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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।
संदर्भ: हाल ही में, इटली प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर भारत के प्रधानमंत्री ने इटली की यात्रा की| इस दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया।
अन्य संबंधित जानकारी

- यह यात्रा इटली में आयोजित 2024 के G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी, तथा 2023 के G20 शिखर सम्मेलन व रायसीना डायलॉग के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत यात्राओं के बाद भारत-इटली के बीच बढ़ते जुड़ाव पर आधारित है।
- दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कनेक्टिविटी, गतिशीलता, संस्कृति और हिंद-प्रशांत सहयोग को कवर करने वाला एक विस्तारित रोडमैप अपनाया, साथ ही भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के लिए अपने समर्थन की पुष्टि भी की।
- भारत और इटली ने उभरती हुई हिंद-भूमध्यसागरीय भू-राजनीतिक गतिशीलता के बीच आतंकवाद-रोधी, महत्वपूर्ण खनिजों, समुद्री सुरक्षा, हरित संक्रमण, अंतरिक्ष और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग पर भी बल दिया।
यात्रा के मुख्य परिणाम
- द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत करना : भारत और इटली ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया।
- दोनों देशों ने वार्षिक नेतृत्व बैठकों को संस्थागत रूप देने तथा मंत्रिस्तरीय और संस्थागत संवादों को सुदृढ़ करने पर भी सहमति जताई।
- व्यापार और आर्थिक सहयोग: दोनों देशों ने वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को €20 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- यह सहयोग मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, ऑटोमोटिव, फार्मास्यूटिकल्स, महत्वपूर्ण खनिजों, बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों, पर्यटन और वस्त्र जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।
- महत्वपूर्ण खनिज साझेदारी: भारत और इटली ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
- यह साझेदारी लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण, संधारणीय निष्कर्षण प्रथाओं को बढ़ावा देने, ई-अपशिष्ट और खदान के अवशेषों से खनिजों की पुनर्प्राप्ति करने तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था की पहलों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगी।
- आईएमईसी (IMEC) और कनेक्टिविटी: दोनों पक्षों ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।
- समुद्री परिवहन और बंदरगाहों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, और इसके क्रियान्वयन के लिए एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना की जाएगी।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: भारत और इटली ने ‘इनोविट इंडिया’ (INNOVIT India) लॉन्च किया, जो स्टार्टअप त्वरण, अनुसंधान सहयोग, प्रतिभा गतिशीलता और उद्योग साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नवाचार केंद्र है।
- यह सहयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सुपरकंप्यूटिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को कवर करेगा।
- अंतरिक्ष सहयोग: दोनों देश पृथ्वी अवलोकन, हेलियोफिज़िक्स, अंतरिक्ष अन्वेषण और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी के बीच सहयोग को गहरा करने पर सहमत हुए।
- रक्षा और समुद्री सुरक्षा: भारत और इटली ने एक रक्षा औद्योगिक रोडमैप और रक्षा सहयोग पर एक संयुक्त आशय घोषणा पत्र को अपनाया।
- यह सहयोग हेलीकॉप्टरों, नौसैनिक प्लेटफार्मों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सह-विकास और सह-उत्पादन पर केंद्रित होगा। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा पर एक संवाद भी शुरू किया।
- आतंकवाद-रोधी और सुरक्षा सहयोग: इटली ने वर्ष 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की।
- दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र (UN), वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF), और अन्य आतंकवाद-विरोधी वित्तपोषण तंत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।
- धन शोधन, आतंकवादी वित्तपोषण और कर अपराधों से निपटने के लिए समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
- प्रवासन और गतिशीलता: भारत और इटली छात्रों, शोधकर्ताओं, कुशल श्रमिकों और नर्सों की गतिशीलता को सुगम बनाने पर सहमत हुए।
- भारतीय छात्रों को इतालवी उद्यमों से जोड़ने के लिए “आईसीआई – इटली कॉल्स इंडिया” (ICI – Italy Calls India) पहल की शुरुआत की गई।
- संस्कृति और शिक्षा: वर्ष 2027 को भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष घोषित किया गया।
- इटली लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में भागीदारी करेगा।
- दोनों देशों ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान पर भारत-इतालवी रोडमैप को भी अपनाया।
- बहुपक्षीय और वैश्विक सहयोग: भारत और इटली ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के सुधारों, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, और एक स्वतंत्र तथा खुले हिंद-प्रशांत के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।
- दोनों पक्ष डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI), नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वास्थ्य सेवा में त्रिपक्षीय पहलों के माध्यम से अफ्रीका में सहयोग करने पर भी सहमत हुए।

