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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार; महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच– उनकी संरचना, अधिदेश।
संदर्भ: गाज़ा शांति बोर्ड ने हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण पर एक समझौते की घोषणा की है। यह 20-सूत्रीय गाज़ा शांति योजना के तहत कार्यान्वयन का पहला प्रमुख चरण माना जा रहा है।
20-सूत्रीय गाज़ा शांति योजना की पृष्ठभूमि
- 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तुत 20-सूत्रीय गाज़ा शांति योजना का उद्देश्य इज़राइल–हमास संघर्ष को चरणबद्ध राजनीतिक, सुरक्षा और पुनर्निर्माण रोडमैप के माध्यम से समाप्त करना है।
- प्रथम चरण में युद्धविराम, बंधकों की अदला-बदली तथा इज़राइली बलों की सीमित वापसी पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- द्वितीय चरण में हमास का निरस्त्रीकरण, शासन का हस्तांतरण एक तकनीकी विशेषज्ञों के नेतृत्व वाले फ़िलिस्तीनी प्रशासन को, अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती तथा गाज़ा का पुनर्निर्माण शामिल है।
- वर्तमान समझौता द्वितीय चरण के कार्यान्वयन की शुरुआत को दर्शाता है।

समझौते की प्रमुख विशेषताएँ
- चरणबद्ध निरस्त्रीकरण: हमास ने सहमत कार्यान्वयन रोडमैप के अधीन अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र के तहत अपनी सैन्य शाखा के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण के रोडमैप पर सहमति व्यक्त की।
- राजनीतिक संक्रमण: गाज़ा का प्रशासन गाज़ा प्रशासन हेतु राष्ट्रीय समिति (NCAG) को सौंपा जाएगा, जो तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा संचालित तथा गैर-राजनीतिक फ़िलिस्तीनी निकाय है। इसके साथ ही गाज़ा में हमास की शासनकारी भूमिका समाप्त हो जाएगी।
- अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र: अरब देशों के सैनिकों से युक्त एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) का प्रस्ताव किया गया है, जो सुरक्षा बनाए रखने, फ़िलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण देने तथा समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा।
- कार्यान्वयन अभी भी सशर्त: यद्यपि यह समझौता एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है, फिर भी निरस्त्रीकरण के क्रम, इज़राइली सेना की वापसी, बंधकों की रिहाई तथा दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
समझौते का महत्व
- कार्यान्वयन की पहली बड़ी उपलब्धि: यह 20-सूत्रीय गाज़ा शांति योजना के तहत पहला ठोस राजनीतिक मील का पत्थर है, जो शांति प्रक्रिया को वार्ताओं से आगे बढ़ाकर कार्यान्वयन की दिशा में ले जाता है।
- राजनीतिक संक्रमण को सुगम बनाता है: यह हमास के सशस्त्र शासन के स्थान पर तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा संचालित फ़िलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना की संभावना खोलता है, जिससे गाज़ा में संस्थागत सुधारों की नींव पड़ती है।
- मानवीय पुनर्बहाली को सक्षम बनाता है: यह मानवीय सहायता के विस्तार, महत्वपूर्ण अवसंरचना के पुनर्निर्माण तथा गाज़ा की अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करता है।
- कूटनीतिक प्रक्रिया को पुनर्जीवित करता है: यदि इसका सफलतापूर्वक कार्यान्वयन होता है, तो यह क्षेत्रीय तनाव को कम कर सकता है तथा वार्ता आधारित द्वि-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) की दिशा में नई गति प्रदान कर सकता है।
चुनौतियाँ/चिंताएँ
- क्रम निर्धारण पर विवाद: हमास पूर्ण निरस्त्रीकरण से पहले स्थायी युद्धविराम और इज़राइली सेना की पूर्ण वापसी की गारंटी चाहता है, जबकि इज़राइल सेना की वापसी पूरी करने से पहले सत्यापित निरस्त्रीकरण पर जोर देता है।
- सत्यापन एवं प्रवर्तन: हथियारों के भंडार, सुरंग नेटवर्क तथा निरस्त्रीकरण संबंधी प्रतिबद्धताओं के अनुपालन की निगरानी अभी भी एक बड़ी परिचालन चुनौती बनी हुई है।
- संघर्षोत्तर शासन: प्रस्तावित गाज़ा प्रशासन हेतु राष्ट्रीय समिति (NCAG) को फ़िलिस्तीनियों के बीच वैधता प्राप्त करनी होगी, साथ ही इज़राइल और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के साथ प्रभावी समन्वय भी सुनिश्चित करना होगा।
- व्यापक राजनीतिक गतिरोध: यह समझौता मुख्य रूप से गाज़ा पर केंद्रित है, जबकि पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक), यरूशलम, फ़िलिस्तीनी राजनीतिक एकता तथा अंतिम-स्थिति संबंधी वार्ताओं से जुड़े अनसुलझे मुद्दे अभी भी स्थायी शांति में बाधा बने हुए हैं।
आगे की राह
- चरणबद्ध एवं सत्यापन योग्य रोडमैप लागू करना: यह सुनिश्चित किया जाए कि निरस्त्रीकरण, बंधकों की रिहाई, इज़राइली सेना की वापसी तथा युद्धविराम संबंधी प्रतिबद्धताओं का कार्यान्वयन पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्यापित चरणों के माध्यम से हो।
- समावेशी फ़िलिस्तीनी शासन को सुदृढ़ बनाना: गाज़ा प्रशासन हेतु राष्ट्रीय समिति (NCAG) को व्यापक फ़िलिस्तीनी भागीदारी तथा निरंतर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और वित्तीय समर्थन के माध्यम से सशक्त बनाया जाए।
- समन्वित अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना: संयुक्त राष्ट्र, अरब देशों तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के माध्यम से निरंतर मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण के लिए वित्तपोषण और कूटनीतिक सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
- राजनीतिक प्रक्रिया को पुनर्जीवित करना: वर्तमान समझौते को आधार बनाकर द्वि-राष्ट्र समाधान की दिशा में वार्ताएँ पुनः शुरू की जाएँ, ताकि इज़राइल और एक स्वतंत्र, संप्रभु फ़िलिस्तीन प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सकें।
