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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — विकास तथा उनके अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव।

संदर्भ: हाल ही में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

• ये नियम राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिन बाद लागू होंगे। इससे सरकारी विभागों, व्यवसायों, संस्थानों तथा अन्य संगठनों को अपनी प्रणालियों में आवश्यक बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। 

• इस व्यवस्था के अंतर्गत बैंक, दूरसंचार नेटवर्क, विद्युत प्रणालियाँ, परिवहन सेवाएँ तथा सरकारी संस्थान सटीक समय-निर्धारण के लिए एक समान प्रणाली के दायरे में आ जाएंगे। 

‘एक राष्ट्र, एक समय’ के बारे में

• ‘एक राष्ट्र, एक समय’ पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में महत्वपूर्ण प्रणालियाँ और संस्थान सटीक एवं एकसमान भारतीय मानक समय (आईएसटी) का पालन करें। 

• डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी-आधारित प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के साथ एक समान समय-संदर्भ की आवश्यकता भी बढ़ गई है। 

• विभिन्न समय-स्रोतों के बीच अंतर से ऐसी गतिविधियों के समन्वय और अभिलेखीकरण पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, एक समान समय-संदर्भ से महत्वपूर्ण एवं समय-संवेदी प्रणालियों की विश्वसनीयता में सुधार होने की अपेक्षा है। 

एक समान समय-संदर्भ क्यों महत्वपूर्ण है?

• एकल समय-संदर्भ बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतानों में सटीक समय-अंकन, रेलवे, हवाई अड्डों और परिवहन प्रणालियों के समन्वय तथा विश्वसनीय दूरसंचार एवं इंटरनेट नेटवर्क को सुचारु बनाए रखने में सहायक होगा। 

• यह विद्युत प्रणालियों, सरकारी एवं कानूनी अभिलेखों तथा आपातकालीन एवं अन्य समय-संवेदी सेवाओं में सटीक समय-निर्धारण को भी समर्थन प्रदान करेगा। 

• अतः, महत्वपूर्ण अवसंरचना, डिजिटल शासन, वित्तीय प्रणालियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए समय का समकालिकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

भारतीय मानक समय (आईएसटी) के लिए भारत का विधिक ढाँचा

• पूरे भारत में समय के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम 27 जनवरी 2025 को उठाया गया, जब उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2025 का मसौदा अधिसूचित किया। 

• विभाग ने राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ साझेदारी की, ताकि पाँच विधिक मापविज्ञान प्रयोगशालाओं के माध्यम से मिलीसेकंड से माइक्रोसेकंड स्तर की सटीकता के साथ भारतीय मानक समय का प्रसार किया जा सके। 

• सरकार के अनुसार, ऐसी सटीकता नौवहन, दूरसंचार, विद्युत ग्रिड के समन्वयन, बैंकिंग, डिजिटल शासन और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

भारतीय मानक समय (आईएसटी) क्या है?

• सरकार के अनुसार, भारतीय मानक समय समन्वित सार्वभौमिक समय (यूटीसी) पर आधारित है, जिसमें 5 घंटे 30 मिनट का समय-अंतर है। इसका अनुरक्षण सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) द्वारा किया जाता है। 

• सीएसआईआर-एनपीएल के अनुसार, भारतीय मानक समय को उन्नत परमाणु घड़ियों और उपग्रह संपर्कों की सहायता से तैयार किया जाता है। यह समन्वित सार्वभौमिक समय से संबद्ध है और इसकी अनिश्चितता 3 नैनोसेकंड से कम है। 

• सीएसआईआर-एनपीएल में नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल (एनटीपी) सर्वरों के माध्यम से भारतीय मानक समय का व्यापक प्रसार मिलीसेकंड स्तर की सटीकता के साथ किया जाता है। 

NaVIC की भूमिका एवं विदेशी निर्भरता में कमी

• मुख्य विशेषता: नए नियमों में विदेशी उपग्रह-आधारित समय-स्रोतों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है। 

• NaVIC: नियम सुरक्षित एवं विश्वसनीय समय-प्रसार के लिए NaVIC तथा अन्य अनुमोदित भारतीय समय-स्रोतों के उपयोग को सक्षम बनाते हैं। 

• इसरो: भारत की स्वतंत्र उपग्रह प्रणाली NaVIC के माध्यम से उपग्रह संपर्कों द्वारा नैनोसेकंड स्तर की सटीकता के साथ भारतीय मानक समय से संबद्धता स्थापित करने की जिम्मेदारी इसरो को दी गई है। 

• दूरसंचार एवं इंटरनेट: अनेक दूरसंचार सेवा प्रदाता और इंटरनेट सेवा प्रदाता परंपरागत रूप से जीपीएस जैसे विदेशी समय-स्रोतों पर निर्भर रहे हैं। 

• राष्ट्रीय सुरक्षा: नेटवर्क और प्रणालियों का भारतीय मानक समय के साथ समकालिकरण राष्ट्रीय सुरक्षा, वास्तविक-समय अनुप्रयोगों तथा महत्वपूर्ण अवसंरचना के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक है। 

व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी-आधारित भारतीय मानक समय नेटवर्क

• ‘एक राष्ट्र, एक समय’ पहल के तहत, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला में व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी-आधारित भारतीय मानक समय प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क शुरू किया। 

• यह नेटवर्क उच्च-सटीकता वाला समय-समकालिकरण प्रदान करता है, जीपीएस जैसे विदेशी समय-स्रोतों पर निर्भरता को कम करता है तथा भारत की डिजिटल अवसंरचना संबंधी संप्रभुता को मजबूत करता है। 

• यह महत्वपूर्ण क्षेत्रों को साइबर हमलों और डेटा में हेरफेर से सुरक्षित रखने में सहायता करता है तथा वित्तीय बाजारों, शेयर बाजारों, डिजिटल बैंकिंग भुगतानों, दूरसंचार नेटवर्क और राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के सुचारु संचालन में सहयोग करता है। 

संस्थागत तंत्र

• विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 के तहत भारतीय मानक समय को अपनाने के लिए नीति ढाँचा, विनियमन और कानूनी प्रावधान तैयार करने हेतु सरकार ने एक उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया। 

• इस समिति की अध्यक्षता उपभोक्ता मामलों के विभाग के सचिव ने की। इसमें एनपीएल, इसरो, आईआईटी कानपुर, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, रेलवे तथा दूरसंचार विभाग सहित अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे। 

‘एक घड़ी’ व्यवस्था से जुड़ी समस्याएँ एवं चिंताएँ

• भारत के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में भारतीय मानक समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय से काफी भिन्न हो सकता है, जिससे सौर समय में असंगति तथा क्षेत्रीय असुविधा उत्पन्न हो सकती है। 

• एक समान समय सभी क्षेत्रों की स्थानीय कार्य एवं विद्यालयी समय-सारणी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकता। दिन के प्रकाश की उपलब्धता में अंतर उत्पादकता को भी प्रभावित कर सकता है। 

• एकल राष्ट्रीय समय-संदर्भ पर निर्भरता से अत्यधिक केंद्रीकरण का जोखिम उत्पन्न हो सकता है तथा इसके लिए मजबूत वैकल्पिक एवं बैकअप समय-निर्धारण प्रणालियों की आवश्यकता होगी। 

• पुरानी घड़ियों एवं सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना को उन्नत करने तथा अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण लागत आ सकती है, विशेषकर छोटे संस्थानों के लिए। 

• कार्यान्वयन के लिए अंतर-संचालनीय समय मानक, साइबर सुरक्षा, वैकल्पिक समय-स्रोत तथा भारत के व्यापक पूर्व-पश्चिम भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। 

आगे की राह

• महत्वपूर्ण क्षेत्रों और संस्थानों में भारतीय मानक समय को सार्वभौमिक रूप से अपनाना सुनिश्चित किया जाए। 

• NaVIC, परमाणु घड़ियों, नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल सर्वरों और व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी का विस्तार किया जाए। 

• जीपीएस जैसे विदेशी समय-स्रोतों पर निर्भरता कम की जाए। 

• साइबर हमलों और डेटा में हेरफेर से बचाव के लिए साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ किया जाए। 

• डिजिटल तथा महत्वपूर्ण अवसंरचना में निर्बाध समय-समकालिकरण सुनिश्चित किया जाए। 

निष्कर्ष

विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 आधिकारिक उद्देश्यों के लिए पूरे भारत में भारतीय मानक समय को एकमात्र संदर्भ समय के रूप में स्थापित करते हैं। परमाणु घड़ियों, उपग्रह संपर्क, NaVIC, नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल सर्वरों और व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी के माध्यम से ‘एक राष्ट्र, एक समय’ का उद्देश्य एक सुरक्षित, सटीक और सुसंगत राष्ट्रीय समय-निर्धारण अवसंरचना का निर्माण करना है।

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