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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
संदर्भ: भारत ने कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट (MWe) के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के साथ अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस रिएक्टर ने ‘प्रथम क्रिटिकैलिटी’ प्राप्त कर ली है, जोकि एक नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत का प्रतीक है।
अन्य संबंधित जानकारी

- प्रधानमंत्री ने इसे “भारत की नागरिक परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम” कहा है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में हुई प्रगति को दर्शाता है।
- यह उपलब्धि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में भारत का मार्ग प्रशस्त करती है।
कलपक्कम PFBR परियोजना के बारे में
- PFBR एक 500 मेगावाट (MWe) क्षमता का सोडियम-शीतलित, पूल-टाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, जिसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा किया गया है। ये दोनों संस्थान परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन कार्यरत हैं।
- परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (AERB) से सभी सुरक्षा आवश्यकताओं और मंजूरी मिलने के बाद रिएक्टर ने ‘क्रिटिकैलिटी’ (नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया) प्राप्त कर ली है।
- वर्ष 2003 में स्वीकृत और 2004 में शुरू हुई इस परियोजना को तकनीकी जटिलताओं के कारण क्रिटिकैलिटी तक पहुँचने में दो दशक से अधिक का समय लगा। मार्च 2024 में कोर लोडिंग और अक्टूबर 2025 में ईंधन लोडिंग के बाद, अंततः अप्रैल 2026 में इसने क्रिटिकैलिटी प्राप्त की।
- देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना की लागत लगभग ₹3,492 करोड़ से बढ़कर करीब ₹7,600 करोड़ हो गई। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा खरीद प्रक्रियाओं में अक्षमता को भी चिन्हित किया गया था।
- PFBR के साथ, भारत रूस के बाद वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला विश्व का दूसरा देश बन सकता है।
- जापान, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में सुरक्षा और आर्थिक चिंताओं के कारण फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रमों को सीमित कर दिया गया है।
प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के बारे में
- PFBR एक ऐसा परमाणु रिएक्टर है जो अपनी खपत की तुलना में अधिक ईंधन का उत्पादन करता है।
- यह एक ‘फास्ट ब्रीडर’ रिएक्टर है, जिसका अर्थ है कि यह परिचालन के दौरान अतिरिक्त विखंडनीय सामग्री उत्पन्न करता है।
- इसकी ‘कोर-लोडिंग’ एक उपलब्धि है क्योंकि यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के द्वितीय चरण की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है।
- भाविनी (BHAVINI): परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने परमाणु कार्यक्रम के द्वितीय चरण को कार्यान्वित करने के लिए वर्ष 2003 में ‘भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड’ (BHAVINI) नामक एक ‘विशेष प्रयोजन वाहन’ की स्थापना की थी।
भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम में भूमिका:

- इस तीन-चरणीय कार्यक्रम को डॉ. होमी जे. भाभा द्वारा डिजाइन किया गया था, क्योंकि भारत में विश्व के थोरियम भंडार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मौजूद है।
- प्रथम चरण – PHWRs: भारत ने दाबित भारी जल रिएक्टरों (PHWRs) और प्राकृतिक यूरेनियम-238 (U-238) का उपयोग किया, जिसमें विखंडनीय सामग्री के रूप में अल्प मात्रा में U-235 होता है।
- PHWR में भारी जल न्यूट्रॉन की गति को इतना धीमा कर देता है कि उन्हें U-238 और U-235 नाभिकों द्वारा अवशोषित किया जा सके, जिससे नई विखंडन प्रक्रिया शुरू होती है।
- इन अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप ऊर्जा के साथ-साथ प्लूटोनियम-239 (Pu-239) का उत्पादन होता है।
- द्वितीय चरण – PFBR: केवल यूरेनियम-235 (U-235) ही श्रृंखला अभिक्रिया को जारी रख सकता है, न कि U-238; और U-235 का उपयोग प्रथम चरण में हो जाता है।
- द्वितीय चरण में, भारत ऊर्जा, यूरेनियम-233 और अधिक मात्रा में Pu-239 उत्पन्न करने के लिए PFBR में Pu-239 के साथ U-238 का उपयोग करता है।
- तृतीय चरण – थोरियम आधारित रिएक्टर: तृतीय चरण में, ऊर्जा और यूरेनियम-233 उत्पन्न करने के लिए रिएक्टरों में Pu-239 को थोरियम-232 (Th-232) के साथ मिलाया जाता है।
- इन तीनों चरणों के पूर्ण होने से देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त होने की संभावना है।
PFBR कैसे कार्य करता है?
- ईंधन और कोर (क्रोड) डिजाइन: PHWRs प्राकृतिक या कम-संवर्धित (low-enriched) U-238 का उपयोग करते हैं और सह-उत्पाद के रूप में Pu-239 उत्पन्न करते हैं।
- इस Pu-239 को अतिरिक्त U-238 के साथ मिलाकर मिश्रित ऑक्साइड (MOX) बनाया जाता है और इसे एक आवरण के साथ नए रिएक्टर के कोर में लोड किया जाता है।
- ब्रीडिंग प्रक्रिया: ब्लैंकेट एक ऐसी सामग्री है जो कोर में विखंडन उत्पादों के साथ अभिक्रिया करके अधिक Pu-239 उत्पन्न करती है।
- PFBR को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह अपने उपभोग की तुलना में अधिक Pu-239 का उत्पादन करे।
- फास्ट न्यूट्रॉन प्रणाली: एक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में, न्यूट्रॉन की गति को मंद नहीं किया जाता (मंदक का उपयोग नहीं होता), जिससे वे विशिष्ट विखंडन अभिक्रियाओं को कुशलतापूर्वक सक्रिय कर पाते हैं।
शीतलक और ऊर्जा हस्तांतरण प्रणाली:
- PFBR में अत्यधिक प्रतिक्रियाशील पदार्थ, ‘तरल सोडियम’ का उपयोग दो परिपथों में शीतलक के रूप में किया जाता है:
- प्राथमिक परिपथ: इस परिपथ का शीतलक रिएक्टर में प्रवेश करता है और तापीय ऊर्जा तथा रेडियोधर्मिता के साथ बाहर निकलता है। ‘हीट एक्सचेंजर’ के माध्यम से, यह केवल ऊष्मा को द्वितीयक परिपथ के शीतलक में स्थानांतरित करता है।
- द्वितीयक परिपथ: यह परिपथ ऊष्मा को जनरेटर तक ले जाता है ताकि बिजली का उत्पादन किया जा सके।
- सुरक्षित डिजाइन: यह डिजाइन रेडियोधर्मी और गैर-रेडियोधर्मी प्रणालियों के बीच पृथक्करण बनाए रखते हुए कुशल ऊष्मा हस्तांतरण सुनिश्चित करता है।
महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा: PFBR यूरेनियम की दी गई मात्रा से 60-100 गुना अधिक ऊर्जा निकालने में सक्षम बनाता है। यह संसाधन दक्षता में सुधार करता है और आयातित परमाणु ईंधन पर भारत की निर्भरता को कम करता है।
- स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: PFBR से प्राप्त परमाणु ऊर्जा विश्वसनीय और कम-कार्बन वाली ‘बेस-लोड’ शक्ति प्रदान करती है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की पूरक है और भारत के जलवायु लक्ष्यों का समर्थन करती है।
- तकनीकी क्षमता: PFBR उन्नत परमाणु इंजीनियरिंग, रिएक्टर डिजाइन और ईंधन चक्र प्रौद्योगिकियों में भारत की स्वदेशी शक्ति को प्रदर्शित करता है।
- रणनीतिक महत्व: यह यूरेनियम-आधारित और थोरियम-आधारित प्रणालियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है, जिससे भारत उन्नत फास्ट ब्रीडर तकनीक वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है।
- औद्योगिक विकास: इस परियोजना में MSMEs सहित 200 से अधिक भारतीय उद्योग शामिल थे, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को समर्थन मिला।
