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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
संदर्भ: अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील को रामसर अभिसमय के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (रामसर स्थल) के रूप में नामित किया गया है। इसके साथ ही यह राज्य का पहला रामसर स्थल बन गया है और भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 101 हो गई है।
ग्लॉ झील के बारे में
- ग्लॉ झील अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित कामलांग बाघ अभयारण्य एवं वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित एक निर्मल उच्च-ऊँचाई वाली मीठे पानी की झील है।
- पूर्वी हिमालयी परिदृश्य में स्थित यह झील जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त है तथा महत्वपूर्ण जलवैज्ञानिक और पारिस्थितिक कार्य करती है।
- यह झील मिजू मिश्मी (कमाण) और दिगारू मिश्मी (ताराऊन) समुदायों के लिए पवित्र है। इन समुदायों की पारंपरिक संरक्षकता और समुदाय-आधारित संरक्षण प्रथाओं ने झील की पारिस्थितिक अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- रामसर स्थल का दर्जा ग्लॉ झील के पारिस्थितिक महत्व को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्रदान करता है तथा दशकों से चले आ रहे सफल समुदाय-आधारित संरक्षण प्रयासों को मान्यता देता है।

पदनाम का महत्व
- अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल: पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों के संरक्षण को बढ़ावा देता है।
- स्वदेशी संरक्षण प्रयासों की मान्यता: इडु मिश्मी समुदाय की पारंपरिक संरक्षण प्रथाओं को मान्यता देता है तथा जैव विविधता संरक्षण में स्वदेशी ज्ञान की भूमिका को रेखांकित करता है।
- वैज्ञानिक संरक्षण को बढ़ावा: पारिस्थितिक निगरानी, अनुसंधान, सतत प्रबंधन और न्यूनतम प्रभाव वाले पारिस्थितिकी पर्यटन के अवसरों को बढ़ाता है।
- भारत के आर्द्रभूमि नेटवर्क को मजबूती: भारत के रामसर स्थलों के नेटवर्क का विस्तार कर इसे 101 स्थलों तक पहुँचाता है, जिससे आर्द्रभूमि संरक्षण और सतत विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता को बल मिलता है।
संरक्षण में चुनौतियाँ
- नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र: उच्च-ऊँचाई वाली आर्द्रभूमियाँ जलवायु परिवर्तन, परिवर्तित जलविज्ञान व्यवस्था और पारिस्थितिक क्षरण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
- विकास संबंधी दबाव: बुनियादी ढाँचे का विकास, अनियंत्रित पर्यटन और अन्य मानवीय गतिविधियाँ झील की पारिस्थितिक विशेषताओं के लिए खतरा उत्पन्न कर सकती हैं।
- वैज्ञानिक निगरानी की आवश्यकता: दीर्घकालिक पारिस्थितिक आँकड़ों और निगरानी की सीमित उपलब्धता साक्ष्य-आधारित संरक्षण एवं अनुकूली प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है।
- संरक्षण एवं आजीविका के बीच संतुलन: स्वदेशी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा के साथ-साथ प्रभावी आर्द्रभूमि संरक्षण सुनिश्चित करना एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।
आगे की राह
- समुदाय-आधारित संरक्षण को मजबूत करना: सहभागी आर्द्रभूमि प्रबंधन के माध्यम से इडु मिश्मी समुदाय की पारंपरिक संरक्षण व्यवस्था को और सुदृढ़ करना।
- वैज्ञानिक निगरानी को बढ़ाना: जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और जलवायु प्रभावों का आकलन करने के लिए दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी एवं अनुसंधान कार्यक्रम स्थापित करना।
- न्यूनतम प्रभाव वाले पारिस्थितिकी पर्यटन को बढ़ावा देना: ऐसे जिम्मेदार प्रकृति-आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित करना, जो झील की पारिस्थितिक अखंडता से समझौता किए बिना स्थानीय आजीविका में सहायता करें।
- एकीकृत आर्द्रभूमि प्रबंधन लागू करना: सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों द्वारा समन्वित कार्रवाई के माध्यम से आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
