावित क्षमता रखता है।
- इस प्रकार, लद्दाख में छठी अनुसूची का विस्तार करने के बजाय, यह प्रस्ताव क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार एक अलग संवैधानिक मॉडल स्थापित करने का प्रयास करता है।
