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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है, जो निरंतर व्यावसायिक विकास, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, रिकॉर्ड लाभप्रदता और सुदृढ़ पूंजीगत स्थिति को दर्शाता है।

वित्तीय प्रदर्शन के मुख्य बिंदु

  •  सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.98 लाख करोड़ का अब तक का सर्वाधिक कुल शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जिसमें 11.1% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए निरंतर लाभप्रदता का लगातार चौथा वर्ष है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल व्यवसाय बढ़कर ₹283.3 लाख करोड़ हो गया है, जिसने पिछले वर्ष की तुलना में 12.8% की वृद्धि दर्ज की है।
  • कुल जमा राशि 10.6% बढ़कर ₹156.3 लाख करोड़ हो गई है, जबकि सकल अग्रिम 15.7% की वृद्धि के साथ ₹127 लाख करोड़ हो गए हैं।
  • ऋण वृद्धि प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक आधारित रही:
    • खुदरा अग्रिम में 18.1% की वृद्धि हुई।
    • कृषि अग्रिम में 15.5% की वृद्धि दर्ज की गई।
    • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) अग्रिम में 18.2% का विस्तार हुआ।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है:
  • सकल एनपीए अनुपात घटकर 1.93% रह गया।
  • शुद्ध एनपीए अनुपात घटकर 0.39% पर आ गया, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के लिए अब तक का न्यूनतम स्तर है।
  • गिरावट (स्लिपेज) अनुपात घटकर 0.7% रह गया।
  • कुल जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात (CRAR) में सुधार हुआ है और यह  16.6% हो गया है, जो 11.5% की नियामक आवश्यकताओं से काफी अधिक है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगभग ₹86,971 करोड़ की वसूली दर्ज की, जिसमें बट्टा खाते (से की गई वसूली भी सम्मिलित है।

PSBsके प्रदर्शन के पीछे कारक

  • सरकार के नेतृत्व में बैंकिंग सुधार:
  • 4R रणनीति — रिकग्निशन (पहचान), रेजोल्यूशन (समाधान), रिकैपिटलाइजेशन (पुनर्पूंजीकरण) और रिफॉर्म्स (सुधार) — ने पुरानी तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान और बैंकिंग अनुशासन में सुधार करने में सहायता की।
  • सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में नियुक्तियों, शासन, पूंजीकरण, जवाबदेही और स्वायत्तता में सुधार के लिए वर्ष 2015 में मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम शुरू किया था।
  • RBI के विनियामक और पर्यवेक्षी उपाय:
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 2015 में शुरू की गई परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (AQR) ने तनावग्रस्त परिसंपत्तियों की पारदर्शी पहचान सुनिश्चित की और ऋणों की एवरग्रीनिंग को रोका।
  • बेसल III मानदंडों के कार्यान्वयन ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के भीतर पूंजी पर्याप्तता, जोखिम प्रबंधन और विवेकपूर्ण विनियमन  को सुदृढ़ किया।
  • त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA) ढांचे ने कमजोर बैंकों पर परिचालन संबंधी अनुशासन लागू किया और वित्तीय विवेक में सुधार किया।
  • वसूली और समाधान तंत्र को सुदृढ़ करना
  • दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के अधिनियमन ने वसूली तंत्र (recovery mechanisms) और ऋणदाताओं के बीच ऋण अनुशासन में महत्वपूर्ण सुधार किया।
  • नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) की स्थापना ने अधिक तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान को सुगम बनाया।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्व

  • वित्तीय स्थिरता में वृद्धि: मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) प्रणालीगत स्थिरता में सुधार करते हैं और बार-बार होने वाले बैंक पुनर्पूंजीकरण से जुड़े राजकोषीय बोझ को कम करते हैं।
  • आर्थिक विकास में सहायता: बेहतर बैलेंस शीट सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, एमएसएमई (MSMEs), कृषि और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर ऋण प्रवाह का विस्तार करने में सक्षम बनाती है।
  • वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करना: जन-धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), ग्रामीण बैंकिंग विस्तार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के कार्यान्वयन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है।
  • निवेशक और जमाकर्ता के विश्वास को सुदृढ़ करना: निरंतर लाभप्रदता, कम एनपीए (NPAs) और सुदृढ़ पूंजी पर्याप्तता भारत के बैंकिंग और वित्तीय इकोसिस्टम में विश्वास को बढ़ाती है।

Source:
Pib
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