जनगणना 2027 के लिए शुभंकर का अनावरण
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्री ने नई दिल्ली में आगामी जनगणना 2027 के लिए ‘प्रगति’ (Pragati) और ‘विकास’ (Vikas) नामक दो शुभंकरों का अनावरण किया और चार डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए।
अन्य संबंधित जानकारी

- शुभंकर ‘प्रगति’ और ‘विकास’ क्रमशः एक महिला और एक पुरुष जनगणना प्रगणक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- ये शुभंकर राष्ट्र निर्माण में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी के प्रतीक हैं।
- ये शुभंकर नागरिक-अनुकूल और सुलभ तरीके से जनगणना 2027 से संबंधित जानकारी और जागरूकता फैलाने में सहायता करेंगे।
- प्रगत संगणन विकास केंद्र (C-DAC) ने देश भर में गणना कार्यों को सुविधाजनक बनाने के लिए उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं।
जनगणना 2027 के लिए चार डिजिटल उपकरण
- हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (HLBC) वेब एप्लीकेशन: यह एप्लीकेशन चार्ज अधिकारियों को सैटेलाइट इमेजरी (उपग्रह चित्रों) का उपयोग करके डिजिटल रूप से ‘हाउसलिस्टिंग ब्लॉक’ बनाने की अनुमति देता है और देश भर में मानकीकृत भौगोलिक कवरेज सुनिश्चित करता है।
- HLO मोबाइल एप्लीकेशन: यह एप्लीकेशन प्रगणकों को एक सुरक्षित, ऑफलाइन मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हाउसलिस्टिंग डेटा एकत्र करने और डेटा को सीधे केंद्रीय सर्वर पर प्रसारित करने में सक्षम बनाता है।
- स्व-गणना (Self-Enumeration – SE) पोर्टल: यह पोर्टल परिवारों को फील्ड सर्वे से पहले अपनी जानकारी ऑनलाइन जमा करने की अनुमति देता है और एक विशिष्ट ‘स्व-गणना आईडी’ उत्पन्न करता है, जिसका बाद में प्रगणक द्वारा सत्यापन किया जाता है।
- जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) पोर्टल: यह पोर्टल जनगणना कार्यों की योजना बनाने, प्रबंधन और निगरानी के लिए एक केंद्रीय मंच के रूप में कार्य करता है, जिससे अधिकारी वास्तविक समय में गणना की प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।
जनगणना 2027 के विषय में
- केंद्र सरकार ने 16 जून, 2025 को एक राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) के माध्यम से जनगणना 2027 आयोजित करने के अपने इरादे को अधिसूचित किया, जिससे औपचारिक रूप से जनगणना प्रक्रिया शुरू हुई।
- जनगणना-2027 विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभ्यास है और इसे दो चरणों में आयोजित किया जाएगा:
- चरण 1: मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (HLO): इसमें आवास की स्थिति और घरेलू सुविधाओं पर डेटा एकत्र किया जाएगा। यह 1 अप्रैल, 2026 से 30 सितंबर, 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा।
- चरण 2: जनसंख्या गणना (PE): यह देश के प्रत्येक व्यक्ति के जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक विवरण दर्ज करेगा। यह फरवरी 2027 में पूरे भारत में आयोजित किया जाएगा।
- जनगणना 2027 भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी जो पूरी तरह से डिजिटल उपकरणों के माध्यम से संचालित होगी और पहली बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प प्रदान करेगी।
- इस जनगणना के जनसंख्या गणना चरण के दौरान जाति से संबंधित प्रश्न भी सम्मिलित किए जाएंगे।
रायसीना डायलॉग 2026
संदर्भ:
हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में रायसीना संवाद के 11वें संस्करण का उद्घाटन किया।
रायसीना डायलॉग 2026 के बारे में
- रायसीना संवाद भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख सम्मेलन है, जो 2016 से प्रतिवर्ष नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
- इसका आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है।
- यह म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन और शांगरी-ला संवाद जैसे प्रमुख वैश्विक रणनीतिक मंचों के भारतीय समकक्ष के रूप में उभरा है, जो वैश्विक शासन चर्चाओं को आकार देने में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
- इस वर्ष का विषय “संस्कार – अभिकथन, समायोजन, उन्नति” है।
- संवाद के भाग के रूप में ‘रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल’ के उद्घाटन संस्करण का भी आयोजन किया गया, ताकि विज्ञान कूटनीति और उभरती प्रौद्योगिकियों के शासन पर चर्चा की जा सके।
- यह संवाद एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहाँ वैश्विक नीति निर्माता, रणनीतिक विशेषज्ञ और प्रबुद्ध विचारक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं।
- तीन दिनों की अवधि के दौरान, विश्व के निर्णयकर्ता और विचारक विभिन्न प्रारूपों में छह मुख्य विषयगत स्तंभों पर संवाद में संलग्न रहेंगे:
- प्रतिस्पर्धी सीमाएं (Contested Frontiers): शक्ति, ध्रुवीयता और परिधि।
- साझा संसाधनों का सुधार (Repairing the Commons): नए समूह, नए संरक्षक, नए मार्ग।
- व्हाइट व्हेल (White Whale): ‘एजेंडा 2030’ की प्राप्ति।
- ग्यारहवां घंटा (The Eleventh Hour): जलवायु, संघर्ष और विलंब की लागत।
- टुमॉरोलैंड (Tomorrowland): एक ‘टेक-टोपिया’ की ओर।
- टैरिफ के समय में व्यापार (Trade in the Time of Tariffs): सुधार, लचीलापन, पुनराविष्कार।
रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल
- इस पहल का शुभारंभ नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया।
- इसका आयोजन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
- इसका लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नीति निर्माण में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करना है।
- इस मंच को विज्ञान कूटनीति और तकनीकी शासन पर संवाद के लिए एक वार्षिक फोरम के रूप में परिकल्पित किया गया है।
8वाँ जन औषधि दिवस
संदर्भ:
किफायती जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए 7 मार्च, 2026 को देश भर में 8वां जन औषधि दिवस मनाया गया।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह उत्सव औषधि विभाग के अंतर्गत भारतीय औषधि और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (PMBI) द्वारा आयोजित एक सप्ताह लंबे ‘जन औषधि सप्ताह 2026’ के समापन का प्रतीक था।
- सरकार ने 31 मार्च, 2027 तक वर्तमान 18,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के नेटवर्क को विस्तारित कर 25,000 केंद्र करने के अपने लक्ष्य की पुनरावृत्ति की।
जन औषधि दिवस के विषय में
- जन औषधि दिवस भारत में किफायती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
- जेनेरिक दवाओं के माध्यम से सुलभ स्वास्थ्य सेवा के महत्व पर प्रकाश डालने हेतु प्रथम जन औषधि दिवस 7 मार्च, 2019 को मनाया गया था।
- यह दिवस प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना से संबद्ध है, जिसका उद्देश्य जनता को सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP)
- यह कार्यक्रम को मूल रूप से 2008 में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन ‘जन औषधि योजना’ के रूप में प्रारंभ किया गया था। वर्ष 2015 में इसे प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के रूप में पुनर्गठित किया गया।
- यह योजना प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के माध्यम से संचालित होती है, जो काफी कम कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं प्रदान करते हैं।
- इस योजना का कार्यान्वयन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत एक संस्था, भारतीय औषधि और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (PMBI) द्वारा किया जाता है।
- योजना के मुख्य उद्देश्य:
- सभी के लिए किफायती मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं, उपभोग्य वस्तुएं और सर्जिकल आइटम उपलब्ध कराना तथा मरीजों के ‘आउट ऑफ पॉकेट’ (निजी) खर्च को कम करना।
- जनमानस में जेनेरिक दवाओं को लोकप्रिय बनाना और इस धारणा को दूर करना कि कम कीमत वाली जेनेरिक दवाएं घटिया गुणवत्ता की या कम प्रभावी होती हैं।
- भारत भर में सभी महिलाओं के लिए मासिक धर्म स्वास्थ्य सेवाओं (सैनिटरी नैपकिन आदि) की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- व्यक्तिगत उद्यमियों को जन औषधि केंद्र खोलने के लिए प्रोत्साहित कर रोजगार सृजन करना।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026
संदर्भ:
महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता देने और लैंगिक समानता व महिला अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 8 मार्च को वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
अन्य संबंधित जानकारी
- संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 को “सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार,न्याय, कार्रवाई।” विषय के साथ मनाया गया।
- यह विषय उन भेदभावपूर्ण कानूनों और हानिकारक सामाजिक प्रथाओं को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल देता है जो महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को निर्बल करते हैं।
- यह दिवस लैंगिक समानता प्राप्त करने हेतु सशक्त कानूनी सुरक्षा और सामूहिक वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करता है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में
- यह दिवस प्रतिवर्ष 8 मार्च को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।
- यह आयोजन लैंगिक समानता और महिला अधिकारों के लिए वैश्विक प्रयासों को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की जड़ें बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में उत्तरी अमेरिका और यूरोप के श्रमिक आंदोलनों में निहित हैं।
- महिला श्रमिकों ने कार्य की बेहतर स्थितियों, समान वेतन और मताधिकार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे।
- 1917 में, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने ‘रोटी और शांति’ (Bread and Peace) की मांग को लेकर हड़ताल की थी।
- यह विरोध प्रदर्शन जूलियन कैलेंडर के अनुसार 23 फरवरी को प्रारंभ हुआ था, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में 8 मार्च के अनुरूप है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1977 में आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मान्यता प्रदान की।
ग्रेविटी बम
संदर्भ:
हाल ही में, अमेरिकी रक्षा सचिव (Secretary of Defense) ने घोषणा की कि ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिकी सेना अब 500-पाउंड, 1000-पाउंड और 2000-पाउंड के सटीक ग्रेविटी बमों का उपयोग करेगी। यह निर्णय ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों के काफी हद तक कमजोर होने के आकलन के बाद लिया गया है।
ग्रेविटी बम के विषय में
- ग्रेविटी बम बिना शक्ति वाले हवाई बम होते हैं, जिन्हें विमान से छोड़े जाने के बाद वे केवल गुरुत्वाकर्षण के कारण लक्ष्य की ओर गिरते हैं।
- इन बमों का मार्ग गुरुत्वाकर्षण, वायुगतिकी और विमान की गति तथा ऊंचाई पर निर्भर करता है।
- वर्तमान में इन बमों को गाइडेंस किट से सुसज्जित किया जाता है, जिससे इनकी सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- कई ग्रेविटी बमों में जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनीशन (JDAM) किट लगाई जाती है। यह किट अनगाइडेड (बिना दिशा वाले) बमों को ‘सटीक-निर्देशित हथियारों’ में परिवर्तित कर देती है।
- इसमें जीपीएस (GPS) नेविगेशन सिस्टम और स्टीयरेबल फिन्स (Steerable Fins) होते हैं जो बम को सटीक निर्देशांक (तक पहुँचाते हैं।
- यह तकनीक बम को दूर से भी सटीक जगह पर निशाना बनाने की अनुमति देती है।
- अमेरिका के पास परमाणु ग्रेविटी बम भी हैं, जैसे B61 और B83 श्रृंखला। इन और पारंपरिक बमों में मुख्य अंतर उनके प्रभाव, लागत और उपयोग के अनुमति देने वाली प्रक्रिया में है।
ग्रेविटी बमों के प्रकार
- अमेरिकी सेना मुख्य रूप से Mark 80 श्रृंखला के पारंपरिक ग्रेविटी बम का उपयोग करती है।
- 500-पाउंड का Mark 82 बम हल्के लक्ष्यों जैसे वाहनों, रडार प्रणालियों और खुले स्थानों पर तैनात सैनिकों के लिए प्रयुक्त होता है।
- 1000-पाउंड का Mark 83 बम मजबूत संरचनाओं और सैन्य प्रतिष्ठानों को नष्ट करने के लिए इस्तेमाल होता है।
- 2000-पाउंड का Mark 84 बम बंकर बस्टर के रूप में कार्य करता है, जो भूमिगत सुविधाओं और किलेबंद ढांचों को नष्ट कर सकता है।
9वाँ अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन
संदर्भ: भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु, ने 7 मार्च, 2026 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित 9वें अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन में भाग लिया।
अन्य संबंधित जानकारी
- राष्ट्रपति ने भारत के शोषण और औपनिवेशिक शासन के विरोध में जनजातीय नायकों के योगदान पर प्रकाश डाला।
- उन्होंने 18वीं शताब्दी के अंत में तिलका मांझी के नेतृत्व में हुए संघर्षों और 1855 के संताल हुल (विद्रोह) को आदिवासी प्रतिरोध का महत्वपूर्ण क्षण माना।
अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन के विषय में
- यह सम्मेलन संताल विद्वानों, कलाकारों, नेताओं और शोधकर्ताओं का एक विश्वसनीय सांस्कृतिक मंच है।
- यह मंच जनजातीय पहचान, भाषाई संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक विकास पर चर्चा का अवसर प्रदान करता है।
- यह भारत, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में रहने वाले संताल समुदाय के बीच एकता को मजबूत करने का प्रयास है।
संताल समुदाय और संताली भाषा
- संताल (संथाल) भारत की सबसे बड़ी अनुसूचित जनजातियों में से एक है, जो मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम में केंद्रित है।
- संताल ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार से हैं और लोक संगीत, नृत्य और प्रकृति-केंद्रित मान्यताओं का पालन करते हैं।
- 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के तहत संताली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है, जिससे इसकी आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।
- संताली भाषा ‘ओल चिकी’ लिपि में लिखी जाती है, जिसका आविष्कार 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने किया था।
कलारीपयट्टू
संदर्भ:
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने केरल की पारंपरिक युद्ध कला, कलारीपयट्टू का अभ्यास किया।
कलारीपयट्टू के विषय में
- यह केरल की एक पारंपरिक युद्ध कला है, जिसे विश्व की प्राचीनतम युद्ध प्रणालियों में से एक माना जाता है। इसका उद्देश्य शारीरिक अनुशासन, श्वसन नियंत्रण और ध्यानात्मक एकाग्रता से मस्तिष्क और शरीर का प्रशिक्षण है।
- मलयालम में ‘कलारी’ का अर्थ है प्रशिक्षण या व्यायामशाला, और ‘पयट्टू’ का अर्थ अभ्यास।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस कला की शुरुआत योद्धा-ऋषि परशुराम से जुड़ी है।
- प्रशिक्षण चार चरणों में होता है:
- मैपयट्टू: शरीर की मजबूती और लचीलापन बढ़ाने के अभ्यास।
- कोल्थारी: लकड़ी के हथियार जैसे डंडे का अभ्यास।
- अंगथारी: तलवार और खंजर जैसे धातु के हथियारों का अभ्यास।
- वेरुमकई: निहत्थे युद्ध कौशल, जिसमें प्रेशर पॉइंट्स और शरीर रचना का ध्यान रखा जाता है।
- उत्तर केरल (मालाबार) में मुख्य रूप से तीन शैलियों का अभ्यास होता है:
- वट्टेनथिरिप्पु शैली
- अरप्पुक्कई शैली
- पिल्लथंगी शैली
