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संदर्भ: चीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर में हुआंगयान दाओ राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व के लिए प्रबंधन उपाय जारी किए हैं, जिससे फिलीपींस के साथ चल रहे समुद्री विवाद के बीच विवादित प्रवाल भित्ति (शोल) पर अपने प्रशासनिक नियंत्रण को और मजबूत किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • चीन ने हुआंगयान दाओ राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व के लिए प्रबंधन उपाय जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य हुआंगयान दाओ के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता, स्थिरता और सततता की रक्षा करना है।
  • इन उपायों के तहत बिना अनुमति मछली पकड़ने, खनन तथा मूंगे और विशाल शंखों के दोहन पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, संरक्षण संबंधी उद्देश्यों को छोड़कर अन्य सभी के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है।
  • पीएलए दक्षिणी थिएटर कमान ने हुआंगयान दाओ के आसपास के प्रादेशिक समुद्री क्षेत्र और वायु क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक-वायु अभ्यास भी आयोजित किया, जिससे विवादित जलक्षेत्र में चीन की उपस्थिति और मजबूत हुई।
  • हुआंगयान दाओ राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व हैनान प्रांत के सान्शा शहर में स्थित है, जहाँ प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र इसका प्रमुख संरक्षण क्षेत्र है।

दक्षिण चीन सागर के बारे में

  • दक्षिण चीन सागर चीन की मुख्यभूमि के ठीक दक्षिण में स्थित है तथा इसकी सीमाएँ ब्रुनेई, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम और सिंगापुर से लगती हैं।
  • यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक समुद्री क्षेत्रों में से एक है, जो हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है।
  • इस सागर में कई विवादित द्वीप समूह स्थित हैं, जिनमें स्कारबोरो शोल (हुआंगयान दाओ), स्प्रैटली द्वीपसमूह, पारासेल द्वीपसमूह और प्राटास द्वीपसमूह शामिल हैं।
  • चीन नाइन-डैश लाइन के आधार पर दक्षिण चीन सागर के लगभग 90% क्षेत्र पर दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इस पर अपने-अपने दावे करते हैं।

विवाद

  • चीन नाइन-डैश लाइन के आधार पर दक्षिण चीन सागर के अधिकांश भाग पर ऐतिहासिक समुद्री अधिकारों का दावा करता है, जबकि अन्य दावेदार देश संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के अंतर्गत अपने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के आधार पर दावा करते हैं।
  • चीन ने विशेष रूप से पारासेल और स्प्रैटली द्वीपसमूह में कृत्रिम द्वीपों, बंदरगाहों, सैन्य प्रतिष्ठानों और हवाई पट्टियों का निर्माण करके अपनी उपस्थिति बढ़ाई है।
  • 2016 में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) ने निर्णय दिया कि नाइन-डैश लाइन के आधार पर चीन का ऐतिहासिक अधिकारों का दावा UNCLOS के अंतर्गत कानूनी आधार नहीं रखता तथा यह अभिसमय के तहत प्रदान किए गए विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों (EEZs) के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
  • चीन ने न्यायाधिकरण के इस निर्णय को अस्वीकार कर दिया और यह कहते हुए इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया कि दक्षिण चीन सागर पर उसके अधिकार वैध हैं।

दक्षिण चीन सागर का महत्व

  • यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला एक प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग है, जिससे होकर वैश्विक व्यापार का लगभग 22% तथा वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 60% गुजरता है।
  • यह क्षेत्र मत्स्य संसाधनों से अत्यंत समृद्ध है। विश्व के आधे से अधिक मछली पकड़ने वाले जहाज इन जलक्षेत्रों में संचालित होते हैं, जिससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
  • अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, दक्षिण चीन सागर के समुद्र तल के नीचे लगभग 11 अरब बैरल तेल तथा 190 ट्रिलियन घन फुट प्राकृतिक गैस के भंडार होने का अनुमान है।

दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीप

  • स्कारबोरो शोल (हुआंगयान दाओ)
    • यह फिलीपींस के लूज़ोन द्वीप से लगभग 120 समुद्री मील पश्चिम में स्थित है।
    • इस पर चीन और फिलीपींस दोनों दावा करते हैं।
    • 2012 से चीन इस पर प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि फिलीपींस का कहना है कि यह शोल उसके विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर स्थित है।
  • स्प्रैटली द्वीपसमूह
    • इस पर चीन, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान पूर्ण या आंशिक दावा करते हैं।
    • 1968 से विभिन्न देशों ने इस द्वीपसमूह के अलग-अलग द्वीपों और अन्य भू-आकृतियों पर कब्ज़ा कर रखा है।
    • माना जाता है कि इस द्वीपसमूह में तेल, प्राकृतिक गैस और मत्स्य संसाधनों के महत्वपूर्ण भंडार हैं।
  • पैरासेल द्वीपसमूह
    • यह लगभग 130 द्वीपों और प्रवाल भित्तियों वाला एक द्वीपसमूह है, जिस पर चीन, वियतनाम और ताइवान दावा करते हैं।
    • 1974 में वियतनाम के साथ संघर्ष के बाद से चीन इस पर प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है।
    • 2012 से चीन, वियतनाम और ताइवान ने निर्माण गतिविधियों, भूमि पुनरुद्धार तथा सैन्य उपस्थिति के विस्तार के माध्यम से अपने-अपने दावों को और बल प्रदान किया है।
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