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समान्य अध्ययन-2: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।  

संदर्भ: सरकार ने संसद को सूचित किया है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भारतीय नक्षत्रमाला के साथ नौवहन (NavIC) प्रणाली में वर्तमान में इतने उपग्रह उपलब्ध नहीं हैं, जो स्वतंत्र स्थिति-निर्धारण, नौवहन एवं समय-निर्धारण (PNT) सेवाएँ प्रदान करने के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या को पूरा कर सकें। वर्तमान में केवल तीन उपग्रह ही नौवहन सिग्नल प्रसारित कर रहे हैं।

NavIC अब स्वतंत्र नौवहन सेवाएँ क्यों प्रदान नहीं कर सकता?

• वर्तमान स्थिति

  • NavIC के 11 उपग्रहों में से 8 अभी कार्यरत हैं। हालांकि, वर्तमान में केवल 3 उपग्रह नौवहन संकेत प्रसारित कर रहे हैं, जबकि शेष 5 उपग्रह एकतरफा संदेश सेवा का समर्थन कर रहे हैं। इस कारण NavIC की उपग्रह-व्यवस्था स्वतंत्र स्थिति-निर्धारण, नौवहन एवं समय-निर्धारण (PNT) सेवाएँ प्रदान करने के लिए आवश्यक न्यूनतम 4 उपग्रहों की संख्या से कम हो गई है। 
  • समय-निर्धारण सेवाएँ अभी भी चालू हैं, जिससे सटीक समय समन्वयन की आवश्यकता वाले अनुप्रयोगों को निर्बाध सहायता मिल रही है।

• इसके कारण

  • पहली पीढ़ी के उपग्रहों का पुराना होना: कई पहली पीढ़ी के IRNSS उपग्रह अपनी निर्धारित कार्य-आयु पूरी कर चुके हैं या उनमें महत्वपूर्ण ऑनबोर्ड प्रणालियों, विशेषकर परमाणु घड़ियों, में खराबी आई है।
  • IRNSS-1F की विफलता: नवीनतम समस्या तब सामने आई जब IRNSS-1F की शेष कार्यशील परमाणु घड़ी भी खराब हो गई, जिसके कारण वह नौवहन सेवाएँ प्रदान करने में असमर्थ हो गया।
  • उपग्रहों के प्रतिस्थापन में देरी : यद्यपि ISRO ने दूसरी पीढ़ी के नौवहन उपग्रह (NVS) तैनात करना शुरू कर दिया है, लेकिन NVS-02 को प्रणोदन प्रणाली में आई विसंगति के कारण निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। इसके परिणामस्वरूप पूरी उपग्रह-व्यवस्था को पुनः बहाल करने में देरी हुई है।

• स्वतंत्र बनाम बहु-नक्षत्र नौवहन

  • वर्तमान में NavIC स्वतंत्र नौवहन सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम नहीं है। हालांकि, अधिकांश नागरिक उपयोगकर्ताओं पर इसका प्रभाव सीमित है, क्योंकि आधुनिक रिसीवर सामान्यतः बहु-नक्षत्र GNSS पर काम करते हैं। ये रिसीवर GPS, Galileo, GLONASS और NavIC जैसी विभिन्न प्रणालियों से प्राप्त संकेतों को एक साथ मिलाकर नौवहन सेवाएँ प्रदान करते हैं।

NavIC की स्वतंत्र क्षमता क्यों महत्वपूर्ण है?

• रणनीतिक संप्रभुता : विदेशी GNSS पर निर्भरता के बिना विश्वसनीय नौवहन एवं समय-निर्धारण सेवाएँ सुनिश्चित करती है। विशेष रूप से संघर्ष, आपातकाल या बाहरी सेवाओं के प्रतिबंध की स्थिति में यह महत्वपूर्ण है।

• महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना: वास्तविक समय में रेलगाड़ियों की निगरानी, मछली पकड़ने वाले जहाजों के साथ संचार, वाहनों की निगरानी, आपदा प्रतिक्रिया, भारतीय मानक समय (IST) के प्रसार जैसी सेवाओं में सहायता करती है। भविष्य में विमानन और बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों जैसे क्षेत्रों के साथ इसके एकीकरण की संभावना है।

• विश्वसनीय स्वदेशी PNT सेवाएँ:  महत्वपूर्ण नागरिक, वाणिज्यिक और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए निर्बाध नौवहन एवं समय-निर्धारण सहायता सुनिश्चित करती है।

• तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष-आधारित नौवहन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करती है। रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।

आगे की राह 

• उपग्रह-समूह की शीघ्र पुनर्बहाली: NavIC की स्वतंत्र नौवहन क्षमता को बहाल करने के लिए NVS-03 और उसके बाद NVS-04 तथा NVS-05 के प्रक्षेपण एवं तैनाती की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।

• स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को मजबूत करना: दीर्घकालिक परिचालन क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए स्वदेशी परमाणु घड़ियों, उपग्रह पेलोड तथा ऑनबोर्ड अतिरिक्त प्रणालियों की विश्वसनीयता को बढ़ाना चाहिए।

• सुदृढ़ PNT पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: बहु-नक्षत्र GNSS की अंतर-संचालनीयता का लाभ उठाते हुए, एक स्वतंत्र और सुदृढ़ NavIC उपग्रह-समूह को पुनः स्थापित करना चाहिए।

• नागरिक उपयोग का विस्तार: L1-बैंड सक्षम NavIC रिसीवरों को बढ़ावा देना चाहिए तथा स्मार्टफोन, वाहनों, ड्रोन और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं में NavIC-संगत चिपसेट के व्यापक एकीकरण को प्रोत्साहित करना चाहिए।

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