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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास|
संदर्भ: हाल ही में भारतीय नौसेना ने निस्तार श्रेणी के दूसरे गोताखोरी सहायता पोत आईएनएस निपुण को नौसेना में शामिल किया है। इससे भारत की गहरे समुद्र में गोताखोरी, जल के भीतर हस्तक्षेप तथा पनडुब्बी बचाव क्षमताओं को बल मिला है।
अन्य संबंधित जानकारी
- स्वदेशी पोत: आईएनएस निपुण का स्वदेशी डिजाइन और निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम द्वारा किया गया है। इससे तकनीकी रूप से जटिल और विशेष प्रकार के नौसैनिक पोतों के निर्माण की भारत की क्षमता मजबूत हुई है।
- विशेष क्षमताएँ: यह पोत संतृप्ति गोताखोरी, वायु गोताखोरी और हीलिऑक्स गोताखोरी, दूरस्थ रूप से संचालित जल के भीतर प्रणालियों, गतिशील स्थिति निर्धारण तथा विशेष जीवन-रक्षक और चिकित्सा सुविधाओं को सहायता प्रदान करता है।
- पनडुब्बी बचाव: निपुण भारतीय नौसेना के गहरे जल में बचाव वाहन को अपने साथ ले जाने और संचालित करने में सक्षम है। इससे संकटग्रस्त पनडुब्बियों तक त्वरित सहायता पहुँचाना संभव होगा।
- दोनों तटों पर क्षमता: पश्चिमी नौसेना कमान के अंतर्गत तैनात निपुण, विशाखापत्तनम में स्थित आईएनएस निस्तार की क्षमताओं को पूरक बनाता है। इससे भारत के पश्चिमी और पूर्वी दोनों समुद्री तटों पर विशेष रूप से निर्मित गोताखोरी सहायता पोतों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
गोताखोरी सहायता पोत क्या है?
- विशेषीकृत मंच: गोताखोरी सहायता पोत एक विशेष रूप से निर्मित पोत होता है, जो जटिल और लंबे समय तक चलने वाले जल के भीतर अभियानों के लिए आवश्यक उपकरण, कार्मिक और आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
- गोताखोरी अभियान: यह गहरे समुद्र में गोताखोरी और संतृप्ति गोताखोरी जैसी विशेष गोताखोरी गतिविधियों में सहायता करता है। इसके लिए गोताखोरों को जल में उतारने, उनकी निगरानी करने, उन्हें वापस लाने और आवश्यक सहायता प्रदान करने वाली प्रणालियाँ उपलब्ध होती हैं।
- जल के भीतर हस्तक्षेप: गोताखोरी सहायता पोत गोताखोरों तथा दूरस्थ रूप से संचालित प्रणालियों के माध्यम से जल के भीतर मौजूद परिसंपत्तियों के निरीक्षण, हस्तक्षेप, बचाव और पुनर्प्राप्ति में सहायता करते हैं।
- पनडुब्बी बचाव: गोताखोरी सहायता पोत गहरे जल में बचाव वाहन के मुख्य सहायता पोत के रूप में कार्य कर सकता है। यह बचाव वाहन को संकटग्रस्त पनडुब्बी तक पहुँचाने तथा बचाव अभियान में सहायता करता है।
- अभियानात्मक सहायता: गतिशील स्थिति निर्धारण, गोताखोरी, जीवन-रक्षक और चिकित्सा प्रणालियाँ विशेष जल के भीतर अभियानों को समुद्र में सुरक्षित और निरंतर संचालित करने में सक्षम बनाती हैं।
आईएनएस निपुण के बारे में
- निस्तार श्रेणी का गोताखोरी सहायता पोत: आईएनएस निपुण, भारतीय नौसेना के लिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित दो निस्तार श्रेणी के गोताखोरी सहायता पोतों में दूसरा है। इससे पहले आईएनएस निस्तार को जुलाई 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था।
- गहरे समुद्र में गोताखोरी: यह वायु गोताखोरी, संतृप्ति गोताखोरी और हीलिऑक्स गोताखोरी में सहायता करता है। इसकी संतृप्ति गोताखोरी क्षमता 300 मीटर तक बताई गई है।
- जल के भीतर प्रणालियाँ: दूरस्थ रूप से संचालित वाहन जल के भीतर निरीक्षण और हस्तक्षेप में सहायता करते हैं, जबकि गतिशील स्थिति निर्धारण प्रणाली जटिल अभियानों के दौरान पोत को सटीक स्थिति में बनाए रखने में सक्षम बनाती है।
- पनडुब्बी बचाव: निपुण गहरे जल में बचाव वाहन के मुख्य सहायता पोत के रूप में कार्य कर सकता है। इससे बचाव वाहन को किसी अस्थायी पोत पर निर्भर रहने के बजाय एक समर्पित पोत से सीधे संचालित किया जा सकता है।
- लंबे समय तक अभियान: इसकी विशेषीकृत गोताखोरी व्यवस्था, जीवन-रक्षक और चिकित्सा सुविधाएँ लंबे समय तक चलने वाले तथा तकनीकी रूप से जटिल जल के भीतर अभियानों को संभव बनाती हैं, जिनमें गोताखोरी, हस्तक्षेप तथा बचाव एवं पुनर्प्राप्ति शामिल हैं।
भारत के लिए आईएनएस निपुण का महत्व
- पनडुब्बी बचाव क्षमता की कमी को दूर करता है: भारत ने 2018–19 में दो गहरे जल में बचाव वाहनों की प्रणालियाँ प्राप्त की थीं, लेकिन इनके लिए विशेष रूप से निर्मित मुख्य सहायता पोत उपलब्ध नहीं थे। इस दौरान आईएनएस साबरमती का अंतरिम रूप से उपयोग किया जाता था। निपुण पश्चिमी समुद्री तट पर एक समर्पित मंच उपलब्ध कराता है, जिससे पनडुब्बी दुर्घटनाओं के समय प्रतिक्रिया समय में सुधार होगा।
- दोनों समुद्री तटों पर बचाव व्यवस्था: निपुण की पश्चिमी तट पर तथा निस्तार की विशाखापत्तनम में पूर्वी तट पर तैनाती से भारत के दोनों समुद्री मोर्चों पर विशेष गोताखोरी सहायता उपलब्ध हो गई है। इससे विशेष जल के भीतर अभियानों की पहुँच और क्षमता बढ़ेगी।
- जल के भीतर भारत की क्षमता मजबूत करता है: पनडुब्बी बचाव के अलावा, दोनों गोताखोरी सहायता पोत गहरे समुद्र में गोताखोरी, जल के भीतर हस्तक्षेप, बचाव और पुनर्प्राप्ति जैसी क्षमताओं को बढ़ाते हैं। बदलते और अधिक प्रतिस्पर्धी समुद्री वातावरण में इन क्षमताओं का विशेष महत्व है।
- क्षेत्रीय समुद्री भूमिका को सुदृढ़ करता है: यह क्षमता भारत को साझेदार देशों की संकटग्रस्त पनडुब्बियों को सहायता प्रदान करने तथा जल के भीतर बचाव और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में सहयोग करने में सक्षम बनाती है। इससे क्षेत्र में भारत की “पसंदीदा पनडुब्बी बचाव साझेदार” के रूप में भूमिका मजबूत हो सकती है।
- रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा इस विशेषीकृत और तकनीकी रूप से जटिल पोत के स्वदेशी निर्माण से भारत का विशेषीकृत नौसैनिक पोत निर्माण तंत्र मजबूत होता है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।
