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सामान्य अध्ययन 2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार; महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संदर्भ: हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संपूर्ण प्रणाली में संयुक्त राष्ट्र के अधिदेशों के निर्माण, कार्यान्वयन और समीक्षा की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए एक ऐतिहासिक संकल्प को अपनाया।

अन्य संबंधित जानकारी

• यह संकल्प पहली बार अधिदेश के पूर्ण जीवन-चक्र- अभिकल्पन (डिज़ाइन) से लेकर कार्यान्वयन और समीक्षा तक—के लिए एक अधिक संरचित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

  • अधिदेश सदस्य देशों द्वारा लिए गए वे निर्णय होते हैं जो संपूर्ण संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का मार्गदर्शन करते हैं।

• इस संकल्प का उद्देश्य सदस्य देशों के लिए निरंतर जटिल होते जा रहे ‘अधिदेश परिदृश्य’ की  समझ की सुविधा प्रदान करना है, साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र को कार्यों के दोहराव, विखंडन और अक्षमता को कम करने में सहायता प्रदान करेगा।

• यह कदम UN80 पहल के अंतर्गत एक प्रमुख उपलब्धि है, जो अधिदेश के पूर्ण जीवन-चक्र के प्रति एक साझा समझ और इसके प्रत्येक चरण को सशक्त बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

UN80 पहल के बारे में

• संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ पर मार्च 2025 में संकल्प 79/318 द्वारा शुरू की गई UN80 पहल, संयुक्त राष्ट्र का एक महत्वाकांक्षी और प्रणालीगत सुधार प्रयास है।

• इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र को अधिक उत्तरदायी और लचीला बनाना है, ताकि यह उन लोगों को बेहतर सेवा दे सके जिनका जीवन इस पर निर्भर है। साथ ही, यह उन करदाताओं के प्रति अधिक जवाबदेह बने जो इसके कार्यों को वित्तपोषित करते हैं और अपने महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए अधिक सहायक सिद्ध हो सके।

• यह संपूर्ण संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को प्रभावित करने वाले परिवर्तनों का प्रस्ताव करता है — अधिदेशों के निर्माण से लेकर उनके कार्यान्वयन और समीक्षा तक।

संयुक्त राष्ट्र सुधारों में भारत की भूमिका

• संस्थापक सदस्य और प्रारंभिक नेतृत्व: 1945 से संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य के रूप में, भारत ने उपनिवेशवाद, निरस्त्रीकरण और नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध वैश्विक प्रयासों का समर्थन किया। भारत ने अपनी स्वतंत्रता से पूर्व ही ‘रंगभेद’ के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया था।

• मानवाधिकार ढांचे में योगदान: वर्ष 1947-48 के दौरान, भारत ने ‘मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा’ में “सभी पुरुष समान रूप से निर्मित हैं” वाक्यांश को बदलकर “सभी पुरुष और महिलाएँ समान रूप से निर्मित हैं” करवाकर लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया।

• संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतृत्व: 1953 में, विजयलक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। उस समय भारत ने वैश्विक निरस्त्रीकरण और अधिक न्यायसंगत अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की वकालत की थी।

• उपनिवेशवाद विरोधी प्रयासों में भूमिका:

  • भारत ने वैश्विक वि-उपनिवेशीकरण और राष्ट्रीय संप्रभुता का पुरजोर समर्थन किया।
  • भारत 1960 के संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र का सह-प्रायोजक था और औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के लिए स्थापित ‘वि-उपनिवेशीकरण समिति’ के प्रथम अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

• रंगभेद के विरुद्ध रुख: भारत दक्षिण अफ्रीकी रंगभेद का अग्रणी आलोचक था। संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को उठाने वाला यह पहला देश था, जिसने ‘रंगभेद विरोधी उप-समिति’ के गठन का नेतृत्व किया और 1965 के ‘नस्लीय भेदभाव पर सम्मेलन’ के शुरुआती हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल हुआ।

• ग्लोबल साउथ मंचों का नेतृत्व: गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) और 77 के समूह (G77) के संस्थापक सदस्य के रूप में, भारत ने विकासशील देशों की चिंताओं और आकांक्षाओं के प्रमुख पैरोकार के रूप में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में अपनी स्थिति सुदृढ़ की।

• UNSC सुधारों की वकालत:

  • भारत समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पुनर्गठन की वकालत करता है। भारत का तर्क है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का वर्तमान ढांचा अब अप्रासंगिक हो चुका है।
  • यद्यपि संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता बढ़कर 193 हो गई है, लेकिन 1963 के बाद से परिषद का विस्तार नहीं हुआ है। विशेष रूप से, अफ्रीका का कोई स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं है, जबकि UNSC के 75% कार्य अफ्रीका पर केंद्रित होते हैं।

• UNSC में स्थायी सदस्यता का दावा: भारत ने संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों, विशेष रूप से शांति अभियानों में अपने प्रमुख योगदान का हवाला देते हुए सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का पुरजोर दावा किया है। भारत ने 43 मिशनों में 1,60,000 से अधिक सैनिक भेजे हैं और 2014 में यह तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता था।

• वैश्विक सांस्कृतिक पहलों को प्रोत्साहन: 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित किया गया।

• शांति स्थापना में नेतृत्व: 1950 के दशक से, भारत ने दुनिया भर में 50 से अधिक मिशनों में 2,90,000 से अधिक शांति सैनिक भेजे हैं, जिससे  यह संयुक्त राष्ट्र शांति प्रयासों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।

SOURCES:
UN
UN
INBA

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