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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास। सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी और जैव- प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता।

संदर्भ: हाल ही में, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु ने ब्रेन को-प्रोसेसर विकसित करने के लिए एक ‘मूनशॉट’ (अत्यंत महत्वाकांक्षी) प्रोजेक्ट शुरू की। यह प्रोजेक्ट मस्तिष्क के कार्यों को बेहतर बनाने या रि-स्टोर करने के लिए न्यूरोमॉर्फिक हार्डवेयर और AI एल्गोरिदम का समन्वय करती है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस प्रोजेक्ट को प्रतीक्षा ट्रस्ट द्वारा वित्तपोषित किया गया है, जिसकी स्थापना सेनापति ‘क्रिस’ गोपालकृष्णन और सुधा गोपालकृष्णन द्वारा की गई है।
  • इस प्रोजेक्ट को ‘मूनशॉट’ के रूप में वर्णित किया गया है क्योंकि यह बड़े पैमाने के तकनीकी मिशनों के समान एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और परिवर्तनकारी वैज्ञानिक लक्ष्य को लक्षित करती है।
  • इस पहल का उद्देश्य न्यूरल रिकॉर्डिंग (तंत्रिका अभिलेखन), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लोज्ड-लूप ब्रेन सिमुलेशन को एक एकल उपचारात्मक प्रणाली में एकीकृत करके तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल करना है।

प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं

  • इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ‘इम्प्लांटेबल’ (शरीर के भीतर आरोपित) और ‘नॉन-इनवेसिव’ (बिना चीर-फाड़ वाले) ब्रेन को-प्रोसेसर विकसित करना है, जो तंत्रिका अभिलेखन से मस्तिष्क की गतिविधियों को डिकोड कर सकें।
  • यह प्रणाली एआई (AI) एल्गोरिदम का उपयोग करके सूचनाओं को संसाधित करेगी और न्यूरल स्टिमुलेशन (तंत्रिका उत्तेजना) या न्यूरोफीडबैक के माध्यम से पुनः मस्तिष्क को संकेत भेजेगी।
  • यह तकनीक मुख्य रूप से स्ट्रोक से बचे व्यक्तियों के संज्ञानात्मक पुनर्वास में सहायता के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे ‘लक्ष्य-निर्देशित’ गतिविधियों (जैसे किसी वस्तु को पकड़ना) को पुनः बहाल किया जा सके।
  • प्रोजेक्ट के तहत एक एआई-संचालित उपकरण बनाया जाएगा जो मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों से जुड़कर सुचारू और समन्वित गतिविधियों को बहाल करने में मदद करेगा।
  • इस पहल का लक्ष्य ऐसे स्वदेशी इम्प्लांट, हार्डवेयर और एआई सिस्टम विकसित करना है जो भारत के नैदानिक बुनियादी ढांचे विशेषकर कम संसाधन वाले स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में कार्य कर सकें।
  • इसके अंतर्गत भारत-विशिष्ट ‘न्यूरल रिकॉर्डिंग डेटाबेस’ (जैसे स्टीरियो EEG और ECoG) तैयार किए जाएंगे और ओपन-सोर्स एआई टूल एवं डेटासेट को ‘डिजिटल पब्लिक गुड्स’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • चरणबद्ध क्रियान्वयन:
    • प्रथम चरण: स्ट्रोक के रोगियों के लिए ‘नॉन-इनवेसिव न्यूरल को-प्रोसेसर’ विकसित करने पर केंद्रित है जो सेंसोरिमोटर फीडबैक प्रदान कर सके।
    • द्वितीय चरण: इसका लक्ष्य एक ‘मिनिमली इनवेसिव’ (न्यूनतम चीर-फाड़ वाला) एम्बेडेड को-प्रोसेसर विकसित करना है, जो मिडिल सेरेब्रल आर्टरी स्ट्रोक के बाद पुराने न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीड़ित रोगियों में समन्वय बहाल कर सके।

ब्रेन कोप्रोसेसर को समझना और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मानव मस्तिष्क सरल प्रतिवर्ती क्रियाओं से लेकर जटिल तार्किक विमर्श तक, व्यवहारों की एक विस्तृत श्रृंखला को नियंत्रित करता है।
    • ये व्यवहार मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों में फैले बड़े पैमाने के तंत्रिका संजालों के बीच समन्वित अंतःक्रियाओं से उत्पन्न होते हैं।
    • जटिल कार्य किसी एक पृथक क्षेत्र के बजाय, मस्तिष्क के कई क्षेत्रों की एकीकृत गतिविधि से उभरते हैं।
    • स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात), तंत्रिकाक्षयकारी रोगों, अभिघातजन्य मस्तिष्क चोट  या विकासात्मक स्थितियों के कारण मस्तिष्क के इन संजालों में व्यवधान आने से गंभीर कार्यात्मक क्षय या अक्षमता हो सकती है।

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) की भूमिका

  • ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCIs) के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जो मस्तिष्क के कार्यों को बहाल करने या बढ़ाने के लिए सीधे तंत्रिका संकेतों के साथ संवाद करते हैं।
  • BCI ने लकवाग्रस्त व्यक्तियों के लिए कंप्यूटर कर्सर या रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित करने हेतु ‘गत्यात्मक मंशा’ (Motor intent) को डिकोड करने जैसी क्षमताएँ प्रदर्शित की हैं। कुछ BCI तकनीकों में रेटिनल प्रोस्थेसिस भी सम्मिलित हैं, जो दृष्टिहीन व्यक्तियों की बुनियादी दृष्टि को पुनः प्राप्त करने में सहायता करते हैं।

पारंपरिक BCI दृष्टिकोण की सीमाएँ

  • अधिकांश विद्यमान BCI प्रणालियाँ ‘एक-क्षेत्र-एक-कार्य’ दृष्टिकोण का पालन करती हैं, जो किसी संकीर्ण कार्य के लिए मस्तिष्क के एक विशिष्ट सर्किट को लक्षित करती हैं।
  • यह दृष्टिकोण मस्तिष्क के कार्यों की वितरित और अंतर्संबंधित प्रकृति को पूरी तरह से ध्यान में नहीं रखता है।
  • यहाँ तक कि किसी वस्तु तक पहुँचने और उसे पकड़ने जैसी सरल क्रियाओं में भी मस्तिष्क के कई क्षेत्रों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।

ब्रेन को-प्रोसेसर की अवधारणा

  • ब्रेन को-प्रोसेसर उन्नत न्यूरोटेक्नोलॉजी प्रणालियाँ हैं, जिन्हें तंत्रिका कार्यों को बढ़ाने या बहाल करने के लिए सीधे मानव मस्तिष्क के साथ संवाद करने हेतु डिज़ाइन किया गया है।
  • ये उपकरण तंत्रिका अभिलेखन (Neural recordings) से प्राप्त मस्तिष्क संकेतों का विश्लेषण करते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एल्गोरिदम का उपयोग करके उन्हें संसाधित करते हैं।
  • संसाधित जानकारी को फिर तंत्रिका उत्तेजना या न्यूरोफीडबैक के माध्यम से मस्तिष्क की गतिविधियों को प्रभावित करने के लिए वापस भेजा जाता है।
  • ब्रेन को-प्रोसेसर ‘क्लोज्ड-लूप’ सिस्टम के रूप में कार्य करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे निरंतर मस्तिष्क संकेतों को पढ़ते हैं, उनका विश्लेषण करते हैं और वास्तविक समय (Real-time) में सुधारात्मक फीडबैक प्रदान करते हैं।
  • इस तकनीक को शरीर के भीतर रखे जाने वाले ‘इम्प्लांटेबल’ उपकरणों के रूप में या बाहर से संचालित होने वाले ‘नॉन-इनवेसिव’ सिस्टम के रूप में विकसित किया जा सकता है।

ब्रेन को-प्रोसेसर का महत्व

  • ब्रेन को-प्रोसेसर का लक्ष्य केवल तकनीकी प्रदर्शन मीट्रिक पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, वास्तविक जीवन की स्थितियों में प्राकृतिक मस्तिष्क कार्यों को बहाल करना या बढ़ाना है।
  • यह तकनीक उन जटिल तंत्रिका संबंधी विकारों को दूर करने में सहायता कर सकती है, जिनमें मस्तिष्क के कई क्षेत्रों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।
  • ब्रेन को-प्रोसेसर के विकास के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पदार्थ विज्ञान, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्रों में प्रगति की आवश्यकता है।
  • गहन समझ: यह दृष्टिकोण इस बात की गहरी समझ को भी दर्शाता है कि मस्तिष्क सूचनाओं को कैसे संसाधित करता है और ‘फीडबैक-संचालित शिक्षण तंत्र’ के माध्यम से स्वयं को कैसे अनुकूलित करता है।
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