संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा केंद्रीय अनुसंधान संस्थान ने कसौली (हिमाचल प्रदेश) में स्वदेशी रूप से विनिर्मित टिटनेस और एडल्टडिप्थीरिया (Td) टीका लॉन्च किया।
अन्य संबंधित जानकारी

- टीके को लॉन्च करना भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत टीका आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- Td टीके को औपचारिक तौर पर UIP में एकीकृत कर दिया गया है, जिसमें CRI द्वारा अप्रैल 2026 तक 55 लाख खुराक की आपूर्ति करने की उम्मीद है, जिसके बाद उत्पादन में और वृद्धि की जाएगी।
- यह एक अग्रणी टीका निर्माता के रूप में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है। भारत को अक्सर “विश्व की फार्मेसी” के रूप में वर्णित किया जाता है।
- यह विकास कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा प्रदर्शित टीका क्षमताओं पर आधारित है और स्वास्थ्य देखभाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा तथा आत्मनिर्भर भारत के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है।
- यह पहल सार्वजनिक क्षेत्र के टीका विनिर्माण के आधुनिकीकरण को भी रेखांकित करती है, जिसमें CRI ‘गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज’ (GMP) के तहत संचालित एक प्रमुख संस्थान के रूप में उभर रहा है।
- स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के तहत 1905 में स्थापित CRI, UIP और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों के लिए टीकों और एंटीसेरा के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
टिटनेस और एडल्ट डिप्थीरिया (Td) टीके के बारे में
- Td टीका (टिटनेस और एडल्ट डिप्थीरिया वैक्सीन – अधिशोषित, कम डी-एंटीजन सामग्री) दोनों रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है।
- टिटनेस एक गंभीर रोग है जिसके लक्षण मांसपेशियों में दर्द जकड़न और ऐंठन हैं और लॉकजॉ (मुंह खोलने में असमर्थता), निगलने और सांस लेने में कठिनाई, और मृत्यु जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
- डिप्थीरिया एक संभावित जीवन घातक संक्रमण है जिसके परिणामस्वरूप सांस लेने में कठिनाई, हृदय गति रुकना, पक्षाघात और मृत्यु भी हो सकती है।
- इसे शुद्ध डिप्थीरिया टॉक्सोइड और शुद्ध टिटनेस टॉक्सोइड को मिलाकर तैयार किया जाता है।
- एंटीजन को एल्यूमीनियम फॉस्फेट पर अधिशोषित किया जाता है, जो एक सहायक के रूप में कार्य करता है, और इसमें परिरक्षक के रूप में थियोमर्सल मिलाया जाता है।
- Td टीके की शुरुआत का उद्देश्य किशोरों और वयस्कों में प्रतिरक्षा क्षमता को मजबूत करना और इन टीका-निवारणीय रोगों से जुड़ी रुग्णता और मृत्यु दर को कम करना है।
टीके का महत्व
- व्यापक रोग सुरक्षा: TT टीके को Td से बदलना टिटनेस और डिप्थीरिया के विरुद्ध दोहरी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जो डिप्थीरिया के प्रति कम होती प्रतिरक्षा की समस्या का समाधान करता है और किशोरों एवं वयस्कों में रुग्णता और मृत्यु दर को कम करता है।
- जीवनचक्र टीकाकरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा: Td टीका एक ‘जीवनचक्र टीकाकरण दृष्टिकोण’ का समर्थन करता है, जो बचपन के बाद भी, विशेष रूप से किशोरों, वयस्कों और गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- यह डिप्थीरिया के पुनरुत्थान को रोकने के साथ-साथ मातृ और नवजात टिटनेस उन्मूलन को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे भारत की दीर्घकालिक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है।
- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) का विस्तार: UIP में एकीकरण से सालाना लाखों लाभार्थियों को सुरक्षा मिलेगी, जिससे जनसंख्या की प्रतिरक्षा में सुधार होगा और जीवनचक्र टीकाकरण के माध्यम से भारत के टीकाकरण ढांचे को मजबूती मिलेगी।
- साक्ष्य-आधारित नीतिगत बदलाव: यह परिवर्तन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों (2006, 2017 में पुन: पुष्टि) और भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) के मार्गदर्शन के अनुरूप है, जो विज्ञान-संचालित और वैश्विक स्तर पर संरेखित टीकाकरण रणनीति को दर्शाता है।
- स्वदेशी टीका में आत्मनिर्भरता: घरेलू विनिर्माण स्वास्थ्य संप्रभुता को बढ़ाता है, आयात निर्भरता को कम करता है और स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स में आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाता है।
- सार्वजनिक क्षेत्र के टीका निर्माण का सुदृढ़ीकरण: CRI की भूमिका सार्वजनिक क्षेत्र की टीका इकाइयों के पुनरुद्धार को रेखांकित करती है, जो GMP मानकों के तहत गुणवत्ता-आश्वासित टीकों का उत्पादन करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करती है और दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
- वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व: यह पहल एक अग्रणी वैश्विक टीका आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को पुष्ट करती है, जो ‘वैक्सीन मैत्री’ जैसे पिछले प्रयासों पर आधारित है और वैश्विक स्वास्थ्य लचीलेपन में इसकी भूमिका को सुदृढ़ करती है।
