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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: हाल ही में, भारत के रक्षा मंत्री और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पुट्टपार्थी, आंध्र प्रदेश में एक विशाल एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) रक्षा बुनियादी ढांचा परियोजना का शिलान्यास, जो भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह परियोजना “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” पहलों के तहत रक्षा स्वदेशीकरण, आत्मनिर्भरता और उन्नत एयरोस्पेस विनिर्माण की दिशा में भारत के व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में शुरू की गई है।
  • ऐसा माना जा रहा है कि बेंगलुरु के स्थापित एयरोस्पेस इकोसिस्टम के निकट होने के कारण यह परियोजना पुट्टपार्थी को एक प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण केंद्र में बदल सकती है।
  • AMCA परियोजना के साथ-साथ, आंध्र प्रदेश के रामबिल्ली में एक नौसेना प्रणाली विनिर्माण सुविधा का भी शिलान्यास किया गया है, जो भारत के रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम में इस राज्य की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

  • AMCA रक्षा बुनियादी ढांचा परियोजना का अनुमानित कुल परिव्यय लगभग ₹15,000 करोड़ है और इसे आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले में विकसित किया जा रहा है।
  • इस परियोजना का एक प्रमुख घटक वैमानिकी विकास एजेंसी का ‘कोर इंटीग्रेशन एंड फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर’ है, जिसे लगभग ₹2,000 करोड़ की अनुमानित लागत से पुट्टपार्थी में स्थापित किया जा रहा है।
  • इस परियोजना से एयरोस्पेस विनिर्माण, एविओनिक्स, परीक्षण, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों में महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों के साथ-साथ लगभग 7,500 प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होने की उम्मीद है।
  • यह सुविधा उन्नत एविओनिक्स, स्टील्थ तकनीक, आंतरिक हथियार कक्ष और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान के एकीकरण, परीक्षण और भविष्य के विकास में सहायता प्रदान करेगी।

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के बारे में

  • AMCA भारतीय वायु सेना के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित किया जा रहा भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान कार्यक्रम है।
    • यह कार्यक्रम लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस कार्यक्रम से प्राप्त तकनीकी अनुभव पर आधारित है।
  • पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान आम तौर पर उन्नत स्टील्थ, सुपरक्रूज क्षमता, सेंसर फ्यूजन, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणालियों, एकीकृत एविओनिक्स और बहु-भूमिका वाले लड़ाकू कौशल को एक ही प्लेटफॉर्म में एकीकृत करते हैं।
  • AMCA को एक 25-टन वाले ट्विन-इंजन स्टील्थ विमान के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसमें रडार की पकड़ में न आने की उन्नत क्षमता, आंतरिक हथियार कक्ष, उन्नत एविओनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियाँ और लगभग 6.5 टन की गुप्त आंतरिक ईंधन क्षमता जैसी उन्नत विशेषताएं शामिल हैं।
  • AMCA Mk1 संस्करण को अमेरिकी मूल के GE F414 इंजन (लगभग 98 kN थ्रस्ट वर्ग) द्वारा संचालित करने का प्रस्ताव है, जबकि अधिक उन्नत AMCA Mk2 संस्करण के लिए 110–120 kN वर्ग के इंजन का उपयोग करने की योजना है, जिसे भारत के गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (GTRE) और फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी सैफ्रान के बीच सहयोग के माध्यम से विकसित किया जा रहा है।
  • हाल के घटनाक्रम:
    • भारत और अमेरिका ने भारत में GE F414 लड़ाकू जेट इंजनों के सह-उत्पादन के लिए समझौतों को अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है, जो कथित तौर पर विनिर्माण इकोसिस्टम के लगभग 80% हिस्से को कवर करता है।

AMCA का महत्व

  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: यह कार्यक्रम आयातित लड़ाकू विमानों पर निर्भरता कम करने और उन्नत एयरोस्पेस डिजाइन, एविओनिक्स, स्टील्थ प्रणालियों तथा रक्षा विनिर्माण में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  • स्वदेशी एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र का विकास: AMCA कार्यक्रम से भारत में घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D), उन्नत सामग्री विनिर्माण, एविओनिक्स विकास, परीक्षण बुनियादी ढांचे और उच्च स्तरीय एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
  • भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करना: AMCA के शामिल होने से भारतीय वायु सेना को अपनी स्वीकृत 42 लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या के करीब पहुँचने और दीर्घकालिक परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
  • सार्वजनिक-निजी सहयोग को सुदृढ़ करना: यह परियोजना सार्वजनिक और निजी उद्योगों को शामिल करने वाले सहयोगात्मक निष्पादन मॉडल के माध्यम से भारत के रक्षा एयरोस्पेस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी के एक महत्वपूर्ण विस्तार को चिह्नित करती है।

SOURCES
PIB
Economic Time
The Hindu

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