संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन–2: गरीबी एवं भूख से संबंधित विषय।

सामान्य अध्ययन–3: समावेशी विकास एवं उससे संबंधित विषय।

संदर्भ: विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार, भारत में गरीबी दर वर्ष 2011 के 57.7% से घटकर वर्ष 2023 में 16.1% रह गई। इससे अनुमानित 49.6 करोड़ लोग निम्न-मध्यम आय वाले देशों के गरीबी मानक से ऊपर आ गए।

विश्व बैंक की पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के बारे में

  • पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ विश्व बैंक द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वसंतकालीन एवं वार्षिक बैठकों के दौरान वर्ष में दो बार प्रकाशित की जाती है।
  • यह 100 से अधिक विकासशील देशों में गरीबी, साझा समृद्धि तथा असमानता की प्रवृत्तियों का देशवार अवलोकन प्रस्तुत करती है।
  • इसमें मौद्रिक गरीबी, बहुआयामी गरीबी, गरीबी के स्तर तथा आय असमानता से संबंधित प्रमुख संकेतक प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • इसमें क्रय शक्ति समता (PPP) पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय गरीबी मानकों का उपयोग किया जाता है:
    • 3.00 डॉलर/दिन: अंतर्राष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी रेखा।
    • 4.20 डॉलर/दिन: निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए गरीबी रेखा।
    • 8.30 डॉलर/दिन: उच्च-मध्यम आय वाले देशों के लिए गरीबी रेखा।
  • इसके अतिरिक्त, गैर-मौद्रिक वंचनाओं तथा आय असमानता का आकलन करने के लिए बहुआयामी गरीबी माप (MPM) और गिनी सूचकांक का भी उपयोग किया जाता है।

विश्व बैंक की पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के प्रमुख निष्कर्ष

  • गरीबी में कमी:
    • निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए गरीबी रेखा (4.20 डॉलर/दिन): वर्ष 2011 के 57.7% से घटकर वर्ष 2023 में 16.1% रह गई। इससे 49.6 करोड़ लोग गरीबी के इस मानक से ऊपर आ गए।
    • अत्यधिक गरीबी (3 डॉलर/दिन): वर्ष 2011–2023 के दौरान 27.1% से घटकर 2.6% रह गई।
    • उच्च-मध्यम आय वाले देशों के लिए गरीबी रेखा (8.30 डॉलर/दिन): वर्ष 2023 में भारत की 80% जनसंख्या इस मानक से नीचे रही।
    • भारत में विश्व स्तर पर गरीबी में सबसे तेज़ी से कमी दर्ज करने वाले देशों में से एक रहा।
  • बहुआयामी गरीबी में कमी: ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) पर आधारित गरीबी दर वर्ष 2005–06 के 53.8% से घटकर वर्ष 2019–21 में 16.4% रह गई।
    • विश्व बैंक का बहुआयामी गरीबी माप (MPM) वर्ष 2022–23 में 15.5% रहा।
  • गरीबी में कमी के प्रमुख कारक: उपभोग, घरेलू आय तथा रोजगार में वृद्धि, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के बीच।
    • खाद्य सब्सिडी सहित सामाजिक सहायता के अंतरण का विस्तार।
    • वर्ष 2022 में 99% आबादी तक बिजली की पहुँच सुनिश्चित हुई।
  • रोजगार एवं श्रम बाजार की प्रवृत्तियाँ: वर्ष 2017–2023 के दौरान रोजगार में 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई, जो कामकाजी आयु वाली आबादी की वृद्धि से लगभग दोगुनी थी।
    • वैतनिक रोजगार में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
    • वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी दर 14.6% से बढ़कर 15.9% हो गई, विशेष रूप से ग्रामीण युवा महिलाओं में।
    • वास्तविक आय में व्यापक रूप से कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि रोजगार का संकेंद्रण कम उत्पादकता वाली गतिविधियों में बना रहा।
  • मजदूरी में असमानता एवं संवेदनशील परिवार: वर्ष 2023 में शीर्ष 10% श्रमिकों की औसत आय, निचले 10% श्रमिकों की औसत आय से 13 गुना अधिक थी।
    • वर्ष 2023 में भारत का गिनी सूचकांक 23.0 रहा।
    • गरीबी अब उन परिवारों में अधिक केंद्रित होती जा रही है, जहाँ शिक्षा का स्तर निम्न है, परिसंपत्तियाँ कम हैं, स्थिर रोजगार तक सीमित पहुँच है तथा आश्रितों का अनुपात अधिक है।
  • गरीबी का क्षेत्रीय एवं सामाजिक वितरण:
    • ग्रामीण–शहरी गरीबी: वर्ष 2023 में ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर 19.3% जबकि शहरी क्षेत्रों में 8.6% थी।
    • शैक्षणिक उपलब्धि: 16 वर्ष या उससे अधिक आयु के अशिक्षित लोगों में गरीबी दर 21.3% थी, जबकि उच्च शिक्षा/माध्यमिक शिक्षा के बाद की शिक्षा प्राप्त लोगों में यह 7.4% थी।
    • ग्रामीण भारत में गरीबी में अपेक्षाकृत तेज़ी से कमी दर्ज की गई, जिससे ग्रामीण–शहरी गरीबी अंतर कम हुआ।
    • उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक का भौगोलिक क्षेत्र भारत की कुल गरीब आबादी का 57% हिस्सा रखता है।
  • भविष्य में गरीबी का अनुमान: 4.20 डॉलर/दिन के गरीबी मानक पर गरीबी दर में निम्नलिखित कमी का अनुमान है:
    • 2026: 14.2%
    • 2028: 12.1%
    • ये माइक्रोसिमुलेशन (Microsimulation) पर आधारित सांकेतिक अनुमान हैं। नए श्रम-बाजार एवं आर्थिक आँकड़े उपलब्ध होने पर इनमें संशोधन किया जा सकता है।
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