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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।
संदर्भ: हाल ही में भारत के विदेश मंत्री ने ओमान की राजधानी मस्कट में अपने ओमानी समकक्ष से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत–ओमान रणनीतिक साझेदारी के समग्र आयामों की समीक्षा की तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर के पारस्परिक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
अन्य संबंधित जानकारी
• दोनों पक्षों ने भारत–ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement–CEPA) के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। यह समझौता 1 जून 2026 से प्रभावी हुआ है।
• इस यात्रा ने बदलती क्षेत्रीय एवं वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत–ओमान रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।

रणनीतिक महत्व एवं सहयोग के उभरते क्षेत्र
• रणनीतिक समुद्री साझेदार
- ओमान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
- दुक्म बंदरगाह तक भारत की पहुँच से पश्चिमी हिन्द महासागर में उसकी परिचालन क्षमता मजबूत होती है तथा सागर (SAGAR) / महासागर (MAHASAGAR) विजन को बल मिलता है।
• खाड़ी क्षेत्र का आर्थिक प्रवेश द्वार
- व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) व्यापार, निवेश, सेवाओं तथा आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक सुदृढ़ ढाँचा प्रदान करता है।
- दुक्म, सोहार और सलालाह जैसे प्रमुख बंदरगाहों के माध्यम से ओमान, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), पश्चिम एशिया तथा पूर्वी अफ्रीका के बाजारों तक पहुँच का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।
• विश्वसनीय ऊर्जा एवं आपूर्ति शृंखला साझेदार
- दीर्घकालिक हाइड्रोकार्बन आपूर्ति के माध्यम से ओमान, भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- दोनों देशों के बीच सहयोग अब हरित हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों तथा ऊर्जा संक्रमण संबंधी पहलों तक विस्तारित हो रहा है।
• भविष्य उन्मुख साझेदारी

- डिजिटल भुगतान, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
- दोनों देश विकसित भारत 2047 और ओमान विज़न 2040 के बीच समन्वय स्थापित कर सतत एवं नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।
चुनौतियाँ एवं चिंता के क्षेत्र
• व्यापार एवं निवेश की अप्रयुक्त संभावनाएँ
- मजबूत आर्थिक संबंधों तथा सीईपीए (CEPA) के लागू होने के बावजूद, द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश अभी भी अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुँच सके हैं।
• क्षेत्रीय भू-राजनीतिक अस्थिरता
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव तथा प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान, व्यापार, जहाजरानी एवं ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
• अन्य प्रमुख शक्तियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- चीन जैसे देशों द्वारा खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक एवं अवसंरचनात्मक निवेश का विस्तार, इस क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा रहा है।
• ऊर्जा संक्रमण से जुड़ी अनिश्चितताएँ
- दोनों देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधीकरण तथा स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में हाइड्रोकार्बन-आधारित पारंपरिक साझेदारी को नई ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
आगे की राह
• सीईपीए (CEPA) का अधिकतम लाभ उठाना
- निर्यातकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्टअप्स तथा सेवा प्रदाताओं द्वारा सीईपीए के प्रावधानों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
• समुद्री एवं रक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाना
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता, नौसैनिक लॉजिस्टिक्स, रक्षा विनिर्माण तथा हिन्द महासागर की समुद्री सुरक्षा में सहयोग का विस्तार किया जाए।
• संपर्क एवं लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का लाभ उठाना
- भारतीय व्यवसायों को ओमान के बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स गलियारों एवं आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़कर खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), पश्चिम एशिया तथा पूर्वी अफ्रीका के व्यापक बाजारों तक पहुँच सुनिश्चित की जाए।
• ओमान विज़न 2040 एवं विकसित भारत 2047 के बीच समन्वय को संस्थागत रूप देना
- लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे दीर्घकालिक विकास क्षेत्रों में दोनों देशों की प्राथमिकताओं का बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
