पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन – 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण तथा नई प्रौद्योगिकी का विकास।
संदर्भ: हाल ही में, भारत ने भारत ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) क्षमता से युक्त उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान-परीक्षण किया है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:
• उन्नत अग्नि मिसाइल का परीक्षण अनेक पेलोड के साथ किया गया, जो हिंद महासागर क्षेत्र में विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में स्थित विभिन्न लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हैं।
• मिसाइल की प्रक्षेपवक्र तथा पेलोड के प्रभावों की निगरानी विभिन्न भू-आधारित तथा पोत-आधारित स्टेशनों द्वारा संचालित टेलीमेट्री एवं ट्रैकिंग प्रणालियों के माध्यम से की गई।
• उड़ान आँकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के दौरान सभी मिशन उद्देश्यों की सफलतापूर्वक प्राप्ति हुई, जिससे मिसाइल प्रणाली की परिचालन विश्वसनीयता एवं सटीकता प्रदर्शित हुई।
• इस मिसाइल प्रणाली का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया तथा परीक्षण का अवलोकन DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं भारतीय सेना के कर्मियों द्वारा किया गया।
मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV):
• MIRV प्रौद्योगिकी एकल बैलिस्टिक मिसाइल को विभिन्न लक्ष्यों पर स्वतंत्र रूप से अनेक वारहेड ले जाने और प्रक्षेपित करने की क्षमता प्रदान करती है।
• पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, जो केवल एक वारहेड ले जाती हैं, MIRV-सुसज्जित मिसाइलें एक ही मिसाइल प्रणाली से अनेक वारहेड प्रक्षेपित कर सकती हैं।

• उड़ान के अंतिम चरण में वारहेड अलग-अलग गति एवं प्रक्षेपपथ पर छोड़े जाते हैं, जिससे वे भौगोलिक रूप से भिन्न लक्ष्यों को भेद सकते हैं।
• MIRV की कार्यप्रणाली:
- मिसाइल की संचालित उड़ान पूर्ण होने के बाद, मिसाइल बस क्रमिक रूप से अनेक पुनःप्रवेश वाहनों (RVs) को छोड़ती है।
- ये पुनःप्रवेश वाहन स्वतंत्र रूप से वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते हैं तथा अलग-अलग निर्धारित लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं।
• MIRV प्रणाली के प्रमुख घटक:
- मिसाइल बस: प्रक्षेपण तथा मध्य-पथ उड़ान के दौरान वारहेड एवं मार्गदर्शन प्रणालियों को वहन करती है।
- पुनःप्रवेश वाहन (RVs): व्यक्तिगत वारहेड, जो वायुमंडलीय पुनःप्रवेश को सहन करते हुए विभिन्न लक्ष्यों को भेदने के लिए निर्मित होते हैं।
• MIRV प्रौद्योगिकी का वैश्विक विकास:
- संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1970 में पहली बार MIRV-सुसज्जित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) को तैनात किया, जिसके पश्चात 1970 के दशक में सोवियत संघ ने भी इस क्षमता का विकास किया।
- संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, यूनाइटेड किंगडम तथा फ्रांस जैसे देशों के पास MIRV क्षमता उपलब्ध है।
- भारत ने मार्च 2024 में MIRV-सुसज्जित अग्नि-5 मिसाइल का पहला सफल उड़ान-परीक्षण किया था तथा उन्नत अग्नि मिसाइल के सफल परीक्षण के माध्यम से इस क्षमता को और विकसित किया है।
MIRV प्रौद्योगिकी का महत्त्व:
• MIRV प्रौद्योगिकी एकल प्रक्षेपण के माध्यम से अनेक लक्ष्यों को भेदने की क्षमता प्रदान करके मिसाइल प्रणाली की सामरिक एवं विनाशकारी क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है।
• मल्टीपल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) प्रणालियों की तुलना में MIRV प्रणाली स्वतंत्र लक्ष्य निर्धारण क्षमता का अतिरिक्त लाभ प्रदान करती है।
• MIRV प्रणालियों का विकास तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल है, क्योंकि इसके लिए बड़े आकार की मिसाइलें, सूक्ष्मीकृत वारहेड, सटीक मार्गदर्शन प्रणालियाँ तथा उन्नत क्रमिक वारहेड-प्रक्षेपण तंत्र की आवश्यकता होती है।
• MIRV-सुसज्जित मिसाइलों को बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणालियों के विरुद्ध प्रभावी प्रतिरोधक उपाय माना जाता है, क्योंकि अनेक वारहेडों को एक साथ अवरोधित करना अधिक कठिन होता है।
