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सामान्य अध्ययन-3: किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी।

  • संदर्भ: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने डिजिटल कृषि मिशन के तहत 31 मार्च, 2027 की समय-सीमा से लगभग पाँच महीने पहले ही 11 करोड़ किसान आईडी बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।

किसान आईडी: प्रमुख विवरण

  • आईडी की प्रकृति: ** किसान आईडी, जिसे किसान पहचान पत्र भी कहा जाता है, आधार पर आधारित एक विशिष्ट डिजिटल पहचान है, जो राज्य के भूमि अभिलेखों से गतिशील रूप से जुड़ी होती है। भूमि अभिलेखों के विवरण में होने वाले बदलाव आईडी के रिकॉर्ड में भी दर्ज किए जा सकते हैं।
  • पंजीकरण की रूपरेखा: पंजीकृत किसानों में लगभग 26% महिलाएँ हैं, जबकि लगभग 81% किसान छोटे और सीमांत परिचालन जोत की श्रेणियों में आते हैं।
    • पंजीकृत किसानों में लगभग 15% की आयु 70 वर्ष या उससे अधिक है, जबकि 7.5% की आयु 30 वर्ष से कम है।
  • वास्तविक खेती करने वालों का समावेशन: पंजीकरण का विस्तार उन वास्तविक किसानों तक भी किया जा रहा है, जिनके नाम आधिकारिक अभिलेखों में भूमि-स्वामी के रूप में दर्ज नहीं हैं।
    • पाँच राज्यों में 28,680 किरायेदार किसानों और बटाईदारों तथा छह राज्यों में वन अधिकार धारकों में से 3,14,298 लोगों का पंजीकरण किया गया है।

डिजिटल कृषि मिशन और एग्रीस्टैक के बारे में

  • डिजिटल कृषि मिशन: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2 सितंबर, 2024 को स्वीकृत इस मिशन का कुल बजट ₹2,817 करोड़ है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा ₹1,940 करोड़ है। यह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) विकसित करने, कृषि संबंधी अनुमानों में सुधार करने तथा कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-आधारित पहलों को समर्थन देने वाली एक व्यापक योजना है।
  • एग्रीस्टैक: यह किसानों पर केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है, जिसमें तीन आधारभूत रजिस्ट्रियाँ शामिल हैं। इनका निर्माण और रखरखाव राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है।
    • किसान रजिस्ट्री:  किसानों को विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करती है और किसानों से संबंधित प्रासंगिक सूचनाओं को आपस में जोड़ती है।
    • बोई गई फसलों की रजिस्ट्री: डिजिटल फसल सर्वेक्षणों की सहायता से प्रत्येक मौसम में उगाई जाने वाली फसलों का रिकॉर्ड रखती है।
    • भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र: नियोजन और निर्णय लेने में सहायता के लिए भूमि संबंधी सूचनाओं को भौगोलिक स्थानों से जोड़ते हैं।
  • मिशन के अन्य घटक:
    • कृषि निर्णय सहायता प्रणाली (कृषि DSS): यह फसलों, मिट्टी, मौसम और जल संसाधनों से संबंधित सुदूर संवेदन सूचनाओं को एक भू-स्थानिक प्रणाली में एकीकृत करती है।
    • मृदा प्रोफाइल मैपिंग: इसके अंतर्गत लगभग 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए 1:10,000 के पैमाने पर विस्तृत मृदा मानचित्र तैयार करने की परिकल्पना की गई है।
    • डिजिटल सामान्य फसल आकलन सर्वेक्षण (DGCES): यह फसल उपज के अनुमानों की सटीकता में सुधार करने के लिए फसल कटाई प्रयोगों का उपयोग करता है।

महत्त्व और संभावित अनुप्रयोग

  • सेवा वितरण को सरल बनाना: एक समान डिजिटल पहचान से दस्तावेजों को बार-बार जमा करने और सत्यापन की आवश्यकताओं को कम किया जा सकता है, जिससे किसानों पर केंद्रित सरकारी योजनाओं और सेवाओं तक पहुँच अधिक सरल और पारदर्शी बन सकती है।
  • कृषि ऋण, बीमा और खरीद: इस रजिस्ट्री का उद्देश्य किसान क्रेडिट कार्ड सेवाओं सहित बैंक ऋण, फसल बीमा दावों, आपदा राहत तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली के अंतर्गत कृषि उपज की खरीद को सुगम बनाना है। वास्तविक लाभ संबंधित योजनाओं की पात्रता शर्तों और प्रक्रियाओं के अधीन होंगे।
  • बेहतर कृषि नियोजन: फसल, मिट्टी, मौसम और जल संसाधनों से संबंधित आँकड़ों को एकीकृत करने से फसलों की निगरानी, कृषि परामर्श, आपदा प्रबंधन तथा सिंचाई, कीट प्रबंधन और फसल नियोजन संबंधी अधिक सूचित निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।
  • अधिक पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता: सत्यापित किसान डेटाबेस से दोहराए गए रिकॉर्ड कम करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने तथा कृषि योजनाओं की निगरानी को सुदृढ़ करने में सहायता मिल सकती है।
    • मंत्रालय के अनुसार, किसान आईडी-आधारित सेवा वितरण के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के तहत 6 करोड़ से अधिक किसानों को पहले ही प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो चुका था।

चिंताएँ और आगे की राह

  • समावेशी पंजीकरण: पंजीकरण प्रणालियों में पात्र किरायेदार किसानों और बटाईदारों सहित वास्तविक खेती करने वालों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भूमि स्वामित्व अभिलेखों पर निर्भरता के कारण वे डिजिटल व्यवस्था से बाहर न रह जाएँ।
  • आँकड़ों की सटीकता और अंतर-संचालनीयता: राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अद्यतन अभिलेख बनाए रखने तथा यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि विभिन्न विभागों और योजनाओं के डेटाबेस आपस में समन्वित रूप से कार्य कर सकें। अगले चरण में केवल पंजीकरण की संख्या बढ़ाने के बजाय 11 करोड़ आईडी के प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
  • गोपनीयता और जवाबदेही: किसानों का डिजिटल कृषि अवसंरचना पर विश्वास कायम करने के लिए व्यक्तिगत आँकड़ों की सुरक्षा हेतु स्पष्ट उपाय, आँकड़ों तक पहुँच के पारदर्शी नियम तथा शिकायतों के प्रभावी निवारण की व्यवस्थाएँ आवश्यक हैं।
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