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सामान्य अध्ययन 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन|

संदर्भ: हाल ही में, वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय (CMS) के पक्षकारों के सम्मेलन की 15वीं बैठक (COP 15) ब्राजील के कैम्पो ग्रांडे में संपन्न हुई।

अन्य संबंधित जानकारी

• संरक्षित प्रजातियों की सूची का विस्तार:

  • संरक्षित प्रजातियों की श्रेणी में प्रवासी पक्षियों, जलीय और स्थलीय जीवों की 40 नई प्रजातियों को जोड़ा गया है, जो इस नए साक्ष्य की पृष्ठभूमि में आया है कि “कई प्रवासी प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर पहुँच रही हैं”।
  • इसमें चीता, धारीदार लकड़बग्घा, बर्फीला उल्लू, विशाल ऊदबिलाव, ग्रेट हैमरहेड शार्क और तटवर्ती पक्षियों की कई प्रजातियाँ शामिल हैं।

• इस सम्मेलन का विषय “प्रकृति को जोड़ना, जीवन को संजोना” (Connecting Nature to Sustain Life) था, जो पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए ‘पारिस्थितिकी कनेक्टिविटी’ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है। यह प्रवासी प्रजातियों और मानव कल्याण, दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

• ब्राज़ील (विश्व का सर्वाधिक जैव विविधता वाला देश) में पहली बार CMS COP का आयोजन किया गया है।

• प्रवासी प्रजाति चैंपियन पुरस्कार: दीर्घकालिक संरक्षण पहलों में उनके योगदान के लिए 9 नए चैंपियनों को मान्यता दी गई:

  • उज़्बेकिस्तान सरकार
  • ऑस्ट्रेलिया सरकार
  • मोनाको रियासत की सरकार
  • फ़्लैंडर्स सरकार
  • फ्रांसीसी जैव विविधता एजेंसी 
  • सऊदी अरब साम्राज्य का वन्यजीव राष्ट्रीय केंद्र 
  • यूरोपीय आयोग 
  • जर्मन संघीय प्रकृति संरक्षण एजेंसी (BfN)
  • समुद्री पर्यावरण संरक्षण हेतु क्षेत्रीय संगठन (ROPME)

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय (CMS) के बारे में

• 23 जून 1979 को बॉन में हस्ताक्षरित यह अभिसमय, जिसे लोकप्रिय रूप से बॉन अभिसमय के नाम से जाना जाता है, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्वावधान में संचालित एक पर्यावरणीय संधि है।

• यह प्रवासी पशुओं और उनके आवासों के संरक्षण तथा सतत उपयोग के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।

• विशिष्ट विशेषता: यह एकमात्र संयुक्त राष्ट्र आधारित अंतर-सरकारी संधि है जो विशेष रूप से स्थलीय, जलीय और पक्षी प्रवासी प्रजातियों के उनके संपूर्ण विस्तार क्षेत्र में संरक्षण और प्रबंधन के लिए समर्पित।

• मुख्य उद्देश्य: पक्षकार प्रवासी प्रजातियों, विशेष रूप से उन प्रजातियों के संरक्षण की आवश्यकता को स्वीकार करते हैं जिनकी संरक्षण स्थिति प्रतिकूल है।

• संस्थागत तंत्र: पक्षकारों का सम्मेलन (COP) इस अभिसमय  के मुख्य निर्णय लेने वाले निकाय के रूप में कार्य करता है। इसकी बैठक प्रत्येक 3 वर्ष में एक बार होती है और यह अगले तीन वर्षों के लिए बजट और प्राथमिकताएं निर्धारित करता है।

• पक्षकार: इसमें 133 पक्षकार (132 देश और यूरोपीय संघ) शामिल हैं।

  • जमैका ने मूल अभिसमय पर हस्ताक्षर किए थे, किंतु अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए वह इसका पक्षकार नहीं है।

• कार्यान्वयन के साधन: CMS कानूनी रूप से बाध्यकारी संधियों (जिन्हें समझौते कहा जाता है) से लेकर कम औपचारिक साधनों, जैसे कि समझौता ज्ञापनों (MoU) के माध्यम से संचालित होता है।

• CMS के अंतर्गत परिशिष्ट:

  • परिशिष्ट I – संकटग्रस्त प्रवासी प्रजातियाँ: इसमें उन प्रवासी प्रजातियों को शामिल किया जाता है जिन्हें IUCN की रेड लिस्ट के अनुसार ‘वन्य क्षेत्र में विलुप्त’, ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’, या ‘संकटग्रस्त’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह उनके कठोर संरक्षण के साथ-साथ सीमा-पार संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देता है।
  • परिशिष्ट II – प्रतिकूल स्थिति वाली प्रजातियाँ: इसमें प्रतिकूल संरक्षण स्थिति वाली प्रवासी प्रजातियों को शामिल किया जाता है, जिनमें IUCN रेड लिस्ट के अनुसार ‘निकट संकटग्रस्त’ से लेकर ‘वन्य क्षेत्र में विलुप्त’ तक की प्रजातियाँ शामिल हैं। यह संरक्षण समझौतों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

भारत और CMS COP

• भारत वर्ष 1983 से CMS (प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय) का हस्ताक्षरकर्ता है।

• भारत ने वर्ष 2020 में गांधीनगर (गुजरात) में पहली बार 13वें CMS COP (पक्षकारों के सम्मेलन) की मेजबानी की थी।

• COP13 का विषय था— “प्रवासी प्रजातियां ग्रह को जोड़ती हैं, और साथ मिलकर हम उनका घर वापसी पर स्वागत करते हैं!” 

• भारत में एक महत्वपूर्ण पक्षी उड़ान मार्ग नेटवर्क है, जैसे मध्य एशियाई उड़ान मार्ग।

Sources
CMS
CMS
Down to Earth
Indian Express
CMS

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