रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने ₹2.12 लाख करोड़ के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी
संदर्भ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने सशस्त्र बलों के लिए लगभग ₹2.12 लाख करोड़ के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी।
अन्य संबंधित जानकारी
- रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने विभिन्न रक्षा खरीद प्रस्तावों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) प्रदान की। यह सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी है।
- कुल खरीद मूल्य का लगभग 82% भारतीय उद्योग से प्राप्त किया जाएगा, जिससे स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
- भारतीय थल सेना: स्वीकृत प्रस्तावों में उच्च गतिशीलता वाले वाहन, स्वचालित स्व-चालित ट्रैकयुक्त तोप प्रणालियाँ, गोलीबारी प्रतिक्रिया प्रणालियाँ, हल्के बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर, अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणालियाँ, ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ, निगरानी प्रणालियाँ तथा लंबी दूरी के ड्रोन शामिल हैं।
- भारतीय नौसेना एवं वायु सेना: नौसेना को सक्रिय बाह्य प्रलोभक प्रणालियों तथा प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्मों के लिए मंजूरी मिली। वहीं, वायु सेना को हेलीकॉप्टरों, वायु रक्षा प्रणालियों, हथियारों तथा मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार प्रणालियों के लिए स्वीकृति प्रदान की गई।
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के बारे में
- यह सशस्त्र बलों के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों के संबंध में रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
- स्थापना: राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित मंत्रियों के समूह की सिफारिशों के बाद वर्ष 2001 में इसका गठन किया गया।
- अध्यक्ष: केंद्रीय रक्षा मंत्री।
- संरचना: इसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव, रक्षा वित्त सचिव तथा अन्य वरिष्ठ रक्षा अधिकारी शामिल होते हैं।
- प्रमुख कार्य: आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) प्रदान करना, दीर्घकालिक क्षमता विकास योजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी देना तथा रक्षा खरीद को ‘खरीदें’ (Buy), ‘खरीदें एवं निर्माण करें’ (Buy and Make) और ‘निर्माण करें’ (Make) जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत करना।
हैरी केन ने 2026 का बैलन डी’ओर पुरस्कार जीता
संदर्भ: इंग्लैंड के कप्तान और बायर्न म्यूनिख के स्ट्राइकर हैरी केन ने 2026 का पुरुष बैलन डी’ओर पुरस्कार जीता। वह 25 वर्षों में यह पुरस्कार जीतने वाले पहले अंग्रेज़ खिलाड़ी बने।
अन्य संबंधित जानकारी
- केन ने 2025–26 सत्र के दौरान क्लब और देश के लिए 65 मैचों में 73 गोल किए। उन्होंने बायर्न म्यूनिख को बुंडेसलीगा और डीएफबी-पोकाल का खिताब जीतने में मदद की।
- स्पेन की एलेक्सिया पुटेलास ने तीसरी बार महिला बैलन डी’ओर पुरस्कार जीता और इस प्रकार ऐताना बोनमती के पुरस्कार पर बने वर्चस्व को समाप्त किया।
बैलन डी’ओर के बारे में
- बैलन डी’ओर पुरस्कार फ्रांसीसी फुटबॉल पत्रिका फ्रांस फुटबॉल द्वारा फुटबॉल में उत्कृष्ट व्यक्तिगत प्रदर्शन को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है।
- चयन प्रक्रिया: पुरस्कार के लिए चुने गए खिलाड़ियों में से विजेता का चयन 100 अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की जूरी द्वारा मतदान के माध्यम से किया जाता है।
- वैश्विक पात्रता: वर्ष 1956 में स्थापित इस पुरस्कार में शुरुआत में केवल यूरोपीय खिलाड़ियों को मान्यता दी जाती थी।
- वर्ष 1995 में पात्रता का विस्तार करते हुए यूरोपीय क्लबों के लिए खेलने वाले सभी राष्ट्रीयताओं के खिलाड़ियों को इसमें शामिल किया गया।
- वर्ष 2007 में यह एक वैश्विक पुरस्कार बन गया, जिसके लिए दुनिया भर के खिलाड़ी पात्र हो गए।
- सर्वाधिक बार विजेता: लियोनेल मेसी ने सर्वाधिक आठ बार बैलन डी’ओर पुरस्कार जीता है। उनके बाद क्रिस्टियानो रोनाल्डो पाँच पुरस्कारों के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
- इंग्लैंड के विजेता: केन से पहले यह पुरस्कार जीतने वाले अंग्रेज़ खिलाड़ी स्टेनली मैथ्यूज (1956), बॉबी चार्लटन (1966), केविन कीगन (1978 और 1979) तथा माइकल ओवेन (2001) थे।
- बायर्न म्यूनिख का रिकॉर्ड: केन यह पुरस्कार जीतने वाले बायर्न म्यूनिख के पहले गैर-जर्मन खिलाड़ी बने। वह क्लब के लिए 1981 में कार्ल-हाइंज रुमेनिग्गे के बाद यह पुरस्कार जीतने वाले पहले खिलाड़ी भी बने।
विशेष अनुमति याचिकाएँ (SLPs)
संदर्भ: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसमें विशेष अनुमति याचिकाओं (SLPs) की हिस्सेदारी नए दायर होने वाले मामलों में लगभग 80% है, जिससे न्यायालय के कार्यभार और लंबित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
विशेष अनुमति याचिकाओं (SLPs) के बारे में
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को भारत के किसी भी न्यायालय या अधिकरण द्वारा दिए गए निर्णय, डिक्री, अवधारण, दंडादेश या आदेश के विरुद्ध अपील करने के लिए विशेष अनुमति प्रदान करने की शक्ति देता है।
- SLP एक विवेकाधीन उपचार है, न कि अधिकार के रूप में प्राप्त होने वाला उपाय। सर्वोच्च न्यायालय मामले की परिस्थितियों के आधार पर याचिका स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।
- उद्देश्य: यह गंभीर अन्याय की स्थिति में राहत प्रदान करने तथा असाधारण मामलों की न्यायिक समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक असाधारण उपाय उपलब्ध कराता है।
- दायरा: संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक सिद्धांतों के अधीन, इसका उपयोग दीवानी, आपराधिक तथा अन्य मामलों में किया जा सकता है।
SLP का उपयोग किन मामलों में किया जाता है?
- सर्वोच्च न्यायालय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन, निष्पक्ष सुनवाई से वंचित किए जाने, विधि के महत्त्वपूर्ण प्रश्नों, कानूनी त्रुटियों या न्याय के गंभीर हनन से संबंधित असाधारण परिस्थितियों में SLP पर विचार कर सकता है।
- न्यायालय तब भी हस्तक्षेप कर सकता है, जब निचली अदालत का निर्णय न्याय प्रशासन के संबंध में गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करता हो या सामान्य अपील प्रक्रिया से बाहर भी न्यायहितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप आवश्यक हो।
प्रमुख मामले
- प्रीतम सिंह बनाम राज्य (1950): सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 136 के अंतर्गत प्राप्त शक्ति असाधारण एवं विवेकाधीन है तथा इसका प्रयोग सीमित रूप से, केवल असाधारण मामलों में किया जाना चाहिए।
- मथाई @ जोबी बनाम जॉर्ज (2010): सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रश्न पर विचार किया कि क्या अनुच्छेद 136 के अंतर्गत उसकी शक्तियों के प्रयोग को दिशा-निर्देशों द्वारा सीमित किया जा सकता है। इस मामले में इस प्रावधान की व्यापक विवेकाधीन प्रकृति को रेखांकित किया गया।
सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP)
संदर्भ: अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सरकार इसे यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित 60,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के जवाब में एक रणनीतिक कदम मानती है।
अन्य संबंधित जानकारी
- 23 अक्टूबर, 2026 को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में SUMP के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके परिणामस्वरूप आगजनी, तोड़फोड़ और सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़पें हुईं।
- आदि समुदाय के मूल निवासी लोगों और युवा समूहों ने विस्थापन, पैतृक भूमि एवं आजीविका के नुकसान, पर्यावरणीय क्षति तथा व्यवहार्यता सर्वेक्षणों के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की आशंकाओं के कारण इस परियोजना का विरोध किया है।
सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) के बारे में

- SUMP अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की जलविद्युत एवं जल भंडारण परियोजना है, जिसका विकास NHPC लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसकी क्षमता 11,500 मेगावाट बताई गई है।
- पृष्ठभूमि: बाँध निर्माण की योजनाएँ वर्ष 1982 से चली आ रही हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में ऊपरी सियांग परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था।
- जल भंडारण: इसकी अनुमानित सक्रिय जल भंडारण क्षमता लगभग 9.2 अरब घन मीटर (BCM) है, जबकि चीन की प्रस्तावित मेदोग परियोजना की क्षमता लगभग 5.5 BCM है।
- वर्तमान स्थिति: परियोजना अभी व्यवहार्यता अध्ययन और प्रारंभिक आकलन के चरण में है। निर्माण को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
- रणनीतिक महत्त्व: चीन की प्रस्तावित 60,000 मेगावाट की मेदोग जलविद्युत परियोजना से निचले क्षेत्रों में जल सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
- भारत का अनुमान है कि चीन की परियोजना के कारण 40 अरब घन मीटर (BCM) तक पानी का मार्ग बदला जा सकता है।
- चिंताएँ: विशेषज्ञ बाढ़ नियंत्रण में इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं, क्योंकि जलविद्युत उत्पादन के लिए जलाशय में जल स्तर ऊँचा बनाए रखना आवश्यक हो सकता है।
- विस्थापन, पारिस्थितिक क्षति और भूकंप के जोखिम भी प्रमुख चिंताएँ हैं, क्योंकि यह क्षेत्र भूकंपीय ज़ोन-V में आता है।
13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक – प्लस (ADMM – Plus)
संदर्भ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 28 से 29 अक्टूबर 2026 तक फिलीपींस के सेबू में आयोजित होने वाली 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) के बारे में
- स्थापना: 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से।
- संस्थापक सदस्य: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड।
- सदस्य देश (11): ब्रुनेई दारुस्सलाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम।
- नवीनतम सदस्य: तिमोर-लेस्ते 26 अक्टूबर 2025 को आसियान में शामिल हुआ।
- उद्देश्य: सदस्य देशों के बीच सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देना।
- भारत आसियान का सदस्य नहीं है। भारत 1992 में क्षेत्रीय संवाद साझेदार बना, 1995 में पूर्ण संवाद साझेदार (Dialogue Partner) बना तथा वर्ष 2022 में भारत-आसियान संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।
- मैत्री एवं सहयोग संधि (TAC): वर्ष 1976 में हस्ताक्षरित यह संधि आसियान सदस्य देशों के बीच शांतिपूर्ण संबंधों के लिए रूपरेखा प्रदान करती है।
- मूलभूत सिद्धांत: संप्रभुता के प्रति पारस्परिक सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तथा प्रभावी सहयोग।
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM)-प्लस के बारे में
- आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM): वर्ष 2006 में स्थापित यह आसियान का सर्वोच्च रक्षा परामर्श एवं सहयोग तंत्र है।
- ADMM-प्लस: वर्ष 2010 में शुरू की गई इस व्यवस्था में आसियान के 11 सदस्य देश और आठ संवाद साझेदार—भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड—शामिल हैं। इसका उद्देश्य रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना है।
- प्रथम बैठक: 12 अक्टूबर 2010 को वियतनाम के हनोई में आयोजित हुई थी।
- वार्षिक बैठकें: क्षेत्रीय रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 2017 से रक्षा मंत्रियों की बैठक प्रतिवर्ष आयोजित की जा रही है।
- 2026 की अध्यक्षता: फिलीपींस वर्ष 2026 में “हमारे भविष्य का सामूहिक रूप से मार्गदर्शन” (Navigating Our Future, Together) विषय के अंतर्गत ADMM-प्लस की अध्यक्षता कर रहा है।
- भारत की भूमिका: भारत वर्ष 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना। भारत 2024–2027 चक्र के लिए मलेशिया के साथ आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य की सह-अध्यक्षता कर रहा है।
भारत–इंडोनेशिया संयुक्त विशेष बल अभ्यास ‘गरुड़ शक्ति’
संदर्भ: भारत–इंडोनेशिया संयुक्त विशेष बल अभ्यास गरुड़ शक्ति का 11वाँ संस्करण 27 अक्टूबर 2026 को इंडोनेशिया के बन्युवांगी में शुरू हुआ और यह 6 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा।
गरुड़ शक्ति के बारे में

- आयोजन: यह सैन्य कूटनीति के अंतर्गत भारत और इंडोनेशिया में बारी-बारी से आयोजित किया जाने वाला द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है।
- प्रतिभागी: भारतीय दल में पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के सैनिक शामिल हैं, जबकि इंडोनेशियाई दल में इंडोनेशिया के विशेष बलों के कर्मी शामिल हैं।
- उद्देश्य: दोनों देशों के विशेष बलों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों, पारस्परिक समझ, सहयोग और अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देना।
- प्रथम संस्करण: वर्ष 2012 में भारत में आयोजित किया गया था।
- पिछला संस्करण (10वाँ): 3–12 दिसंबर 2025 तक भारत के हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित विशेष बल प्रशिक्षण विद्यालय में आयोजित किया गया था।
- प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र: जंगल में युद्ध, बाधाओं को पार करना, युद्धक निशानेबाजी, पर्वतारोहण, हवाई आक्रमण प्रशिक्षण, हथियारों एवं उपकरणों से परिचित होना तथा रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान।
- सत्यापन अभ्यास: यह अभ्यास यथार्थपरक परिचालन परिस्थितियों में आयोजित गतिविधियों के साथ संपन्न होता है, जिनका उद्देश्य समन्वय, सहनशक्ति और युद्धक तैयारी का आकलन करना है।
