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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा- ऊर्जा; विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान भारत–ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के अंतर्गत प्रशासनिक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया।

भारत–ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु सहयोग के बारे में

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सितंबर 2014 में असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो नवंबर 2015 से प्रभावी हुआ।
  • यह समझौता असैन्य परमाणु सहयोग के लिए रूपरेखा प्रदान करता है तथा ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को व्यावसायिक आधार पर भारत को यूरेनियम निर्यात करने की अनुमति देता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम के दीर्घकालिक निर्यात की सुविधा प्रदान करता है।
    • यूरेनियम का उपयोग केवल शांतिपूर्ण असैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
    • सभी यूरेनियम आपूर्तियाँ अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी के अंतर्गत रहेंगी।
    • सरकारों एवं उद्योगों के बीच दीर्घकालिक और स्थिर सहयोग के लिए एक सुदृढ़ ढाँचा प्रदान करता है।
    • ऑस्ट्रेलिया की नीति के अनुसार, यूरेनियम का निर्यात केवल उन्हीं देशों को किया जाता है जिनके साथ उसका असैन्य परमाणु सहयोग समझौता हो।
  • ऑस्ट्रेलिया क्यों महत्त्वपूर्ण है?
    • ऑस्ट्रेलिया के पास विश्व के कुल यूरेनियम भंडार का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा है, जो विश्व में सर्वाधिक है।
    • यह भारत के विस्तारित हो रहे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यूरेनियम का विश्वसनीय स्रोत उपलब्ध कराता है।
    • इससे भारत के यूरेनियम आयात में विविधता आती है तथा सीमित घरेलू भंडारों पर निर्भरता कम होती है।
    • ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की सदस्यता के लिए भारत के समर्थन की पुनः पुष्टि की।

महत्त्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: यूरेनियम की दीर्घकालिक और सुनिश्चित आपूर्ति सुनिश्चित कर ईंधन सुरक्षा को मजबूत करता है तथा आयात स्रोतों में विविधता लाकर दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करता है।
  • परमाणु ऊर्जा मिशन को समर्थन: वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु परमाणु परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए आवश्यक ईंधन उपलब्ध कराता है।
  • शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025 को बल प्रदान करता है: निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाते हुए परमाणु ऊर्जा के विस्तार के लिए आवश्यक ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: विश्वसनीय आधारभूत विद्युत उपलब्ध कराकर विनिर्माण, उद्योग एवं डेटा सेंटरों को समर्थन देता है तथा 2070 तक नेट ज़ीरो और भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक है।
  • सामरिक महत्त्व: भारत की उत्तरदायी परमाणु शक्ति की छवि को और सुदृढ़ करता है तथा स्वच्छ ऊर्जा एवं ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत–ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदारी को बढ़ाता है।

भारत में परमाणु ऊर्जा की वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान में भारत सात स्थलों पर 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का संचालन कर रहा है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 गीगावाट (GW) है।
  • भारत के परमाणु रिएक्टरों में शामिल हैं:
    • दाबित भारी जल रिएक्टर (Pressurised Heavy Water Reactors–PHWRs)
    • क्वथन जल रिएक्टर (Boiling Water Reactors–BWRs)
    • हल्के जल रिएक्टर (Light Water Reactors–LWRs)
  • अधिकांश PHWR रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में उपयोग करते हैं तथा प्लूटोनियम को उपोत्पाद के रूप में उत्पन्न करते हैं।
  • विस्तार योजनाएँ: वर्तमान में 10 रिएक्टर इकाइयाँ (8,000 मेगावाट) निर्माणाधीन हैं तथा अतिरिक्त 10 रिएक्टरों के लिए पूर्व-परियोजना गतिविधियाँ प्रारंभ की जा चुकी हैं।
  • परमाणु ऊर्जा मिशन: केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है तथा वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को समर्थन देना है।
  • शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025: सतत रूप से परमाणु ऊर्जा के उपयोग एवं उन्नयन द्वारा भारत के रूपांतरण हेतु अधिनियम (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया –SHANTI अधिनियम), 2025 भारत के परमाणु क्षेत्र से संबंधित कानूनी ढाँचे का आधुनिकीकरण करता है।  यह नियामकीय निगरानी के अंतर्गत निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी को अनुमति देता है।
    • साथ ही, यह सहयोग एवं निवेश के नए अवसर भी उपलब्ध कराता है।
  • लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs): केंद्रीय बजट 2025–26 में स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (300 मेगावाट विद्युत तक) के विकास हेतु 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
  • इनके प्रमुख लाभ हैं: कारखाना-आधारित निर्माण, अपेक्षाकृत तेज़ निर्माण, बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण , चरणबद्ध परिनियोजन। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2033 तक कम-से-कम पाँच SMRs को परिचालन में लाना है।
  • प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR): कल्पक्कम में स्थित भारत के 500 मेगावाट विद्युत (MWe) क्षमता वाले PFBR, जिसे भाविनी (BHAVINI) द्वारा विकसित किया गया है, ने 6 अप्रैल 2026 को प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त की।  यह उपलब्धि भारत के त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के द्वितीय चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
    • यह रिएक्टर PHWR से प्रयुक्त ईंधन से प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग कर अधिक ईंधन उत्पन्न करता है तथा भविष्य में थोरियम से यूरेनियम-233 का उत्पादन करेगा, जिससे दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा मजबूत होगी तथा नेट ज़ीरो लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।

भारत का त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

  • इस कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. होमी जे. भाभा ने 1950 के दशक में तैयार की थी।
  • इसका उद्देश्य भारत के सीमित यूरेनियम भंडार का प्रभावी उपयोग करते हुए प्रचुर थोरियम भंडार का दोहन करना, ताकि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके।
  • भारत के पास विश्व के लगभग 2% यूरेनियम भंडार हैं, जबकि लगभग 25% वैश्विक थोरियम भंडार भारत में उपलब्ध हैं। ये मुख्यतः केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा में स्थित हैं।
  • प्रथम चरण: दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWRs): इसमें प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग ईंधन के रूप में तथा भारी जल (D₂O) का उपयोग मंदक एवं शीतलक दोनों के रूप में किया जाता है।
    • यह विद्युत उत्पादन के साथ-साथ यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम-239 का उत्पादन करता है।
    • इस तकनीक को इसलिए अपनाया गया क्योंकि इसमें यूरेनियम संवर्धन) की आवश्यकता नहीं होती।
  • द्वितीय चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBRs): इसमें मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग किया जाता है, जिसे PHWR के प्रयुक्त ईंधन से प्राप्त प्लूटोनियम-239 तथा प्राकृतिक यूरेनियम से तैयार किया जाता है।
    • यह जितना परमाणु ईंधन उपभोग करता है, उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करता है। इसके लिए यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित किया जाता है।
    • साथ ही, थोरियम का उपयोग यूरेनियम-233 के उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
    • कल्पक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) इस चरण में भारत के प्रवेश का प्रतीक है।
  • तृतीय चरण: थोरियम-आधारित रिएक्टर: इस चरण में थोरियम-आधारित ब्रीडर रिएक्टरों की परिकल्पना की गई है, जिनमें प्रारंभिक ईंधन के रूप में यूरेनियम-233 और थोरियम के मिश्रण का उपयोग किया जाएगा।
    • समय के साथ थोरियम को यूरेनियम-233 में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे भारत के प्रचुर थोरियम भंडार का बड़े पैमाने पर उपयोग संभव होगा तथा दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी।
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