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संदर्भ: नीति (NITI) आयोग ने हाल ही में भारत में अनुसंधान और विकास (R&D) को सुगम बनाने पर दो रिपोर्ट जारी की हैं, जिनका उद्देश्य देश में एक अधिक कुशल, सहायक और नवाचार-प्रेरित अनुसंधान इकोसिस्टम स्थापित करना है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • यह रिपोर्ट भारत के R&D पारिस्थितिकी तंत्र का एक व्यापक मूल्यांकन प्रदान करती हैं और वित्तपोषण तंत्र, संस्थागत शासन, नियामक ढांचे और अनुसंधान क्षेत्रमें सुधार पर केंद्रित कार्रवाई योग्य सिफारिशों की रूपरेखा तैयार करती हैं।
  • शोधकर्ताओं और संस्थानों को उनकी पूरी क्षमता के साथ कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए, एक अधिक विश्वास-आधारित, परिणाम-उन्मुख और सुविधाजनक वातावरण को अपनाने पर विशेष बल दिया गया है।
  • यह पहल “विकसित भारत” फ्रेमवर्क के तहत भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

रिपोर्टों की मुख्य अंश:

  • ROPE (Removing Obstacles, Promoting Enablers) फ्रेमवर्क: रिपोर्ट में नौकरशाही बाधाओं को दूर करने और अनुसंधान एवं नवाचार के लिए एक सहायक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एक केंद्रीय सुधार रणनीति के रूप में ‘ROPE’ फ्रेमवर्क प्रस्तावित है।
  • लैब-टू-मार्केट” परिवर्तन पर बल: अनुसंधान को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों में बदलने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि शैक्षणिक परिणामों से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों को मूर्त रूप दिया जा सके।
  • वित्तपोषण तंत्र को सुदृढ़ करना: रिपोर्ट में सार्वजनिक निवेश के पूरक के रूप में निजी क्षेत्र और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की अधिक भागीदारी सहित वित्तपोषण के स्रोतों में विविधता लाने की सिफारिश की गई है।
    • रिपोर्ट में ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) / अनुसंधान-राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) कोष का बेहतर लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
  • शासन और नियामक सुधार: अनुसंधान और विकास (R&D) की सुगमता में सुधार के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण, अनुमोदनों में कमी और बेहतर संस्थागत शासन को महत्वपूर्ण बताया गया है।
  • विश्वास-आधारित इकोसिस्टम का निर्माण: रिपोर्ट अनुपालन-के बोझ से जूझ रही प्रणालियों से विश्वास-आधारित ढांचे की ओर बढ़ने की वकालत करती है, जिससे शोधकर्ता प्रशासनिक बोझ के बजाय नवाचार पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

भारत के अनुसंधान और विकास परिदृश्य की स्थिति

  • भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक ज्ञान उत्पादक के रूप में उभरा है, जहाँ अनुसंधान आउटपुट में निरंतर वृद्धि हो रही है और वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत ने अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए 38वां स्थान प्राप्त किया है।
  • हालाँकि, अनुसंधान और विकास पर होने वाला सकल व्यय (GERD) अभी भी कम है, जो जीडीपी (GDP) का लगभग 0.6–0.7% है। यह प्रमुख नवाचार अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।
  • भारत का R&D इकोसिस्टम मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा संचालित है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान कुल R&D का 40% से भी कम है। यह विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बिल्कुल विपरीत है, जहाँ निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 70% से अधिक होती है।
  • इसके अलावा, WIPO विश्व बौद्धिक संपदा संकेतक (WIPI) 2024 रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2023 में 64,480 पेटेंट आवेदनों के साथ वैश्विक स्तर पर 6वें स्थान पर रहा।

भारत के अनुसंधान और विकास इकोसिस्टम की चुनौतियाँ

  • वित्तपोषण और प्रोत्साहन: अनुसंधान एवं विकास (R&D) में कम कुल निवेश, कठोर बजट चक्र और अनुदान वितरण में अत्यधिक देरी के कारण शोधकर्ताओं के लिए मध्यम और दीर्घकालिक परियोजनाओं को जारी रखना कठिन हो जाता है।
  • नौकरशाही और प्रक्रियात्मक बाधाएं: बोझिल खरीद नियम, बहु-स्तरीय अनुमोदन और जोखिम से बचने की अत्यधिक सावधानीपूर्ण प्रवृत्ति वैज्ञानिक उपकरणों और कच्चे माल के आयात को धीमा कर देती है, जिससे परियोजना की समय-सीमा बढ़ जाती है।
  • खंडित इकोसिस्टम: अनुसंधान प्रयोगशालाएं, विश्वविद्यालय और उद्योग अक्सर एक-दूसरे के समानांतर कार्य करते हैं, जहाँ संयुक्त परियोजनाओं, साझा बुनियादी ढांचे और व्यावसायीकरण भागीदारी के लिए औपचारिक तंत्र सीमित हैं।
  • परिवर्तन अंतराल: यद्यपि भारत बड़ी संख्या में शोध पत्र तैयार करता है, लेकिन प्रणाली उन्हें पेटेंट, स्केलेबल उत्पादों और औद्योगिक अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने के लिए संघर्ष करती है, जो कमजोर प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा (IP) प्रबंधन सहायता को दर्शाता है।
  • संस्थागत और सांस्कृतिक बाधाएं: संकाय पर शिक्षण का अत्यधिक भार, व्यावहारिक अनुसंधान के लिए सीमित प्रोत्साहन, और डिजिटल उपकरणों एवं बिग-डेटा-आधारित विज्ञान को अपनाने की धीमी गति कई संस्थानों में नवाचार की संस्कृति को बाधित करती है।

भारत R&D इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने लिए किए गए उपाय

  • संस्थागत सुधार और वित्तपोषण सहायता: अनुसंधान-राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और RDI योजना जैसी पहलों की स्थापना का उद्देश्य वित्तपोषण तंत्र को सुव्यवस्थित करना और विभिन्न विषयों में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
  • नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन: अटल इनोवेशन मिशन और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों ने उद्यमिता और व्यावहारिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करके नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
  • मिशन-मोड अनुसंधान पहल: सरकार ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वच्छ ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में मिशन-आधारित अनुसंधान को प्राथमिकता दी है।
  • डिजिटल और सहयोगात्मक मंच: संस्थानों के बीच सहयोग, डेटा साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और अनुसंधान नेटवर्क विकसित करने के प्रयास किए गए हैं।

आगे की राह

  • R&D वित्तपोषण में वृद्धि और उसका सही दिशा-निर्देशन: भारत को मध्यम अवधि में अनुसंधान एवं विकास (R&D) की तीव्रता को बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कम से कम 1.5–2% करने की आवश्यकता है। इसके लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए ताकि निजी क्षेत्र की उच्च भागीदारी और मिशन-उन्मुख सार्वजनिक निवेश की ओर संतुलन स्थानांतरित किया जा सके।
  • उद्योग-अकादमिक संबंधों को गहरा करना: संयुक्त अनुसंधान, साझा बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण कार्यालयों के लिए मजबूत तंत्र की आवश्यकता है। इसके साथ ही कॉर्पोरेट R&D के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और CSR-लिंक्ड नवाचार वित्तपोषण प्रदान किया जाना चाहिए।
  • नियामक और प्रक्रियात्मक सुधार: सरल खरीद प्रक्रिया, लचीली लागत-वसूली, अनुमोदन की छोटी समय-सीमा और विभिन्न मंत्रालयों के बीच सामंजस्यपूर्ण नियम अंतरराष्ट्रीय समकक्षों की तुलना में “R&D करने की सुगमता” के अंतर को कम करेंगे।
  • बौद्धिक संपदा (IP) और परिवर्तन इकोसिस्टम को मजबूत करना: संस्थानों को पेटेंट दाखिल करने, लाइसेंसिंग, इनक्यूबेशन और ‘प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट’ वित्तपोषण के लिए बेहतर समर्थन देने की आवश्यकता है ताकि प्रयोगशाला के परिणामों को तेजी से बाजार उन्मुख किया जा सके।
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