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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; केंद्र और राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति-संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं।

संदर्भ: हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने ‘कैंसर पर वैश्विक स्थिति रिपोर्ट 2026’ जारी की है, जो कैंसर की रोकथाम, निदान और उपचार में वैश्विक प्रगति और कमियों का एक व्यापक आकलन प्रदान करती है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह रिपोर्ट WHO और IARC द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है। यह 2010 से कैंसर नियंत्रण के क्षेत्र में रोकथाम, शीघ्र पता लगाने, निदान, उपचार, उत्तरजीविता और उपशामक देखभाल के स्तर पर हुई वैश्विक प्रगति की समीक्षा करती है।
  • इसमें कैंसर से प्रभावित लोगों के WHO के पहले वैश्विक सर्वेक्षण के निष्कर्षों को शामिल किया गया है, जो कैंसर नीति चर्चाओं में रोगियों और देखभाल करने वालों के अनुभवों को सामने लाता है।
  • यह रिपोर्ट देशों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) के अनुरूप एक अधिक न्यायसंगत और जन-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण रणनीतियों को मजबूत करने में सहायता करने का प्रयास करती है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • कैंसर का वैश्विक बोझ बढ़ रहा है: कैंसर विश्व स्तर पर मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण बना हुआ है, जिसमें प्रतिवर्ष 2.06 करोड़ (20.6 मिलियन) नए मामले सामने आते हैं और लगभग 10 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है। अनुमान है कि 2050 तक वार्षिक मामले बढ़कर लगभग 35 मिलियन हो जाएंगे।
  • महत्वपूर्ण क्षेत्रीय विषमताएँ: 2024 में, वैश्विक कैंसर मामलों में 50.7% और मौतों में 56.5% हिस्सेदारी अकेले एशिया की थी। वहीं, यूरोप की विश्व जनसंख्या में मात्र 9% भागीदारी होने के बावजूद, वैश्विक कैंसर मामलों में उसका योगदान 21% और मौतों में 20% रहा।
  • कैंसर के परिणाम अत्यधिक असमान: उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर से पाँच साल जीवित रहने की दर 87% है, जबकि निम्न आय वाले देशों में यह मात्र 42% है, जो स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच में भारी अंतर को दर्शाता है।
  • फेफड़ों का कैंसर सबसे घातक: फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है।
    • पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर सबसे आम हैं, जबकि महिलाओं में स्तन, फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर मामलों के एक बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।
  • नीति और अनुसंधान प्रयासों का विस्तार: राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण योजनाओं वाले देशों की संख्या 2010 में 50% थी, जो 2026 में बढ़कर 82% हो गई है। इसके अतिरिक्त, 2005 और 2021 के बीच पंजीकृत कैंसर नैदानिक परीक्षणों में प्रतिवर्ष 7.3% की वृद्धि हुई है।
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) में सीमित एकीकरण: एक-तिहाई से भी कम देशों ने अपने UHC पैकेज में व्यापक कैंसर देखभाल को शामिल किया है, जिससे कई लोग आवश्यक सेवाओं तक पहुँच से वंचित रह जाते हैं।
  • भारी सामाजिक और आर्थिक लागत: कैंसर से प्रभावित 45% व्यक्ति वित्तीय कठिनाई का सामना करते हैं, आधे से अधिक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का अनुभव करते हैं, और लगभग सभी देखभाल करने वालों ने भारी मानसिक और शारीरिक दबाव के बारे में सूचित किया है।

भारत के लिए निहितार्थ

  • कैंसर के बढ़ते मामले: चूंकि एशिया में वैश्विक कैंसर मामलों और मौतों का आधे से अधिक हिस्सा है, इसलिए जनसंख्या के उम्रदराज होने, शहरीकरण और जीवनशैली में बदलाव के कारण भारत में कैंसर के बोझ में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
  • रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करना: कैंसर के दस में से लगभग चार मामलों को रोका जा सकता है, इसलिए भारत को तंबाकू नियंत्रण, एचपीवी (HPV) टीकाकरण, हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित हस्तक्षेपों को व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं को दूर करना: स्क्रीनिंग, निदान, रेडियोथेरेपी, ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों और आवश्यक दवाओं तक पहुँच में बनी हुई कमियाँ इस बात की ओर इशारा करती हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में अधिक न्यायसंगत कैंसर-देखभाल अवसंरचना की आवश्यकता है।
  • वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाना: यह निष्कर्ष कि प्रभावित व्यक्तियों में से 45% लोग वित्तीय कठिनाई का सामना करते हैं, जेब से होने वाले खर्च को कम करने और कैंसर रोगियों के लिए वित्तीय सहायता को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

प्रमुख अनुशंसाएँ

  • रोकथाम को प्राथमिकता देना: तंबाकू नियंत्रण, एचपीवी (HPV) और हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और पर्यावरणीय जोखिम कारकों को कम करने के उपायों को व्यापक स्तर पर लागू करें।
  • शीघ्र पता लगाने और उपचार को बढ़ावा देना: स्क्रीनिंग, नैदानिक सेवाओं, रेडियोथेरेपी सुविधाओं और आवश्यक कैंसर दवाओं तक पहुँच का विस्तार करें, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ ये सुविधाएँ कम हैं।
  • न्यायसंगत और किफायती देखभाल सुनिश्चित करना: व्यापक कैंसर सेवाओं को ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज’ (UHC) के ढांचे में एकीकृत करें और उपचार के लिए वित्तीय बाधाओं को कम करें।
  • जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना: उत्तरजीविता, पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य और उपशामक देखभाल सेवाओं को मजबूत करते हुए रोगियों और उनकी देखभाल करने वालों के दृष्टिकोण को शामिल करें।
  • सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना: सार्वजनिक-निजी भागीदारी, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और कैंसर अनुसंधान, नवाचार एवं स्वास्थ्य-प्रणाली की क्षमता में निवेश को प्रोत्साहित करें।
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