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सामान्य अध्ययन-1: अठारहवीं सदी के मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास — महत्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व और विषय।

संदर्भ: 11 फरवरी 2026 को भारत के प्रधानमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • श्रद्धांजलि अर्पित करने के दौरान सार्वजनिक जीवन में उनके वैचारिक योगदान, विशेष रूप से उनके एकात्म मानववाद दर्शन और समाज के अंतिम व्यक्ति यानी अंत्योदय के उत्थान पर उनके प्रभाव का स्मरण किया गया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बारे में

जन्म और आरंभिक जीवन:

  • उनका जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था।
  • अल्पायु में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया और उनका पालन-पोषण उनके मामा ने किया।
  • वे शिक्षा प्राप्त करने में अग्रणी रहे और अपने अध्ययनकाल के दौरान उन्हें छात्रवृत्तियां मिलीं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबंध:

  • कानपुर के सनातन धर्म कॉलेज में अपने विद्यार्थी जीवन के दौरान, वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आए।
  • 1942 में, उन्होंने एक पारंपरिक व्यावसायिक करियर बनाने के बजाय स्वयं को आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक (संगठक) के रूप में समर्पित करने का विकल्प चुना।

राजनीतिक जीवन:

  • 1951 में, जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, तब दीनदयाल उपाध्याय इसकी उत्तर प्रदेश इकाई के पहले महासचिव बने।
  • बाद में उन्होंने अखिल भारतीय महासचिव के रूप में कार्य किया और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1953 में डॉ. मुखर्जी का निधन होने के बाद, उन्होंने लगभग पंद्रह वर्षों तक पार्टी के विस्तार का नेतृत्व किया।
  • दिसंबर 1967 में, वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष चुने गए।
  • 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय रेलवे स्टेशन (अब दीनदयाल उपाध्याय नगर) के समीप रहस्यमयी परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई।

प्रमुख कार्य और बौद्धिक योगदान

एकात्म मानववाद:

  • यह उनका मूल दार्शनिक सिद्धांत था, जिसे 1965 में व्याख्यानों की एक श्रृंखला में प्रस्तुत किया गया था।
  • उन्होंने भारतीय संस्कृति में रचे-बसे एक स्वदेशी सामाजिक-आर्थिक मॉडल का प्रस्ताव रखा।
  • उन्होंने पश्चिमी पूंजीवाद और मार्क्सवादी समाजवाद, दोनों को नकार दिया।
  • यह दर्शन चार पुरुषार्थों — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पर आधारित है, जो समग्र मानव विकास पर बल देता है।

अन्य रचनाएँ:

  • पॉलिटिकल डायरी: समकालीन राजनीति पर उनके विचार।
  • द टू प्लान्स: भारत की पंचवर्षीय योजनाओं की आलोचना।
  • ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर रचनाएं जैसे कि सम्राट चंद्रगुप्त और आदि शंकराचार्य।
  • राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार के लिए वे राष्ट्र धर्म, पाञ्चजन्य और स्वदेश जैसे प्रकाशनों से जुड़े रहे।

दार्शनिक दृष्टिकोण:

  • अंत्योदय की वकालत की— जिसका अर्थ है शासन के मानक के रूप में समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण।
  • भौतिक प्रगति और आध्यात्मिक मूल्यों के बीच संतुलन पर बल दिया।
  • एक विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था का समर्थन किया, जिसमें ग्राम, शासन की आधारभूत इकाई हो।
  • आत्मनिर्भरता और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप आर्थिक नीतियों को बढ़ावा दिया।

विरासत और समकालीन प्रासंगिकता

  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचार के प्रमुख विचारकों में से एक माना जाता है।
  • उनका एकात्म मानववाद दर्शन आज भी नीतिगत चर्चाओं को प्रभावित करता है, विशेष रूप से समावेशी विकास, विकेंद्रीकरण और नैतिक शासन पर बहसों में।
  • उनका जीवन संगठनात्मक कार्य समर्पण, वैचारिक स्पष्टता और ‘राष्ट्र-प्रथम’ की राजनीति के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

Sources.
E Gyankosh
PM India

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