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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय|  

संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (SNFAs) के लिए एक विवेकपूर्ण ढाँचा जारी किया है। इसके अंतर्गत विनियमित संस्थाओं (REs) द्वारा डिफ़ॉल्ट उधारकर्ताओं से प्राप्त अचल परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, मूल्यांकन, धारण, निपटान तथा प्रकटीकरण के लिए एक समान विवेकपूर्ण मानदंड निर्धारित किए गए हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

  • विनियमित संस्थाएँ (REs) कभी-कभी उन उधारकर्ताओं से अपना बकाया वसूलने के दौरान अचल परिसंपत्तियाँ प्राप्त कर लेती हैं, जिनके ऋण खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPAs) बन चुके होते हैं। चूँकि ऐसी परिसंपत्तियों को रखना उनका मुख्य व्यवसाय नहीं है, इसलिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने इनके समयबद्ध एवं पारदर्शी प्रबंधन को सुनिश्चित करने हेतु एक पृथक विवेकपूर्ण ढाँचा जारी किया है।
  • यह ढाँचा विभिन्न श्रेणियों की विनियमित संस्थाओं के लिए ऐसी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, मूल्यांकन, धारण, निपटान, प्रकटीकरण तथा प्रतिवेदन से संबंधित एक समान मानदंड निर्धारित करता है।
  • यह बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अंतर्गत बैंकों द्वारा अर्जित गैर-बैंकिंग परिसंपत्तियों (NBAs) के नियामकीय उपचार के संबंध में भी स्पष्टता प्रदान करता है।
  • इस ढाँचे को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (आवास वित्त कंपनियों सहित), अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान, लघु वित्त बैंक, शहरी सहकारी बैंक तथा अन्य निर्दिष्ट विनियमित संस्थाओं पर लागू तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान संबंधी निर्देशों में पृथक संशोधनों के माध्यम से लागू किया गया है। साथ ही, पूर्व से विद्यमान निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान भी किए गए हैं।

निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (SNFAs) क्या हैं?

  • निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (SNFAs) वे अचल परिसंपत्तियाँ हैं, जिन्हें कोई विनियमित संस्था ऐसे उधारकर्ता से अपनी बकाया राशि की पूर्ण या आंशिक वसूली के लिए प्राप्त करती है, जिसके ऋण खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत किया जा चुका हो।
  • SNFAs विभिन्न वसूली तंत्रों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैं, जिनमें वित्तीय परिसंपत्तियों का सरफेसी (SARFAESI) अधिनियम के अंतर्गत प्रवर्तन, द्विपक्षीय समझौते तथा अन्य कानूनी रूप से अनुमत वसूली प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
  • बैंकों के लिए एसएनएफए में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत अर्जित गैर-बैंकिंग परिसंपत्तियाँ (NBA) भी शामिल होती हैं।
  • सामान्य वित्तीय परिसंपत्तियों के विपरीत, एसएनएफए का नियमन इनके अधिग्रहण, मूल्यांकन, प्रबंधन तथा निपटान से संबंधित एक पृथक सावधानीपूर्ण ढाँचे के अंतर्गत किया जाता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक के विवेकपूर्ण ढाँचे के प्रमुख प्रावधान

  • अधिग्रहण की शर्तें: SNFAs का अधिग्रहण तभी किया जा सकता है, जब उधारकर्ता के ऋण खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित कर दिया गया हो तथा ऋणदाता की बकाया राशि का पूर्ण या आंशिक समापन गैर-प्रत्यावर्तन आधार पर किया गया हो। बकाया राशि के आंशिक समापन को शेष बकाया राशि का पुनर्गठन माना जाएगा।
  • सावधानीपूर्ण मूल्यांकन: अधिग्रहण के समय SNFAs का मूल्यांकन समाप्त की गई बकाया राशि के शुद्ध पुस्तकीय मूल्य अथवा स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा निर्धारित संकटग्रस्त विक्रय मूल्य, दोनों में से जो कम हो, उसके आधार पर किया जाएगा। इसके बाद समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन भी किया जाएगा।
  • समयबद्ध निपटान: विनियमित संस्थाओं को सामान्यतः अधिग्रहण की तिथि से सात वर्ष के भीतर एसएनएफए का निपटान करना होगा। निपटान यथाशीघ्र किया जाना चाहिए तथा प्राथमिकता के आधार पर सरफेसी अधिनियम, 2002 के सिद्धांतों के अनुरूप सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से किया जाना चाहिए।
  • बिक्री पर प्रतिबंध: सामान्यतः NFSA को डिफ़ॉल्ट उधारकर्ता अथवा उससे संबंधित पक्षों को पुनः नहीं बेचा जा सकता। इससे नैतिक जोखिम कम होगा तथा परिसंपत्तियों की राउंड-ट्रिपिंग को रोका जा सकेगा।
  • प्रशासन एवं प्रकटीकरण: विनियमित संस्थाओं को एसएनएफए के अधिग्रहण एवं निपटान के लिए निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित नीतियाँ अपनानी होंगी, अपने वित्तीय विवरणों में इनके लिए पृथक प्रकटीकरण करना होगा तथा निर्धारित प्रतिवेदन संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना होगा। एसएनएफए को सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (सकल एनपीए) अथवा शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (शुद्ध एनपीए) का हिस्सा नहीं माना जाएगा तथा इन्हें अलग से प्रदर्शित किया जाएगा।

महत्त्व

  • विवेकपूर्ण नियमन का मानकीकरण: यह विभिन्न श्रेणियों की विनियमित संस्थाओं के लिए निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, मूल्यांकन, धारण, निपटान तथा प्रकटीकरण हेतु एक समान ढाँचा प्रदान करता है, जिससे नियामकीय असंगतियाँ कम होती हैं।
  • तनावग्रस्त परिसंपत्तियों की शीघ्र वसूली में सहायक: सात वर्ष की निर्धारित निपटान अवधि तथा पारदर्शी निपटान तंत्र को प्राथमिकता देने से बकाया राशि की शीघ्र वसूली होती है तथा अचल परिसंपत्तियों को लंबे समय तक रखने की आवश्यकता कम होती है।
  • प्रशासन एवं पारदर्शिता को सुदृढ़ बनाता है: निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित नीतियाँ, स्वतंत्र मूल्यांकन, पृथक प्रकटीकरण तथा प्रतिवेदन संबंधी आवश्यकताएँ जवाबदेही बढ़ाती हैं तथा नियामकीय निगरानी को बढ़ाती हैं।
  • नैतिक जोखिम को हतोत्साहित करता है: निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों को चूककर्ता उधारकर्ताओं अथवा उनसे संबंधित पक्षों को पुनः बेचने पर प्रतिबंध लगाने से परिसंपत्तियों की राउंड-ट्रिपिंग पर रोक लगती है तथा ऋण अनुशासन बेहतर होता है।
  • विनियमित संस्थाओं को अपने मूल वित्तीय मध्यस्थता कार्य पर केंद्रित रहने में सक्षम बनाता है: गैर-प्रमुख अचल परिसंपत्तियों के समयबद्ध निपटान से बैंक एवं अन्य विनियमित संस्थाएँ दीर्घकाल तक अचल संपत्तियों की स्वामी नहीं बनतीं और अपने मुख्य वित्तीय मध्यस्थता के कार्य पर ध्यान केंद्रित कर पाती हैं।

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