वादीनार जहाज मरम्मत सुविधा
संदर्भ: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने भारत की जहाज मरम्मत क्षमता और समुद्री अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए वादीनार में एक अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा के विकास को मंजूरी दी है।
वादीनार जहाज मरम्मत सुविधा के बारे में:
- यह परियोजना दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित की जाएगी, जिसमें ₹1,570 करोड़ का कुल निवेश किया जाएगा।
- इसे एक ब्राउनफील्ड सुविधा के रूप में नियोजित किया गया है, जिसमें 650 मीटर लंबी जेटी, दो बड़े तैरते हुए शुष्क डॉक, कार्यशालाएं और संबद्ध समुद्री बुनियादी ढांचा शामिल होगा।
- वादीनार का प्राकृतिक गहरा ड्राफ्ट, प्रमुख समुद्री मार्गों से इसकी कनेक्टिविटी, तथा मुंद्रा पोर्ट और दीनदयाल पोर्ट जैसे प्रमुख बंदरगाहों से इसकी निकटता इसे जहाज मरम्मत कार्यों के लिए एक रणनीतिक स्थान बनाती है।
- यह सुविधा 300 मीटर तक के बड़े जहाजों की मरम्मत करने में सक्षम होगी, जो 230 मीटर से अधिक लंबाई वाले जहाजों की सर्विसिंग के लिए भारत के मौजूदा बुनियादी ढांचे के अंतराल को दूर करेगी।
- इस परियोजना से विदेशी शिपयार्डों पर निर्भरता कम होने, विदेशी मुद्रा के बहिर्प्रवाह को रोकने और पश्चिमी तट पर जहाजों की मरम्मत के लिए टर्नअराउंड समय में सुधार होने की आशा है।
- यह लगभग 290 प्रत्यक्ष और 1,100 अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न करेगा, साथ ही क्षेत्र में समुद्री सहायक उद्योगों, रसद सेवाओं, MSMEs और कौशल विकास को बढ़ावा देगा।
- यह पहल मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत भारत के दीर्घकालिक समुद्री लक्ष्यों का समर्थन करती है।
भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रस्तावों के लिए ‘अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया’
संदर्भ: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्तावों के प्रसंस्करण के लिए एक अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, ताकि अनुमोदन प्रक्रिया को अधिक तीव्र, पारदर्शी, पेपरलैस और समयबद्ध बनाया जा सके।
अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के बारे में
- नोडल एजेंसी: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्तावों के प्रसंस्करण के लिए नोडल निकाय है।
- पूर्णतः डिजिटल प्रक्रिया: सभी FDI आवेदनों को विदेशी निवेश सुविधा (FIF) पोर्टल या राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS) के माध्यम से ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य है।
- किसी भी भौतिक दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं है।
- समयबद्ध अनुमोदन तंत्र: प्रोसेसिंग की अधिकतम समय-सीमा 12 सप्ताह निर्धारित की गई है (2017 की SOP के तहत यह 10 सप्ताह थी)।
- आवेदकों द्वारा अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने में लगने वाले समय को इस अवधि से बाहर रखा गया है।
- प्रोसेसिंग समय-सीमा: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) प्रस्तावों को 2 दिनों के भीतर संबंधित मंत्रालय को सौंप देगा।
- संबंधित मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), गृह मंत्रालय (MHA) और विदेश मंत्रालय (MEA) निर्धारित समय-सीमा के भीतर जांच करेंगे और अपनी टिप्पणी प्रदान करेंगे।
- यदि समय पर टिप्पणियाँ प्राप्त नहीं होती हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि “कोई टिप्पणी नहीं” है।
- गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा सुरक्षा मंजूरी: निम्नलिखित संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश के लिए अनिवार्य है:
- रक्षा
- दूरसंचार
- प्रसारण
- नागर विमानन
- अंतरिक्ष क्षेत्र
- निजी सुरक्षा एजेंसियां
- टाइटेनियम युक्त खनिज और अयस्क
- सीमा साझा करने वाले देशों के लिए नियम: भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश के लिए सुरक्षा मंजूरी आवश्यक है।
- ये देश हैं: चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान।
- रणनीतिक क्षेत्रों के लिए फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस: प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश को 60 दिनों के भीतर मंजूरी दी जाएगी।
- इन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक घटक, पूंजीगत वस्तु निर्माण, उन्नत बैटरी घटक, पॉलीसिलिकॉन वेफर्स और दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण शामिल हैं।
- बड़े निवेश प्रस्ताव: ₹5,000 करोड़ से अधिक के विदेशी इक्विटी अंतर्वाह वाले FDI प्रस्तावों के लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) के अनुमोदन की आवश्यकता होती है।
UNEP ने वैश्विक मीथेन निगरानी प्रणाली का विस्तार किया
संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने कोयला खदानों और अपशिष्ट केंद्रों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन की निगरानी (ट्रैकिंग) के लिए अपने ‘मीथेन अलर्ट एंड रिस्पांस सिस्टम’ (MARS) का विस्तार किया है।
‘मीथेन अलर्ट एंड रिस्पांस सिस्टम‘ (MARS) के बारे में

- MARS एक उपग्रह-आधारित मीथेन निगरानी प्रणाली है, जिसे 2023 में UNEP की ‘इंटरनेशनल मीथेन एमिशन ऑब्जर्वेटरी’ (IMEO) द्वारा लॉन्च किया गया था।
- यह विश्व भर में मीथेन उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों (“सुपर-एमिटर्स”) का पता लगाने के लिए 35 से अधिक उपग्रहों के डेटा का उपयोग करता है।
- यह प्रणाली सरकारों और उद्योगों को अलर्ट (चेतावनी) भेजती है ताकि मीथेन रिसाव को तेजी से नियंत्रित किया जा सके।
- MARS इस बात को भी ट्रैक करता है कि शमन उपायों के कार्यान्वयन के बाद उत्सर्जन में कमी आई है या नहीं।
- इससे पहले, MARS मुख्य रूप से ‘ऑयल एंड गैस मीथेन पार्टनरशिप 2.0’ (OGMP 2.0) के तहत तेल और गैस केंद्रों पर केंद्रित था।
- अब इस प्रणाली का विस्तार कर इसमें कोयला खदानों और लैंडफिल (कचरा भराव क्षेत्र) सहित अपशिष्ट केंद्रों को भी शामिल किया गया है।
- अपनी शुरुआत के बाद से, MARS ने 11 देशों में मीथेन के 41 ‘सुपर-एमिटर’ स्रोतों का पता लगाने और उनके शमन में मदद की है, जिनसे अनुमानित 1.2 मिलियन टन मीथेन का उत्सर्जन हो रहा था।
थोरियम–आधारित संयंत्रों के लिए ANEEL ईंधन
संदर्भ: अमेरिका स्थित परमाणु ईंधन कंपनी क्लीन कोर थोरियम एनर्जी (CCTE) ने इडाहो नेशनल लेबोरेटरी के ‘एडवांस्ड टेस्ट रिएक्टर’ में अपने पेटेंटेड थोरियम-आधारित ANEEL ईंधन का उच्च-बर्नअप विकिरण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- इस ईंधन ने 60 GWd/MTU से अधिक का बर्नअप स्तर प्राप्त किया है, जो उन्नत परमाणु ईंधन विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
- बर्नअप का तात्पर्य परमाणु ईंधन से निकाली गई ऊर्जा की मात्रा से है; उच्च बर्नअप बेहतर ईंधन उपयोग और कम ‘स्पेंट फ्यूल’ (व्ययित ईंधन) उत्पादन का संकेत देता है।
- रिपोर्ट किया गया बर्नअप स्तर पारंपरिक PHWR (प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर) और CANDU रिएक्टर ईंधनों के सामान्य डिस्चार्ज बर्नअप से आठ गुना अधिक है।
- यह विकास विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए प्रासंगिक है, जिनके पास विशाल थोरियम भंडार हैं और जो थोरियम-आधारित परमाणु ऊर्जा मार्गों की खोज कर रहे हैं।
ANEEL थोरियम ईंधन के बारे में
- ANEEL (Advanced Nuclear Energy for Enriched Life) एक पेटेंटेड थोरियम-आधारित परमाणु ईंधन है, जिसे ‘क्लीन कोर थोरियम एनर्जी’ (CCTE) द्वारा प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर्स (PHWRs) और CANDU प्रकार के रिएक्टरों में उपयोग के लिए विकसित किया गया है।
- इस ईंधन का नाम भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष और भारत के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों में से एक, अनिल काकोडकर के सम्मान में रखा गया है। यह भारत के थोरियम-आधारित परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में उनके योगदान को मान्यता देता है।
- ANEEL ईंधन थोरियम को हाई-असे लो-एनरिच्ड यूरेनियम (HALEU) के साथ जोड़ता है, जिसका उद्देश्य ईंधन दक्षता, रिएक्टर प्रदर्शन और दीर्घकालिक स्थिरता में सुधार करना है।
महत्व
- थोरियम-आधारित परमाणु प्रौद्योगिकी में प्रगति: सफल परीक्षण थोरियम-आधारित ईंधन चक्रों की संभावनाओं को सुदृढ़ करता है, जिन्हें पारंपरिक यूरेनियम ईंधन प्रणालियों की तुलना में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प माना जाता है।
- ईंधन दक्षता में सुधार और अपशिष्ट में कमी: उच्च बर्नअप स्तर ईंधन की दक्षता में महत्वपूर्ण सुधार कर सकते हैं, स्पेंट परमाणु ईंधन की मात्रा को कम कर सकते हैं और समग्र रिएक्टर अर्थशास्त्र को बेहतर बना सकते हैं।
- भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए प्रासंगिकता: भारत के पास विश्व के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है और वह लंबे समय से त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम पर कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए थोरियम-आधारित रिएक्टरों का उपयोग करना है।
NSE ने स्वर्ण बाजार को औपचारिक रूप देने के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स‘ (EGRs) लॉन्च की
संदर्भ: भारतीय राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भारत के स्वर्ण बाजार को आधुनिक और औपचारिक बनाने के लिए एक नए ट्रेडिंग सेगमेंट के रूप में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) लॉन्च किया है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- इस लॉन्च के हिस्से के रूप में, NSE ने 1,000 ग्राम की सोने की छड़ को सफलतापूर्वक EGR में वि-भौतिकीकरण करके प्रदर्शित किया, जो भौतिक सोने के एक व्यापार योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में परिवर्तन को दर्शाता है।
- इस पहल का उद्देश्य एक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित ढांचे के माध्यम से भारत के पारंपरिक अनौपचारिक स्वर्ण इकोसिस्टम को विनियमित वित्तीय बाजारों के साथ एकीकृत करना है।
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) के बारे में:
- EGRs वि-भौतिकीकृत प्रतिभूतियाँ हैं जो भौतिक सोने के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस सोने को SEBI-मान्यता प्राप्त वॉल्ट में संग्रहित किया जाता है और डिपॉजिटरी के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा जाता है।
- प्रत्येक EGR पूरी तरह से भौतिक सोने द्वारा समर्थित होता है और इसे एक्सचेंज पर ट्रेड (व्यापार) किया जा सकता है, जिससे सोना औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बन जाता है।
- निवेशक एक निर्धारित मोचन तंत्र के माध्यम से EGRs को पुनः भौतिक सोने में परिवर्तित कर सकते हैं, जो डिजिटल और भौतिक स्वामित्व के बीच संबंध सुनिश्चित करता है।
महत्व:
- औपचारिकीकरण और पारदर्शिता: EGRs से भारत के स्वर्ण बाजार में अधिक पारदर्शिता, ट्रेसेबिलिटी और मानकीकरण आने की अपेक्षा है, जो ऐतिहासिक रूप से खंडित और बड़े पैमाने पर अनौपचारिक रहा है।
- कुशल मूल्य निर्धारण और तरलता: EGRs के एक्सचेंज-आधारित व्यापार से मूल्य निर्धारण में सुधार हो सकता है, तरलता बढ़ सकती है और भौतिक स्वर्ण लेनदेन से जुड़ी अक्षमताओं में कमी आ सकती है।
- निवेशक सुविधा और सुरक्षा: EGRs सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक स्वामित्व को सक्षम करते हुए भौतिक सोने के भंडारण, शुद्धता सत्यापन, चोरी और रखरखाव से संबंधित चिंताओं को समाप्त करते हैं।
- वित्तीय बाजारों के साथ एकीकरण: यह पहल सोने को खुदरा और संस्थागत निवेशकों के लिए एक अधिक सुलभ और विनियमित वित्तीय परिसंपत्ति में बदलकर भारत के वित्तीय बाजारों को और अधिक सुदृढ़ कर सकती है।
दो भारतीय पत्रकारों ने प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता
संदर्भ: दो भारतीय पत्रकारों, आनंद आर.के. और सुपर्णा शर्मा, ने डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी पर प्रकाश डालने वाले अपने कार्य के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार 2026 जीता है।
पुरस्कार के विजेताओं के कार्य के बारे में:
- उन्होंने ‘सचित्र रिपोर्टिंग और कमेंट्री’ (Illustrated Reporting and Commentary) श्रेणी में यह पुरस्कार जीता, और ‘ब्लूमबर्ग’ की “trAPPed” नामक परियोजना के लिए पत्रकार नताली ओबिको पियर्सन के साथ इसे साझा किया।
- “trAPPed” ब्लूमबर्ग द्वारा प्रकाशित एक सचित्र खोजी परियोजना (illustrated investigative project) है, जो “डिजिटल अरेस्ट” घोटालों की घटना का अन्वेषण करती है, जिसमें पीड़ितों को डिजिटल माध्यमों से मनोवैज्ञानिक रूप से नियंत्रित और प्रताड़ित किया जाता है।
- यह परियोजना एक भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट के मामले का विवरण देती है, जिसे कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने उसके फोन के माध्यम से लंबे समय तक डिजिटल दबाव बनाकर अपने जाल में फंसाया था।
- यह कार्य साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क और डिजिटल निगरानी प्रणालियों की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए खोजी रिपोर्टिंग को प्रभावशाली चित्रणों और दृश्यात्मक विवरणों के साथ जोड़ता है।
- पुलित्जर बोर्ड ने इस परियोजना को उभरते डिजिटल खतरों और ऑनलाइन घोटालों से उत्पन्न खतरों के एक प्रभावी वृत्तांत के रूप में वर्णित किया है।
पुलित्जर पुरस्कार के बारे में:
- पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता, साहित्य, संगीत और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में विश्व के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है।
- इसकी स्थापना 1917 में जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के माध्यम से की गई थी और इसका प्रशासन संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा किया जाता है।
- यह पुरस्कार खोजी रिपोर्टिंग, अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग, कमेंट्री (टीका), फोटोग्राफी, फिक्शन (काल्पनिक साहित्य) और इतिहास जैसी श्रेणियों में उत्कृष्टता को मान्यता प्रदान करते हैं।
