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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारत में अवसंरचना और अन्य राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों के लिए निवेश प्रतिबद्धता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) के नए और आगामी कोषों के लिए ₹30,000 करोड़ की अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता को मंजूरी दी है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) में ₹30,000 करोड़ की अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता को मंजूरी दी है, जिससे भारत सरकार की कुल प्रतिबद्धता ₹60,000 करोड़ हो गई है।
  • इस प्रतिबद्धता का एक बड़ा हिस्सा ‘NIIF इंफ्रास्ट्रक्चर फंड II’ की स्थापना में सहयोग करेगा, जिसे NIIF के प्रमुख अवसंरचना-केंद्रित कोष के उत्तरवर्ती के रूप में परिकल्पित किया गया है।
  • ‘NIIF इंफ्रास्ट्रक्चर फंड II’ का लक्ष्य लगभग ₹30,000 करोड़ का कॉर्पस (पूंजी कोष) रखने का है और इससे परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी अवसंरचना और ई-मोबिलिटी सहित अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश किए जाने की अपेक्षा है।
  • यह आवंटन नई फंड रणनीतियों, उत्तरवर्ती द्विपक्षीय कोषों और अन्य रणनीतिक निवेश मंचों का भी समर्थन करेगा, साथ ही ‘विकसित भारत @ 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में अधिक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेश को उत्प्रेरित करेगा।

नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) के बारे में

  • संप्रभु-आधारित निवेश मंच (Sovereign-Anchored Investment Platform)
    • वर्ष 2015 में स्थापित, NIIF भारत का संप्रभु-आधारित फंड है, जिसका पेशेवर प्रबंधन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (NIIFL) द्वारा किया जाता है।
    • भारत सरकार इसमें एंकर निवेशक है और उसकी NIIF में 49% हिस्सेदारी है।
  • पैमाना और प्रदर्शन
    • NIIF वर्तमान में अपने फंड और निवेश रणनीतियों के माध्यम से लगभग ₹40,000 करोड़ की पूंजी प्रतिबद्धताओं का प्रबंधन करता है।
    • इसने पूंजी के उपयोग और वसूली का एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड प्रदर्शित किया है, और प्रमुख पोर्टफोलियो से बाहर निकलकर निवेशकों को लगभग ₹12,000 करोड़ वापस किए हैं।
  • वैश्विक निवेशक आधार
    • NIIF ने प्रमुख वैश्विक और घरेलू संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाई है, जिनमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), टेमासेक, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स, ऑस्ट्रेलियनसुपर, ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान, AIIB, ADB, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), SBI, HDFC ग्रुप और ICICI बैंक शामिल हैं।
    • ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के निवेशकों की भागीदारी भारत की विकास संभावनाओं और NIIF के शासन ढांचे में मजबूत अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाती है।
  • निवेश और सलाहकारी भूमिका
    • NIIF चार प्रमुख निवेश रणनीतियों के माध्यम से कार्य करता है: अवसंरचना, निजी बाजार, ग्रोथ इक्विटी, और जलवायु एवं भारत-जापान व्यापार गलियारा निवेश।
    • निवेश करने के अलावा, NIIF सरकारों और सार्वजनिक संस्थानों को पीपीपी (PPP) परियोजनाओं, परिसंपत्ति मुद्रीकरण ढांचे और निवेश पहलों पर रणनीतिक सलाहकार सहायता भी प्रदान करता है, जिसमें मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड और रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड शामिल हैं।

नई निवेश प्रतिबद्धता के मुख्य बिंदु

  • सरकारी प्रतिबद्धता को दोगुना करना: नवीनतम अनुमोदन से नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) के लिए भारत सरकार की कुल प्रतिबद्धता ₹30,000 करोड़ से बढ़कर ₹60,000 करोड़ हो गई है, जो अवसंरचना वित्तपोषण के लिए सरकार के दीर्घकालिक समर्थन को और मजबूत करता है।
  • NIIF इंफ्रास्ट्रक्चर फंड II: नई प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘NIIF इंफ्रास्ट्रक्चर फंड II’ के लिए होगा, जो मौजूदा प्रमुख अवसंरचना कोष का उत्तरवर्ती होगा।
  • भविष्य के लिए तैयार क्षेत्रों पर ध्यान देना: नए कोष से परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी अवसंरचना और ई-मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किए जाने की अपेक्षा है।
  • निजी पूंजी को उत्प्रेरित करना: सरकार का एंकर निवेश संप्रभु वेल्थ फंडों, पेंशन फंडों, बहुपक्षीय संस्थानों और अन्य दीर्घकालिक निवेशकों से बड़े पैमाने पर पूंजी आकर्षित करने के लिए उत्प्रेरक का कार्य करेगा।

महत्व

  • अवसंरचना विकास में तेजी: बढ़ा हुआ पूंजी आधार महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण में सहयोग करेगा और भारत की अवसंरचना-आधारित विकास रणनीति को सुदृढ़ करेगा।
  • घरेलू और वैश्विक निवेश को आकर्षित करना: NIIF की संप्रभु-समर्थित संरचना दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी को आकर्षित करने में सहायक है, जिससे बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण संबंधी बाधाएं कम होती हैं।
  • भारत के विकास वित्त ढांचे को मजबूत करना: विस्तारित NIIF मंच ‘पेशेंट कैपिटल’ (दीर्घकालिक निवेश) का एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करता है, जो बजटीय संसाधनों और पारंपरिक बैंक वित्तपोषण का पूरक है।
  • विकसित भारत @ 2047 का समर्थन: अवसंरचना, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल कनेक्टिविटी और शहरी विकास में अधिक निवेश 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के भारत के लक्ष्य में योगदान देगा।
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