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सामान्य अध्ययन-2: भारतीय संविधान—विशेषताएँ, संशोधन ,महत्वपूर्ण प्रावधान; स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।

संदर्भ: पंचायती राज मंत्रालय ने 24 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (NPRD) मनाया।

अन्य संबंधित जानकारी

• यह दिवस भारत में विकेंद्रीकृत शासन, जमीनी स्तर के लोकतंत्र और सहभागी विकास के महत्व को रेखांकित करता है।

• इस अवसर का एक प्रमुख आकर्षण पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI)–2.0 का शुभारंभ था, जिसका उद्देश्य पंचायतों के प्रदर्शन की निगरानी और मूल्यांकन में सुधार करना है।

• सरकार ने सशक्त स्थानीय निकायों के माध्यम से “विकसित भारत @ 2047” के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें अंतिम छोर तक सेवा वितरण पर बल दिया गया।

पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI)–2.0 के बारे में 

• पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) एक संयुक्त सूचकांक है जिसे अनेक विकास संकेतकों के आधार पर ग्राम पंचायतों (GPs) के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए तैयार किया गया है।

• इसके अंतर्गत, संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों को 9 विषयगत स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (LSDGs) में परिवर्तित किया गया है, जो इस प्रकार हैं:

  • गरीबी मुक्त और उन्नत आजीविका वाली पंचायत
  • स्वस्थ पंचायत
  • बाल-हितैषी पंचायत
  • जल-पर्याप्त पंचायत
  • स्वच्छ और हरित पंचायत
  • आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचे वाली पंचायत
  • सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और सुरक्षित पंचायत
  • सुशासन युक्त पंचायत
  • महिला-हितैषी पंचायत

• संशोधित PAI 2.0 संकेतक ढांचे को युक्तिसंगत बनाता है। इसमें PAI 1.0 के 516 संकेतकों को घटाकर 150 संकेतक कर दिया गया है, जिससे डेटा की गुणवत्ता, रिपोर्टिंग में सुगमता और उपयोगिता में सुधार हुआ है।

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के बारे में 

• 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के लागू होने के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। यह अधिनियम 24 अप्रैल 1993 को प्रभावी हुआ था।

• इस संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया।

  • पंचायतों से संबंधित प्रावधान भारत के संविधान के भाग IX में दिए गए हैं।

• यह दिवस पहली बार 24 अप्रैल 2010 को मनाया गया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा इसकी घोषणा की गई थी।

पंचायती राज प्रणाली के बारे में और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

• यह ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को संदर्भित करती है, जो एक त्रि-स्तरीय संरचना के रूप में व्यवस्थित है: ग्राम पंचायत (GP), ब्लॉक (खंड) पंचायत (BP), और जिला पंचायत (DP)।

• पंचायती राज प्रणाली की जड़ें प्राचीन भारत में मिलती हैं, जहाँ ग्राम सभाएं (सभा और समिति) स्थानीय मामलों का प्रबंधन करती थीं।

• स्वतंत्रता के बाद, विकेंद्रीकृत शासन की आवश्यकता के परिणामस्वरूप बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने अपनी सिफारिशों में त्रि-स्तरीय पंचायती राज संरचना का प्रस्ताव दिया।

• इस प्रणाली को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा औपचारिक रूप से सुदृढ़ किया गया। ध्यातव्य है कि जिसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया और पंचायती राज संस्थाओं को अनिवार्य बना दिया।

• राजस्थान इस प्रणाली को लागू करने वाला पहला राज्य बना। 2 अक्टूबर 1959 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा नागौर जिले के बगदरी गांव में इस व्यवस्था की विधिवत शुरुआत की गई थी।

पंचायती राज प्रणाली के उद्देश्य

• पंचायती राज प्रणाली कुछ मूल उद्देश्यों द्वारा निर्देशित है, जिनका लक्ष्य स्थानीय शासन को सुदृढ़ करना और विकासात्मक परिणामों में सुधार लाना है:

• विकास कार्यक्रमों के नियोजन और कार्यान्वयन में लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

• निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्थानीय समुदायों के प्रति सीधे उत्तरदायी बनाकर जवाबदेही को बढ़ावा देना।

• ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवा वितरण की दक्षता और संवेदनशीलता में सुधार करना।

• स्थानीय संस्थानों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के अधिक लक्षित और प्रभावी कार्यान्वयन को सक्षम बनाना।

• महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों सहित हाशिए पर रहने वाले समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके समावेशी विकास को बढ़ावा देना।

पंचायती राज प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु लागू की गईं पहल 

• ई-ग्राम स्वराज प्लेटफॉर्म: सरकार ने पंचायतों की गतिविधियों के नियोजन, बजट, लेखांकन और निगरानी के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल विकसित किया है। इससे विकास कार्यों की पारदर्शिता, जवाबदेही और रियल-टाइम ट्रैकिंग में सुधार हुआ है।

• ऑडिट ऑनलाइन: ऑडिट ऑनलाइन प्रणाली पंचायत खातों की ऑनलाइन ऑडिटिंग सक्षम बनाती है, जिससे वित्तीय जांच समय पर सुनिश्चित होती है, धन के रिसाव में कमी आती है और जमीनी स्तर पर राजकोषीय अनुशासन को बढ़ावा मिलता है।

• राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA): RGSA के अंतर्गत, सरकार शासन के परिणामों में सुधार के लिए संरचित प्रशिक्षण, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और ज्ञान-साझाकरण की पहलों के माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों के क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करती है।

• स्वामित्व (SVAMITVA) योजना: यह योजना ग्रामीण संपत्तियों के कानूनी स्वामित्व रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए ड्रोन-आधारित मानचित्रण तकनीक का उपयोग करती है, जिससे पंचायतों को बेहतर राजस्व सृजन क्षमताओं के साथ सशक्त बनाया जाता है और भूमि संबंधी विवादों को कम किया जाता है।

SOURCES:
Newsonair
PIB
PIB

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