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संदर्भ: वर्ष 2020 में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना किसी जमानत के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई पीएम स्वनिधि ने अपने पुनर्गठित चरण का एक वर्ष पूरा कर लिया है। इस चरण में औपचारिक ऋण, डिजिटल समावेशन, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका विकास पर अधिक बल दिया गया है।
पीएम स्वनिधि के बारे में
- पीएम स्वनिधि एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसे 1 जून 2020 को आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा कोविड-19 महामारी से प्रभावित शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना किसी जमानत के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया था।
- योजना के तहत क्रमिक ऋण प्रदान किए जाते हैं। प्रारंभिक रूप से ₹10,000, ₹20,000 और ₹50,000 की ऋण किस्तों को बाद में क्रमशः ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक बढ़ाया गया। समय पर ऋण चुकाने पर 7% ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है, जबकि डिजिटल लेन-देन को भी प्रोत्साहित किया जाता है।
- ऋण उपलब्ध कराने के अलावा, यह योजना विक्रेताओं को संस्थागत वित्त व्यवस्था से जोड़कर, डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करके और उनकी ऋण पात्रता बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराकर वित्तीय समावेशन और औपचारिकीकरण को बढ़ावा देती है। विक्रेता वेंडिंग प्रमाण-पत्र/पहचान पत्र या, जहाँ लागू हो, अनुशंसा पत्र (LoR) के माध्यम से योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
- 2025 के पुनर्गठन के तहत ऋण प्रदान करने की अवधि को 31 मार्च 2030 तक बढ़ाया गया है। इसके लिए ₹7,332 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है और 1.15 करोड़ लाभार्थियों, जिसमें 50 लाख नए लाभार्थी शामिल हैं, का लक्ष्य रखा गया है। पात्र विक्रेताओं के लिए ₹30,000 तक का यूपीआई-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड भी शुरू किया गया है।
- पुनर्गठित योजना में डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता, विपणन, खाद्य-सुरक्षा प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अभिसरण पर भी विशेष जोर दिया गया है। यह केवल ऋण उपलब्ध कराने से आगे बढ़कर व्यापक आजीविका विकास की दिशा में योजना के विस्तार को दर्शाता है।
पुनर्गठन के बाद क्या बदलाव हुए?
- बढ़ी हुई ऋण राशि: पहली और दूसरी ऋण किस्त को बढ़ाकर क्रमशः ₹15,000 और ₹25,000 कर दिया गया है, जबकि तीसरी किस्त ₹50,000 ही है। इससे कार्यशील पूंजी की बढ़ती आवश्यकताओं के लिए क्रमिक रूप से अधिक ऋण प्राप्त करना संभव हुआ है।
- नया डिजिटल-क्रेडिट माध्यम: दूसरी ऋण किस्त का समय पर पुनर्भुगतान करने वाले पात्र विक्रेता ₹30,000 तक के यूपीआई-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड का लाभ उठा सकते हैं, जिससे उन्हें औपचारिक ऋण का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होता है।
- डिजिटल ऋण व्यवस्था और व्यापक कवरेज: एक एंड-टू-एंड डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म (DLP) आवेदन, सत्यापन, अनुमोदन और ऋण वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाता है। वहीं, सिटी रीजन अप्रोच के माध्यम से कवरेज का विस्तार जनगणना नगरों तक किया गया है। वेंडर माइग्रेशन मॉड्यूल विक्रेताओं के एक शहरी स्थानीय निकाय (ULB) या जनगणना नगर से दूसरे स्थान पर जाने पर लाभों की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
- ऋण से आगे: खुदरा और थोक डिजिटल लेन-देन पर ₹1,600 तक का कैशबैक, साथ ही उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल कौशल और विपणन संबंधी सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य वित्तीय और आजीविका समावेशन को और गहरा करना है।
- सामाजिक सुरक्षा और अवसंरचना: स्वनिधि से समृद्धि, लोक कल्याण मेले, FSSAI प्रशिक्षण और प्रस्तावित 50 स्ट्रीट फूड हब योजना के दायरे को कल्याणकारी योजनाओं के अभिसरण, क्षमता निर्माण और बेहतर रेहड़ी-पटरी विक्रेता अवसंरचना की दिशा में विस्तारित करते हैं।
पुनर्गठन का एक वर्ष: प्रमुख उपलब्धियाँ
- ऋण पहुँच का विस्तार: पहले वर्ष में ₹6,294 करोड़ के 21.86 लाख ऋण वितरित किए गए, जिससे 10.56 लाख नए लाभार्थियों को लाभ मिला। योजना की शुरुआत से अब तक 78.68 लाख विक्रेताओं ने ₹19,171 करोड़ से अधिक मूल्य के 1.18 करोड़ से अधिक ऋण प्राप्त किए हैं।
- डिजिटल समावेशन को गहरा करना: 57.09 लाख विक्रेताओं ने 908 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए हैं, जबकि डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन के रूप में ₹418.78 करोड़ जारी किए गए हैं।
- औपचारिक वित्तीय पहुँच में वृद्धि: पहले वर्ष के दौरान 27,077 UPI-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए। समय पर ऋण चुकाने के लिए अब तक संचयी रूप से ₹421 करोड़ की ब्याज सब्सिडी जारी की गई है।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अभिसरण: स्वनिधि से समृद्धि के तहत 51.15 लाख से अधिक लाभार्थी परिवारों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग की गई है। इसके परिणामस्वरूप चयनित 8 केंद्रीय सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत 1.59 करोड़ से अधिक स्वीकृतियाँ प्रदान की गई हैं।
- आजीविका और क्षमता निर्माण: 6 लाख से अधिक स्ट्रीट-फूड विक्रेताओं को FSSAI प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, स्ट्रीट फूड हब, लोक कल्याण मेले और स्टार्टअप चैलेंज अवसंरचना, बाजार तक पहुँच और उद्यम विकास की दिशा में सहायता का विस्तार कर रहे हैं।
महत्व: सूक्ष्म ऋण (माइक्रोक्रेडिट) से आजीविका विकास की ओर
- अनौपचारिक वित्त का औपचारिकीकरण: स्वतंत्र आकलनों में पाया गया कि लगभग 95% लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक संस्थागत ऋण प्राप्त किया, जबकि लगभग 30% लाभार्थियों ने बाद में पीएम स्वनिधि के अतिरिक्त भी ऋण प्राप्त किया। यह बेहतर वित्तीय समावेशन और ऋण-विश्वसनीयता में वृद्धि का संकेत है।
- उद्यमों की प्रगति में सहायता: क्रमिक ऋण विक्रेताओं को केवल आजीविका बहाली से आगे बढ़कर अधिक वस्तु-सूची, बेहतर रेहड़ी-पटरी अवसंरचना और व्यवसाय में विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता कर सकता है।
- डिजिटल वित्तीय सशक्तीकरण: डिजिटल लेन-देन और UPI-लिंक्ड ऋण विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ते हैं, जबकि लेन-देन का रिकॉर्ड भविष्य में औपचारिक ऋण तक पहुँच बनाने में संभावित रूप से सहायक हो सकता है।
- समग्र सामाजिक सुरक्षा: स्वनिधि से स्मुद्धि विक्रेताओं और उनके परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी हस्तक्षेपों से जोड़कर योजना के दायरे को केवल कार्यशील पूंजी तक सीमित न रखकर व्यापक सामाजिक सुरक्षा तक विस्तारित करता है।
- समावेशी शहरी विकास: स्ट्रीट वेंडरों को वैध आर्थिक गतिविधियों के संचालक के रूप में मान्यता देने के साथ बेहतर रेहड़ी-पटरी अवसंरचना और बाजार के अवसर उपलब्ध कराना, अनौपचारिक आजीविकाओं को अधिक समावेशी शहरी अर्थव्यवस्थाओं में एकीकृत करने में सहायता कर सकता है।
