जगदगुरु बसवेश्वर
संदर्भ: बसव जयंती के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके कालजयी उपदेशों एवं विरासत को सम्मानित किया।
अन्य संबंधित जानकारी
- अपने संदेश में, प्रधानमंत्री ने एक न्यायपूर्ण और न्यायसंगत समाज के प्रति बसवेश्वर के दृष्टिकोण और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में उनके प्रयासों पर प्रकाश डाला।
- यह श्रद्धांजलि समकालीन भारत विशेष रूप से सामाजिक सद्भाव, समानता और नैतिक जीवन को बढ़ावा देने में बसवेश्वर की प्रासंगिकता की निरंतर स्वीकृति को दर्शाती है।
जगद्गुरु बसवेश्वर के बारे में
- प्रारंभिक जीवन
- जगद्गुरु बसवेश्वर (1131-1196) का जन्म बागेवाड़ी (वर्तमान कर्नाटक) के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और बाद में वे राजा बिज्जल के शासनकाल के दौरान एक प्रमुख विचारक के रूप में उभरे।
- उन्होंने शैव परंपरा में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और कुडलसंगम में आध्यात्मिक शिक्षा से अत्यधिक प्रभावित हुए।
- उपदेश और दर्शन
- बसवेश्वर भक्ति आंदोलन के एक प्रमुख व्यक्ति थे, जिन्होंने कर्मकांड और पुरोहित मध्यस्थता के स्थान पर व्यक्तिगत भक्ति पर बल दिया।
- उन्होंने सामाजिक समानता, तर्कसंगत विचार और नैतिक आचरण के मूल्यों का प्रचार किया तथा जातिगत पदानुक्रम, कर्मकांड और अंधविश्वास का विरोध किया।
- उनका दर्शन “कायक” (श्रम की गरिमा) और “दासोह” (धन का निस्वार्थ साझाकरण) जैसे सिद्धांतों पर आधारित था, जो कार्य को ही पूजा और सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में रेखांकित करता है।
- उन्होंने अपने विचारों को ‘वचनों’ (कन्नड़ में काव्य अभिव्यक्ति) के माध्यम से संप्रेषित किया, जिससे आध्यात्मिक ज्ञान आम जनता के लिए सुलभ हो गया।
- प्रमुख योगदान और विरासत
- उन्हें लिंगायत आंदोलन का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने, मध्यस्थों के बिना भगवान शिव की प्रत्यक्ष भक्ति को बढ़ावा दिया।
- बसवेश्वर ने ‘अनुभव मंतप’ की स्थापना की, जिसे शुरुआती लोकतांत्रिक मंचों में से एक माना जाता है, जहाँ महिलाओं सहित समाज के सभी वर्गों के लोगों ने खुली चर्चा में भाग लिया।
- उनके प्रयासों से एक सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन का सूत्रपात हुआ जिसका उद्देश्य एक जातिविहीन, समतावादी समाज का निर्माण करना था। आज भी आधुनिक भारत में इसका प्रभाव निरंतर जारी है।
भारत का समुद्री खाद्य निर्यात अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर
संदर्भ: भारत के समुद्री खाद्य निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹72,325 करोड़ ($8.28 बिलियन) का सर्वकालिक उच्च स्तर प्राप्त किया है। इस दौरान निर्यात की मात्रा 19.32 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गई, जो देश के समुद्री क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रमुख चालक और प्रवृत्तियाँ
- फ्रोजन झींगा का प्रभुत्व: फ्रोजन झींगा निर्यात का मुख्य आधार बना रहा, जिसने कुल आय में दो-तिहाई से अधिक (~₹47,973 करोड़) का योगदान दिया। इसके मूल्य और मात्रा दोनों में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है।
- बाजार विविधीकरण: हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है, लेकिन चीन, यूरोपीय संघ और दक्षिण-पूर्व एशिया में हुई मजबूत वृद्धि ने अमेरिका में ‘टैरिफ बाधाओं’ के कारण आई गिरावट की क्षतिपूर्ति कर दी है।
- उत्पाद विविधीकरण: फ्रोजन मछली, स्क्विड, कटलफिश, सुरीमी और मछली के तेल जैसे उत्पादों के निर्यात में तेजी आई है, जो भारत के निर्यात टोकरी के विस्तार का संकेत देता है।
- रसद और बुनियादी ढांचे की भूमिका: विजाग, कोच्चि, चेन्नई और JNPT जैसे प्रमुख बंदरगाहों ने समुद्री निर्यात के एक बड़े हिस्से को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत के लिए महत्व
- नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यह रिकॉर्ड प्रदर्शन भारत की ‘नीली अर्थव्यवस्था’ और निर्यात-आधारित विकास रणनीति के स्तंभ के रूप में मत्स्य पालन के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है।
- रोजगार और आजीविका: यह क्षेत्र लाखों मछुआरों और श्रमिकों को सहायता प्रदान करता है, जिससे तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास में योगदान मिलता है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: नए बाजारों में विस्तार और उत्पादों के विविधीकरण से वैश्विक व्यापार व्यवधानों के विरुद्ध भारत की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- नीतिगत प्रोत्साहन: मूल्य संवर्धन, ‘ट्रेसेबिलिटी’ (उत्पत्ति का पता लगाना), स्थिरता और बाजार पहुंच पर केंद्रित सरकारी पहलों ने निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा दिया है।
TRAWL प्रणालियों के लिए रक्षा मंत्रालय ने ₹975-करोड़ के सौदे पर हस्ताक्षर किए
संदर्भ: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों के लिए TRAWL (माइन-क्लियरिंग) प्रणालियों की खरीद हेतु ₹975 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
अन्य संबंधित जानकारी
- ये समझौते भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) और इलेक्ट्रो न्यूमेटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के साथ किए गए हैं।
- यह कदम बख्तरबंद क्षमताओं के आधुनिकीकरण और बारूदी सुरंगों से प्रभावित वातावरण में युद्धक्षेत्र की गतिशीलता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
TRAWL प्रणाली के बारे में
- ट्रॉल प्रणाली टैंकों पर लगा एक ‘माइन-क्लियरिंग’ उपकरण है, जिसे युद्ध अभियानों के दौरान एंटी-टैंक माइंस (बारूदी सुरंगों) का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित यह ‘ट्रॉल असेंबली’ एक महत्वपूर्ण प्रणाली है, जो बारूदी सुरंग वाले क्षेत्रों में वाहनों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाकर भारतीय सेना की ‘माइनफील्ड ब्रीचिंग’ (सुरंग भेदने) की क्षमता को बढ़ाती है।
- यह ‘प्रॉक्सिमिटी मैग्नेटिक फ्यूज’ से लैस उन्नत माइंस को भी निष्क्रिय कर सकता है, जिससे बख्तरबंद टुकड़ियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होती है।
- जब इसे T-72 और T-90 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों के साथ जोड़ा जाता है, तो यह युद्ध की स्थितियों में उनकी गतिशीलता, उत्तरजीविता और परिचालन प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार करता है।
रणनीतिक महत्व
- रक्षा में ‘आत्मनिर्भर भारत‘ को बढ़ावा: यह खरीद ‘बाय (इंडियन-IDDM)’ श्रेणी के अंतर्गत आती है, जो घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है और आयात पर निर्भरता कम करती है।
- युद्ध की तैयारी को सुदृढ़ करना: यह सुरंग युक्त क्षेत्रों में आक्रामक और रक्षात्मक अभियान चलाने की भारत की क्षमता को बढ़ाता है, जो आधुनिक युद्ध परिदृश्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण: यह तकनीकी उन्नयन और मशीनीकृत युद्ध तैयारी पर भारत के निरंतर ध्यान को दर्शाता है।
विश्व पृथ्वी दिवस 2026
संदर्भ: 22 अप्रैल को वैश्विक स्तर पर ‘विश्व पृथ्वी दिवस 2026’ मनाया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
अन्य संबंधित जानकारी
- वर्ष 2026 का विषय “Our Power, Our Planet” (हमारी शक्ति, हमारा ग्रह) है, जो पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में व्यक्तियों, समुदायों और संस्थानों की भूमिका पर बल देती है।
- जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि, प्रदूषण और चरम मौसम की घटनाओं पर बढ़ती चिंताओं के बीच यह आयोजन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जो तत्काल वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाता है।
पृथ्वी दिवस के बारे में
- पृथ्वी दिवस पहली बार 1970 में संयुक्त राज्य अमेरिका में मनाया गया था, जिसने आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत की।
- इसकी शुरुआत गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी, जिसका उद्देश्य पर्यावरण के क्षरण के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सार्वजनिक कार्रवाई को लामबंद करना था।
- आज यह 190 से अधिक देशों में फैल चुका है, जिसमें सरकारें, नागरिक समाज और व्यक्ति सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
- इस आयोजन का समन्वयन EarthDay.org द्वारा किया जाता है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए अभियानों और पहलों का नेतृत्व करता है।
18वां सिविल सेवा दिवस
संदर्भ: 21 अप्रैल 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 18वाँ सिविल सर्विस दिवस मनाया गया, जिसमें शासन और राष्ट्र निर्माण में लोक सेवकों की भूमिका को मान्यता दी गई।
अन्य संबंधित जानकारी
- वर्ष 2026 की विषय, “विकसित भारत: नागरिक-केंद्रित शासन और अंतिम छोर तक विकास”, समावेशी विकास और सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावी वितरण पर ध्यान केंद्रित करती है।
- इस अवसर पर शासन संबंधी सुधारों जैसे iGOT कर्मयोगी क्षमता निर्माण मंच और बेहतर ‘लोक शिकायत निवारण प्रणालियों’ का प्रदर्शन किया गया।
सिविल सर्विस दिवस के बारे में
- सिविल सेवा दिवस प्रतिवर्ष 21 अप्रैल को मनाया जाता है ताकि लोक सेवक स्वयं को सार्वजनिक सेवा और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के प्रति पुनः समर्पित कर सकें।
- यह तिथि 1947 में सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा दिए गए ऐतिहासिक संबोधन की याद दिलाती है, जहाँ उन्होंने लोक सेवकों को “भारत का स्टील फ्रेम” कहा था।
- इसे औपचारिक रूप से 2006 में शुरू किया गया था। इसमें लोक प्रशासन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार’ प्रदान किए जाते हैं।
- यह सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करने, प्रशासनिक प्रदर्शन की समीक्षा करने और शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
महत्व
- सार्वजनिक सेवा मूल्यों की पुष्टि: यह दिन सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और समर्पण जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करता है, जो प्रभावी शासन के लिए अनिवार्य हैं।
- नागरिक-केंद्रित शासन: अंतिम छोर तक सेवा वितरण और समावेशी विकास पर जोर देना समकालीन शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
- प्रशासनिक सुधार और क्षमता निर्माण: मिशन कर्मयोगी और डिजिटल गवर्नेंस टूल जैसी पहल दक्षता और जवाबदेही को बढ़ाती हैं।
- उत्कृष्टता की पहचान: पुरस्कार प्रणाली विभिन्न जिलों और क्षेत्रों में सार्वजनिक प्रशासन में नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यासों को प्रोत्साहित करती है।
