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सामान्य अध्ययन-2: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच – उनकी संरचना, अधिदेश; भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।

संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 20–21 जुलाई 2026 को आयोजित वैश्विक सड़क सुरक्षा में सुधार पर उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान वैश्विक सड़क सुरक्षा में सुधार संबंधी प्रगति घोषणापत्र को अपनाया। यह घोषणा सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु एवं चोटों में कमी लाने के लिए वैश्विक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह घोषणा सड़क सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्य दशक (2021–2030) के प्रभावी एवं तीव्र क्रियान्वयन को बढ़ावा देने का प्रयास करती है, ताकि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली वैश्विक मृत्यु एवं चोटों में 50% की कमी लाने के SDG लक्ष्य 3.6 को प्राप्त किया जा सके।
  • इसमें देशों से सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण के माध्यम से सड़क सुरक्षा शासन, वित्तपोषण, साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया गया है।
  • यह घोषणा वैश्विक सड़क सुरक्षा में सुधार संबंधी 2022 की राजनीतिक घोषणा तथा मराकेश घोषणा (2025) सहित पूर्व की वैश्विक प्रतिबद्धताओं पर आधारित है।

घोषणा के प्रमुख विशेषताएँ

  • 2030 का वैश्विक लक्ष्य: 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली वैश्विक मृत्यु एवं चोटों में कम-से-कम 50% की कमी लाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है, जिसके लिए मापनीय राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित करने पर बल दिया गया है।
  • राष्ट्रीय प्रमुख सड़क सुरक्षा एजेंसी: देशों से ऐसी राष्ट्रीय प्रमुख सड़क सुरक्षा एजेंसी स्थापित अथवा नामित करने का आह्वान किया गया है, जिसके पास कानूनी अधिकार, जवाबदेही तथा सतत वित्तपोषण हो, ताकि वह सड़क सुरक्षा प्रयासों का समन्वय कर सके।
  • राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा रणनीति: देशों को स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमा, बजट एवं जवाबदेही वाली वित्तपोषित राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा रणनीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिसमें इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा एवं आपातकालीन देखभाल शामिल हों।
  • सुरक्षित प्रणाली एवं बहुआयामी दृष्टिकोण: सुरक्षित गति प्रबंधन, सुरक्षित सड़क एवं भूमि उपयोग डिज़ाइन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त वाहन सुरक्षा मानकों, सुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता व्यवहार, प्रभावी दुर्घटना-उपरांत देखभाल तथा साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा दिया गया है।
  • सुरक्षित एवं समावेशी गतिशीलता: सुरक्षित, किफायती एवं सुलभ सार्वजनिक परिवहन, संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा तथा सड़क सुरक्षा को सतत परिवहन, शहरी नियोजन एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में एकीकृत करने पर बल दिया गया है।

वैश्विक सड़क सुरक्षा रूपरेखा

  • सड़क सुरक्षा की स्थिति
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष लगभग 11.6 लाख लोगों की मृत्यु होती है तथा लगभग 5 करोड़ लोग घायल होते हैं। यह 5–29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में मृत्यु का प्रमुख कारण है।
    • वैश्विक सड़क दुर्घटना मृत्यु का लगभग 92% निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में होता है, जबकि कुल मृतकों में आधे से अधिक संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ता होते हैं। इनमें मोटरसाइकिल सवार वैश्विक मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं।
    • विश्वभर में एक अरब से अधिक अतिरिक्त वाहन जुड़ने के बावजूद, 2011 से 2025 के बीच सड़क दुर्घटना मृत्यु दर में 21% की कमी आई है, जो प्रगति को दर्शाती है, लेकिन तेज़ कार्रवाई की आवश्यकता भी बताती है।
  • प्रमुख वैश्विक पहल:
    • ब्रासीलिया सड़क सुरक्षा घोषणा (2015): राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीतियों को मजबूत करने तथा सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु एवं चोटों में कमी लाने का आह्वान किया।
    • सड़क सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्य दशक (2021–2030): यह एक वैश्विक रूपरेखा है, जो सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, ताकि 2030 तक सड़क दुर्घटना मृत्यु एवं चोटों में 50% की कमी का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
    • वैश्विक सड़क सुरक्षा में सुधार संबंधी राजनीतिक घोषणा (2022): सदस्य देशों की सड़क सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन में तेजी लाने की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
    • मराकेश घोषणा (2025): इसे सड़क सुरक्षा पर चौथे वैश्विक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में अपनाया गया, जिसने 2030 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को दोहराया।

भारत में सड़क सुरक्षा

  • वर्तमान स्थिति
    • भारत में आज भी विश्व में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु की संख्या सबसे अधिक देशों में शामिल है। वर्ष 2025 में 5.1 लाख सड़क दुर्घटनाओं में 1.8 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई, अर्थात् प्रतिदिन लगभग 502 मौतें हुईं।
    • अत्यधिक गति (Overspeeding) सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनी हुई है, जबकि पैदल यात्री, साइकिल चालक एवं दोपहिया वाहन चालक सड़क दुर्घटना मृतकों का बड़ा हिस्सा हैं।

प्रमुख पहल

  • मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019: कठोर दंड, बेहतर वाहन सुरक्षा मानकों एवं प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से सड़क सुरक्षा नियमों को सुदृढ़ करता है।
  • 4E रणनीति: भारत सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा एवं आपातकालीन देखभाल (4E) पर आधारित समन्वित दृष्टिकोण अपनाता है।
  • पीएम राहत (सड़क दुर्घटना हेल्पलाइन और सहायक प्रौद्योगिकी) एवं कैशलेस उपचार योजना: देशव्यापी दुर्घटना हेल्पलाइन, त्वरित बचाव समन्वय तथा गोल्डन ऑवर के दौरान सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार के माध्यम से आपातकालीन प्रतिक्रिया को बढ़ावा देती है।
  • गुड समैरिटन दिशानिर्देश: सड़क दुर्घटना पीड़ितों की स्वेच्छा से सहायता करने वाले व्यक्तियों को कानूनी एवं प्रक्रियागत परेशानियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे समय पर चिकित्सा सहायता को प्रोत्साहन मिलता है।
  • ब्लैक स्पॉट सुधार कार्यक्रम: दुर्घटना-प्रवण सड़क खंडों की पहचान कर लक्षित इंजीनियरिंग उपायों के माध्यम से उनमें सुधार किया जाता है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।

Sources:
Press
Cdn
Timeofindia
Pib

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