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सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय| शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और ‘उल्लास’ (ULLAS) – ‘न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम’ के तहत निर्धारित वयस्क साक्षरता मानदंडों को प्राप्त करने के बाद उत्तराखंड, भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- राज्य की साक्षरता दर 98% से अधिक है, जो अगस्त 2024 में शुरू की गई संशोधित परिभाषा के तहत पूर्ण साक्षरता के लिए भारत सरकार द्वारा आवश्यक 95% साक्षरता के मानदंड से अधिक है।
- इस उपलब्धि के साथ, उत्तराखंड अब मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद भारत के पूर्ण साक्षर राज्यों में शामिल हो गया है।
- लद्दाख, चंडीगढ़ और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह ने भी पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश (UT) का दर्जा प्राप्त कर लिया है।
- यह उपलब्धि ‘उल्लास’ (ULLAS) कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार, स्कूली शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा, जिला प्रशासन, स्वयंसेवक शिक्षकों, स्थानीय निकायों और जनभागीदारी के समन्वित प्रयासों को दर्शाती है, साथ ही यह ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का समर्थन करती है।
ULLAS (समाज में सभी के लिए जीवनपर्यन्त शिक्षा की समझ) – ‘न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम’ के बारे में

- उल्लास, जिसे न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (NILP) के रूप में भी जाना जाता है, शिक्षा मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
- यह योजना वित्तीय वर्ष 2022–2027 के दौरान कार्यान्वित की जा रही है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है।
- विजन: कर्तव्य बोध की भावना पर आधारित स्वयंसेवा के माध्यम से “जन-जन साक्षर भारत” बनाना।
- लक्षित समूह: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के असाक्षर वयस्क, जो औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए।
- लक्ष्य: 2022–27 के दौरान 5 करोड़ शिक्षार्थियों (प्रतिवर्ष 1 करोड़ शिक्षार्थी) के लिए मूलभूत साक्षरता और अंकज्ञान का लक्ष्य प्राप्त करना।
- वित्तीय परिव्यय: इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 1,037.90 करोड़ रुपये है (केंद्रीय हिस्सा: 700 करोड़ रुपये; राज्य का हिस्सा: 337.90 करोड़ रुपये)।
- उद्देश्य
- मूलभूत साक्षरता और अंकज्ञान (FLN) प्रदान करना।
- डिजिटल, वित्तीय, कानूनी और स्वास्थ्य साक्षरता सहित महत्वपूर्ण जीवन कौशल को बढ़ावा देना।
- व्यावसायिक कौशल और आजीविका के अवसरों का समर्थन करना।
- बुनियादी शिक्षा समतुल्यता को सुविधाजनक बनाना।
- सतत और आजीवन शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
- मुख्य विशेषताएं
- स्वयंसेवा के माध्यम से हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में कार्यान्वित।
- शिक्षार्थी और स्वयंसेवक शिक्षक ‘उल्लास’ (ULLAS) मोबाइल ऐप/पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत होते हैं, जिसमें शिक्षण सामग्री 27 भाषाओं में उपलब्ध है।
- विद्यालय ‘सामाजिक चेतना केंद्र’ के रूप में कार्य करते हैं, जबकि सामुदायिक हॉल, पंचायत कार्यालय, पुस्तकालय और उच्च शिक्षण संस्थानों का उपयोग भी शिक्षण केंद्रों के रूप में किया जा सकता है।
- साक्षरता का आकलन ‘फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट टेस्ट’ (FLNAT) के माध्यम से किया जाता है, जो वर्ष में दो बार आयोजित होता है। इसके प्रमाण पत्र NIOS और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए जाते हैं।
- प्रगति
- उल्लास प्लेटफॉर्म पर 2.72 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 43 लाख से अधिक स्वयंसेवक शिक्षक पंजीकृत हो चुके हैं।
- 1.7 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी FLNAT में शामिल हो चुके हैं।
- ‘उल्लास साक्षरता सप्ताह’ में भागीदारी 3.5 करोड़ (2023) से बढ़कर 4.84 करोड़ (2024) और 6.23 करोड़ (2025) हो गई है।

