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सामान्य अध्ययन-2:भारतीय संविधान—ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान एवं मूल ढाँचा; संघ और राज्यों के कार्य एवं उत्तरदायित्व; संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ।

संदर्भ: यह दिवस संविधान सभा द्वारा 1949 में हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में अपनाने के निर्णय की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाने का निर्णय भारत के भाषाई भविष्य को लेकर हुए विस्तृत बहस के बाद लिया गया था।

संविधान सभा में भाषा संबंधी बहस

  • भाषा संविधान सभा के समक्ष सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक थी, जिसमें भारत की भाषाई विविधता के साथ राष्ट्रीय एकीकरण और प्रशासनिक एकता के बीच सामंजस्य स्थापित करने की चुनौती थी।
  • हिंदी समर्थक हिंदी को संघ की प्रमुख भाषा के रूप में अपनाना चाहते थे, जबकि गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाषाई एकरूपता का विरोध किया और अंग्रेजी के निरंतर उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • यह बहस केवल हिंदी बनाम अंग्रेजी तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें हिंदुस्तानी और संस्कृत जैसे विकल्पों के साथ-साथ लिपि और अंकों से संबंधित प्रश्न भी शामिल थे।
  • जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं ने अंग्रेजी से एकाएक संक्रमण की व्यावहारिक कठिनाइयों, विशेषकर प्रशासन और तकनीकी विषयों पर प्रकाश डाला।
  • इसलिए, भाषा के संबंध में अंतिम दृष्टिकोण एक सरल बहुमत आधारित निर्णय के बजाय सहमति और समायोजन स्थापित करने का प्रयास था।

मुंशी-अयंगर फॉर्मूला: संवैधानिक समझौता

  • के.एम. मुंशी और एन. गोपालस्वामी अयंगर, संविधान सभा की प्रारूप समिति के सदस्यों ने मुंशी-अयंगर फॉर्मूला के नाम से जाने जाने वाले समझौते में भूमिका निभाई।
  • राजभाषा: संघ की राजभाषा के रूप में देवनागरी लिपि में हिंदी निर्धारित की गई।
  • अंक: संघ के आधिकारिक प्रयोजनों के लिए भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप को निर्धारित किया गया।
  • अंग्रेजी: संविधान के प्रारंभ से 15 वर्षों तक संघ के उन सभी आधिकारिक प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहना था, जिनके लिए संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले इसका प्रयोग किया जा रहा था।
  • क्रमिक संक्रमण: इस व्यवस्था का उद्देश्य अंग्रेजी को अचानक हटाने के बजाय हिंदी की ओर क्रमिक संक्रमण को सुगम बनाना था।
  • इस समझौते को अनुच्छेद 343 के माध्यम से संवैधानिक ढाँचे में शामिल किया गया, जो भाग XVII का हिस्सा है और राजभाषा से संबंधित है।
  • मुख्य अंतर: हिंदी को भारत संघ की राजभाषा बनाया गया, न कि भारत की राष्ट्रीय भाषा। संविधान भारत की किसी भी भाषा को राष्ट्रीय भाषा के रूप में घोषित नहीं करता।

15-वर्षीय संक्रमण से वर्तमान भाषा व्यवस्था तक

  • अनुच्छेद 343: मूल रूप से संविधान के प्रारंभ से 15 वर्षों तक, अर्थात 26 जनवरी 1965 तक, संघ के आधिकारिक प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के निरंतर प्रयोग का प्रावधान किया गया था। साथ ही, संसद को इसके बाद भी अंग्रेजी के निरंतर प्रयोग के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया।
  • 1960 के दशक की भाषा संबंधी विवाद: जैसे-जैसे 15-वर्षीय अवधि की समाप्ति निकट आई, गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में, विशेषकर संघ के प्रशासन में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी के प्रयोग की संभावना को लेकर, व्यापक विरोध उभरने लगा।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963: इसमें संघ के निर्दिष्ट आधिकारिक प्रयोजनों और संसद के कार्यों के संचालन के लिए हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी के निरंतर प्रयोग का प्रावधान किया गया। धारा 3, 26 जनवरी 1965 को प्रभावी हुई।
  • 1967 का संशोधन: बाद में इस व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया ताकि हिंदी के साथ अंग्रेजी का निरंतर प्रयोग निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए सुनिश्चित किया जा सके, जिसमें उन राज्यों के साथ संचार भी शामिल था, जिन्होंने हिंदी को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया था।
  • अन्य संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 344–351 राजभाषा आयोग और संसदीय समिति, राज्यों की भाषाओं, न्यायालयों और विधायिका की भाषा, भाषाई अल्पसंख्यकों से संबंधित सुरक्षा उपायों तथा हिंदी के विकास के लिए निर्देश से संबंधित हैं।
  • वर्तमान व्यवस्था: हिंदी संघ की राजभाषा बनी हुई है, जबकि राजभाषा अधिनियम, 1963 के तहत निर्दिष्ट आधिकारिक प्रयोजनों के लिए हिंदी के साथ अंग्रेजी का प्रयोग जारी है।

आठवीं अनुसूची और भारत की भाषा व्यवस्था

  • आठवीं अनुसूची: संविधान में मूल रूप से 14 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। बाद के संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से इस सूची में बढ़कर 22 भाषाएँ हो गई।
  • अनुसूचित भाषाएँ: आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को संवैधानिक मान्यता प्राप्त है। अनुसूची में शामिल होने से किसी भाषा को संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं होता।
  • संघ की राजभाषा: अनुच्छेद 343 के तहत देवनागरी लिपि में हिंदी संघ की राजभाषा है तथा संघ के आधिकारिक प्रयोजनों के लिए भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप का प्रावधान किया गया है।
  • राज्यों की राजभाषाएँ: अनुच्छेद 345 के तहत किसी राज्य का विधानमंडल उस राज्य में प्रचलित एक या अधिक भाषाओं अथवा हिंदी को उस राज्य के सभी या कुछ आधिकारिक प्रयोजनों के लिए अपना सकता है।
  • अंग्रेजी: संशोधित राजभाषा अधिनियम, 1963 के तहत संघ के निर्दिष्ट आधिकारिक प्रयोजनों के लिए हिंदी के साथ अंग्रेजी का प्रयोग जारी है।
  • राष्ट्रीय भाषा: संविधान भारत की किसी भी भाषा को राष्ट्रीय भाषा के रूप में घोषित नहीं करता। इसलिए, हिंदी दिवस हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अपनाए जाने की याद में मनाया जाता है, न कि इसे राष्ट्रीय भाषा के रूप में अपनाए जाने की।

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