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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास।
संदर्भ: भारत ने अपनी मौसम निगरानी और पूर्वानुमान क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए पिछले एक दशक में अपने डॉप्लर वेदर रडार (DWR) नेटवर्क का व्यापक विस्तार किया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- भारत का डॉप्लर वेदर रडार (DWR) नेटवर्क 2014 के 14 रडारों से बढ़कर 2026 में लगभग 50 हो गया है, जो 250% से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
- वर्तमान नेटवर्क भारत के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 85–87% हिस्से को कवर करता है, जिससे वास्तविक समय की मौसम निगरानी में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
- सरकार की ‘मिशन मौसम’ पहल के तहत, कवरेज को और बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त रडार लगाने की योजना है, विशेष रूप से तटीय, पर्वतीय और आपदा-संभावित क्षेत्रों में।
- भविष्य की योजनाओं का लक्ष्य इस नेटवर्क को 100 से अधिक रडारों तक विस्तारित करना है, जिससे लगभग संपूर्ण राष्ट्रीय कवरेज और पूर्वानुमान की सटीकता सुनिश्चित हो सके।
- इस विस्तार के साथ-साथ डुअल-पोलराइजेशन रडार (dual-polarization radar) तकनीक में भी प्रगति हुई है, जो विभिन्न प्रकार के वर्षण (जैसे बारिश, ओले, बर्फ) के बीच अंतर करने की क्षमता को बढ़ाती है।
डॉप्लर वेदर रडार (DWR) के बारे में

- डॉप्लर वेदर रडार (DWR) एक सुदूर संवेदन प्रणाली है, जो वर्षा की बूंदों, हिमपात और ओलों जैसे वायुमंडलीय कणों के वेग और गति को मापने के लिए डॉप्लर प्रभाव का उपयोग करती है।
- यह सूक्ष्म तरंगों को उत्सर्जित करके और गतिमान वस्तुओं से परावर्तित होकर वापस आने वाले संकेतों के आवृत्ति विस्थापन का विश्लेषण करके कार्य करता है।
- आधुनिक डॉप्लर वेदर रडार वर्षण, पवन के प्रतिरुप और तूफान की तीव्रता पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले वास्तविक समय के आंकड़े प्रदान करते हैं, जिससे अल्पकालिक पूर्वानुमान या ‘नाउकास्टिंग’ संभव हो पाती है।
- ये रडार चक्रवातों, गरज के साथ आने वाले तूफानों और गंभीर मौसम प्रणालियों की उच्च सटीकता के साथ निगरानी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- DWR के प्रकार:
- S-बैंड रडार: S-बैंड रडार लंबी तरंगदैर्ध्य पर कार्य करते हैं और लंबी दूरी की पहचान के लिए विशेष रूप से प्रभावी होते हैं। यह इन्हें चक्रवात जैसी बड़े पैमाने की प्रणालियों की निगरानी के लिए आदर्श बनाता है।
- C-बैंड रडार: C-बैंड रडार सीमा और रिज़ॉल्यूशन के बीच संतुलन प्रदान करते हैं। इनका व्यापक रूप से सामान्य मौसम निगरानी के लिए उपयोग किया जाता है, विशेषकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
- X-बैंड रडार: X-बैंड रडार छोटी तरंगदैर्ध्य पर कार्य करते हैं और कम दूरी पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले आंकड़े प्रदान करते हैं। यह स्थानीय स्तर की मौसम निगरानी और शहरी बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए अत्यंत उपयुक्त होते हैं।
DWR की कार्यप्रणाली
- रडार वायुमंडल में विद्युतचुंबकीय तरंगों के स्पंदन प्रसारित करता है, जो वर्षा की बूंदों जैसे वर्षण कणों से टकराकर वापस परावर्तित होते हैं।
- संकेत के वापस आने में लगने वाला समय मौसम प्रणाली की दूरी निर्धारित करने में मदद करता है, जबकि आवृत्ति विस्थापन (डॉप्लर शिफ्ट) गति की गति और दिशा को दर्शाता है।
- उन्नत डॉप्लर वेदर रडार (DWR) दोहरी-ध्रुवीकरण तकनीक का उपयोग करते हैं, जो वर्षण के प्रकार और आकार की पहचान करने के लिए क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों दिशाओं में संकेत भेजते हैं।
- एकत्रित आंकड़ों को संसाधित किया जाता है और सटीक पूर्वानुमान तथा प्रारंभिक चेतावनी उत्पन्न करने के लिए उन्हें मौसम संबंधी मॉडलों के साथ एकीकृत किया जाता है।
DWR के अनुप्रयोग
- मौसम पूर्वानुमान और ‘नाउकास्टिंग‘: डॉप्लर वेदर रडार (DWR) वर्षा, गरज के साथ आने वाले तूफानों और गंभीर मौसम की घटनाओं की सटीक अल्पकालिक भविष्यवाणी करने में सक्षम बनाते हैं, जिससे पूर्वानुमान की विश्वसनीयता में सुधार होता है।
- अपदा प्रबंधन: ये चक्रवात, बाढ़ और आकाशीय बिजली के लिए प्रारंभिक चेतावनी जारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जान-माल की हानि को कम करने में सहायता मिलती है।
- कृषि और जल प्रबंधन: किसानों को फसल नियोजन, सिंचाई और कीट प्रबंधन के लिए समय पर मौसम की जानकारी प्राप्त होती है, जबकि जल अधिकारी इसका उपयोग जलाशयों के प्रबंधन के लिए करते हैं।
- विमानन और समुद्री सुरक्षा: DWR के आंकड़े सुरक्षित उड़ान संचालन और नौवहन में सहायक होते हैं, विशेष रूप से प्रतिकूल मौसम की स्थिति के दौरान।
- शहरी नियोजन और जलवायु लचीलापन: उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले आंकड़े शहरी बाढ़ प्रबंधन, बुनियादी ढांचा नियोजन और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों में सहायता प्रदान करते हैं।

SOURCES
PIB
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indian express
