भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS-IV)

संदर्भ: हाल ही में, विदेश मंत्री (EAM) ने नई दिल्ली में चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS-IV) के लिए लोगो (प्रतीक चिन्ह), विषय (थीम) और आधिकारिक वेबसाइट का अनावरण किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • भारत, अफ्रीकी संघ आयोग के सहयोग से 31 मई 2026 को नई दिल्ली में चौथे भारत-अफ्रीका फोरमशिखर सम्मेलन (IAFS-IV) की मेजबानी करेगा।
  • यह शिखर सम्मेलन “IA SPIRIT: नवाचार, लचीलापन और समावेशी परिवर्तन के लिए भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी” विषय के अंतर्गत आयोजित किया जाएगा, जो भारत-अफ्रीका साझेदारी की व्यापक प्रकृति को दर्शाता है।

भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन (IAFS) के विषय में

  • भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS) भारत और अफ्रीकी देशों के बीच उच्च स्तरीय जुड़ाव का एक प्रमुख मंच है, जिसका शुभारंभ वर्ष 2008 में किया गया था।
  • व्यापार, निवेश, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी और विकास साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए इसका आयोजन समय-समय पर किया जाता है।
  • अब तक तीन शिखर सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं:
    • IAFS-I (2008, नई दिल्ली)
    • IAFS-II (2011, अदीस अबाबा)
    • IAFS-III (2015, नई दिल्ली) — यह सबसे बड़ा सम्मेलन था, जिसमें सभी 54 अफ्रीकी देशों ने भाग लिया था।
  • यह शिखर सम्मेलन दक्षिण-दक्षिण सहयोग, पारस्परिक सम्मान और मांग-आधारित विकास साझेदारी के सिद्धांतों पर आधारित है।

भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन (IAFS) का महत्व

  • दक्षिण-दक्षिण सहयोग का सुदृढ़ीकरण: IAFS पारस्परिक सम्मान, समानता और साझा विकासात्मक प्राथमिकताओं के आधार पर भारत और अफ्रीकी देशों के बीच दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।
  • रणनीतिक जुड़ाव में वृद्धि: यह शिखर सम्मेलन अफ्रीका में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को सशक्त बनाता है, विशेष रूप से इस क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में।
  • जन-केंद्रित और क्षमता निर्माण पर फोकस: छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कौशल विकास जैसी पहलों के माध्यम से, IAFS मानव संसाधन विकास और दीर्घकालिक संस्थागत संबंधों को संवर्धित करता है।
  • विकास दृष्टिकोणों का संरेखण: यह साझेदारी सतत विकास को बढ़ावा देने हेतु भारत के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को अफ्रीका के “एजेंडा 2063” के साथ संरेखित करती है।

सीमा सड़क संगठन के प्रोजेक्ट दंतक (DANTAK) ने अपना 66वाँ स्थापना दिवस मनाया

संदर्भ: सीमा सड़क संगठन (BRO) की एक प्रमुख विदेशी परियोजना, प्रोजेक्ट दंतक, ने भूटान में अपना 66वाँ स्थापना दिवस मनाया।

प्रोजेक्ट दंतक के बारे में

  • प्रोजेक्ट दंतक की स्थापना वर्ष 1961 में भूटान के बुनियादी ढांचे के विकास में सहायता के लिए भारत की एक विशेष पहल के रूप में की गई थी।
  • यह बीआरओ की सबसे पुरानी विदेशी परियोजना है, जिसका मुख्यालय दियोथांग (भूटान) में स्थित है।
  • यह भूटान में 1,500 किलोमीटर से अधिक सड़कों और कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण और रखरखाव के लिए उत्तरदायी है, जिसमें भूटान का पूर्व-पश्चिम राजमार्ग भी शामिल है।
  • यह भारत और भूटान के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेष रूप से सीमावर्ती और सुदूर क्षेत्रों में।
  • पिछले कुछ वर्षों में, इसने भूटान में स्थानीय समुदायों के लिए क्षमता निर्माण और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सीमा सड़क संगठन (BRO) के विषय में

  • सीमा सड़क संगठन (BRO) की स्थापना भारत के सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव के लिए 7 मई 1960 को की गई थी।
  • इसका ध्येय वाक्य “श्रमेण सर्वं साध्यम्” (परिश्रम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है) है।
  • यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और रक्षा तैयारियों तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कनेक्टिविटी (संपर्क) बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाता है।
  • बीआरओ न केवल भारत में बल्कि पड़ोसी देशों जैसे भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान में भी परियोजनाएं संचालित करता है, जो भारत की क्षेत्रीय पहुंच को दर्शाता है।
  • यह ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों, रेगिस्तानों और घने जंगलों जैसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण भू-भागों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जाना जाता है।

गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार 2026

संदर्भ: गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार 2026, जिसे प्रायः “ग्रीन नोबेल पुरस्कार” के रूप में भी जाना जाता है, विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के छह जमीनी स्तर के पर्यावरण कार्यकर्ताओं को प्रदान किया गया।

पुरस्कार विजेता एवं उनके कार्य

  • युवेलिस मोरालेस ब्लैंको (कोलंबिया): इन्होंने मैग्डालेना नदी के किनारे ‘हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग’ (फ्रैकिंग) परियोजनाओं के विरुद्ध सामुदायिक प्रतिरोध का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप उन परियोजनाओं को निलंबित कर दिया गया।
  • सारा फिंच (यूनाइटेड किंगडम): इन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से एक ऐतिहासिक निर्णय प्राप्त किया, जिसमें जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं के लिए उनके पूर्ण जलवायु प्रभाव का लेखा-जोखा देना अनिवार्य कर दिया गया। इसने पर्यावरण कानून को एक नया स्वरूप प्रदान किया है।
  • अलन्ना अकाक हर्ले (संयुक्त राज्य अमेरिका): इन्होंने एक गठबंधन का नेतृत्व किया जिसने ‘पेबल माइन’ परियोजना को रुकवा दिया, जिससे अलास्का के विशाल सैल्मन पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा हुई।
  • बोरिम किम (दक्षिण कोरिया): इन्होंने एशिया का पहला युवाओं के नेतृत्व वाला संवैधानिक जलवायु मामला जीता, जिसने सरकार को उत्सर्जन में कटौती के और अधिक कड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए बाध्य किया।
  • थियोनिला रोका मैटबब (पापुआ न्यू गिनी): इन्होंने खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘रियो टिंटो’ को पंगुना खदान से हुए पर्यावरणीय नुकसान की जिम्मेदारी लेने के लिए विवश किया।
  • इरोरो तांशी (नाइजीरिया): इन्होंने लुप्तप्राय चमगादड़ों के आवासों और वर्षावन पारिस्थितिक तंत्र को जंगल की आग से बचाने के लिए सामुदायिक कार्रवाई का नेतृत्व किया।

गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार के बारे में

  • गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार, जिसे अक्सर “ग्रीन नोबेल” कहा जाता है, जमीनी स्तर के पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए विश्व का सबसे बड़ा पुरस्कार है। इसका संचालन गोल्डमैन एनवायर्नमेंटल फाउंडेशन द्वारा किया जाता है।
  • परोपकारी रिचर्ड और रोडा गोल्डमैन ने पर्यावरणीय समस्याओं की अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति को उजागर करने और व्यक्तिगत नेतृत्व के माध्यम से वैश्विक कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए वर्ष 1989 में इस पुरस्कार की स्थापना की थी।
  • यह पुरस्कार प्रतिवर्ष छह महाद्वीपीय क्षेत्रों—एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण एवं मध्य अमेरिका और द्वीप एवं द्वीप राष्ट्रों में से प्रत्येक से एक जमीनी स्तर के पर्यावरण नेता को मान्यता प्रदान करता है।
  • विजेताओं का चयन एक अंतर्राष्ट्रीय निर्णायक मंडल (जूरी) द्वारा किया जाता है और प्रत्येक विजेता को $200,000 अमेरिकी डॉलर की राशि दी जाती है।

अत्यधिक गर्मी से वैश्विक खाद्य प्रणाली को खतरा  

संदर्भ: खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा संयुक्त रूप से जारी “अत्यधिक गर्मी और कृषि” शीर्षक वाली रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ता तापमान वैश्विक कृषि और ग्रामीण आजीविका के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • अत्यधिक गर्मी को “जोखिम गुणक” के रूप में वर्णित किया गया है, जो सूखे, जल संकट, जंगलों की आग और कीटों के प्रकोप को और अधिक गंभीर बना देती है, जिससे कृषि सुभेद्यता बढ़ जाती है।
  • दक्षिण एशिया, उप-सहारा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों जैसे गर्म क्षेत्रों में, सुरक्षित कृषि कार्य के लिए अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या इस शताब्दी के अंत तक बढ़कर ~250 दिन प्रति वर्ष हो सकती है।
  • कृषि श्रमिक सर्वाधिक सुभेद्य समूहों में से हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण वैश्विक स्तर पर श्रम उत्पादकता और कार्य घंटों का भारी नुकसान हो रहा है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, ~30°C से अधिक तापमान होने पर फसल की पैदावार कम हो जाती है, जबकि ~25°C से ऊपर विभिन्न पशुधन ‘ऊष्मा तनाव’  का अनुभव करते हैं, जिससे खाद्य उत्पादन प्रणालियाँ प्रभावित होती हैं।
  • कृषि-खाद्य प्रणालियों पर निर्भर 1 बिलियन से अधिक लोग बढ़ते ताप तनाव और पारिस्थितिक तंत्र के व्यवधान के कारण जोखिम में हैं।

खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के विषय में

  • FAO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी। इसका मुख्यालय रोम, इटली में स्थित है।
  • इसके 194 सदस्य देश हैं, साथ ही यूरोपीय संघ एक सदस्य संगठन के रूप में शामिल है।
  • FAO नीतिगत समर्थन, तकनीकी सहायता और अनुसंधान के माध्यम से भूख को समाप्त करने, पोषण में सुधार करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है।
  • प्रमुख रिपोर्ट/सूचकांक:
    • विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति (SOFI)
    • खाद्य और कृषि की स्थिति (SOFA)
    • खाद्य मूल्य सूचकांक (FFPI)
    • वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (GFRA)

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के विषय में

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की स्थापना वर्ष 1950 में हुई थी और इसका मुख्यालय जेनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
  • यह वैश्विक स्तर पर पूर्व चेतावनी प्रणाली, जलवायु सेवाएँ और आपदा जोखिम न्यूनीकरण सहायता प्रदान करता है।
  • प्रमुख रिपोर्ट/पहल:
    • स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट
    • ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन
    • ग्लोबल एनुअल टू डिकेडल क्लाइमेट अपडेट

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