संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: भारत और इसके पड़ोसी- संबंध; भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावी करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार। 

सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारत ने सार्क (SAARC) करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत मालदीव के लिए ₹3,000 करोड़ (₹30 बिलियन) की करेंसी स्वैप सुविधा को मंजूरी दी है, जो इस क्षेत्र में एक प्रमुख वित्तीय भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।

अन्य संबंधित जानकारी:

• यह सुविधा व्यापक सार्क करेंसी स्वैप व्यवस्था के हिस्से के रूप में, भारतीय रुपया (INR) विनिमय विंडो के माध्यम से विस्तारित की जा रही है।

• यह वर्तमान ढांचे के तहत प्रथम आहरण है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जून 2024 में, वर्ष 2024 से 2027 की अवधि के लिए लागू किया गया था।

  • इसके अंतर्गत, अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू की नई दिल्ली की राजकीय यात्रा के दौरान भारतीय रिज़र्व बैंक और मालदीव सरकार ने द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

• यह मालदीव द्वारा अक्टूबर 2024 में अमेरिकी डॉलर/यूरो विंडो के तहत प्राप्त 400 मिलियन डॉलर की विनिमय सुविधा की परिपक्वता के बाद किया गया है।

• यह कदम मालदीव की अर्थव्यवस्था द्वारा सामना किए जा रहे बाह्य तरलता दबाव और विदेशी मुद्रा संबंधी बाधाओं के दौरान उठाया गया है।

करेंसी स्वैप क्या है?

• करेंसी स्वैप दो देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच एक वित्तीय व्यवस्था है, जिसके तहत एक पूर्व-निर्धारित अवधि के लिए मुद्राओं का आदान-प्रदान किया जाता है।

• इसमें एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा उधार ली जाती है, साथ ही एक निर्दिष्ट भविष्य की तिथि पर ब्याज के साथ मूल मुद्रा को वापस करने का समझौता किया जाता है।

• यह देशों को अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजारों का उपयोग किए बिना अल्पकालिक विदेशी मुद्रा तरलता प्रदान करता है।

• ऐसी व्यवस्थाएं भुगतान संतुलन के दबाव, मुद्रा की अस्थिरता और बाहरी झटकों के प्रबंधन में सहायता करती हैं।

SAARC करेंसी स्वैप व्यवस्था के बारे में

• सार्क मुद्रा विनिमय ढांचा (SAARC Currency Swap Framework) एक क्षेत्रीय वित्तीय व्यवस्था है, जिसे भारत द्वारा 2012 में सार्क देशों को अल्पकालिक विदेशी मुद्रा तरलता सहायता प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था।

• यह सहभागी देशों को पूर्व-सहमत शर्तों के तहत विनिमय विंडो के माध्यम से स्थानीय मुद्रा को विदेशी मुद्रा (अमेरिकी डॉलर/यूरो/भारतीय रुपये) में बदलने की अनुमति देता है।

• यह ढांचा देशों को भुगतान संतुलन के दबाव को दूर करने और बाहरी ऋण के झटकों से बचने में मदद करता है।

• वर्ष 2024–27 के लिए कुल निधि अमेरिकी डॉलर/यूरो विंडो के तहत 2 बिलियन डॉलर और भारतीय रुपया विंडो के तहत ₹250 बिलियन (₹25,000 करोड़) है। यह द्विपक्षीय विनिमय समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद सार्क सदस्यों के लिए उपलब्ध होता है।

• इस ढांचे के तहत, मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण ने अक्टूबर 2024 में अमेरिकी डॉलर/यूरो विंडो के तहत 400 मिलियन डॉलर तक और INR विंडो के तहत ₹30 बिलियन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

करेंसी स्वैप का महत्व

• मालदीव के लिए आर्थिक स्थिरता: यह तत्काल तरलता सहायता प्रदान करता है, जिससे विदेशी मुद्रा की कमी को प्रबंधित करने और व्यापक आर्थिक स्थितियों को स्थिर करने में मदद मिलती है।

• ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का सुदृढ़ीकरण: यह द्विपक्षीय विश्वास और आर्थिक सहयोग को बढ़ाता है, साथ ही इस क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार और “प्रथम प्रतिक्रियादाता” के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करता है।

• क्षेत्रीय वित्तीय सहयोग: यह क्षेत्रीय आर्थिक चुनौतियों के समाधान में सार्क तंत्र की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है और दक्षिण एशिया में वित्तीय लचीलापन और सहयोग को बढ़ावा देता है।

• रणनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व: यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत के प्रभाव को सुदृढ़ करता है और भारत की व्यापक पहलों, जैसे कि ‘पड़ोसी प्रथम’ और विजन ‘महासागर’ (MAHASAGAR) के अनुरूप है।

Sources:
The Hindu
The Hindu
BFSI

Shares: