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सामान्य अध्ययन-2: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश|

संदर्भ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान के दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बैठक के प्रमुख परिणाम

  • आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई: भारत ने बिना किसी दोहरे मापदंड के आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने का आह्वान किया, जिसमें इसका वित्तपोषण, समर्थन नेटवर्क और सेफ हैवन शामिल हैं।
  • आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग: सदस्य देशों ने व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (PMTEC) के लिए 2026–2030 कार्ययोजना अपनाई।
  • संस्थागत विकास: बैठक में ताशकंद स्थित यूनिवर्सल सेंटर और दुशांबे स्थित मादक पदार्थ-रोधी केंद्र को SCO के स्थायी निकायों के रूप में मान्यता दिए जाने का स्वागत किया गया।
    • वर्ष 2027 के लिए SCO के बजट को मंजूरी दी गई।
  • SCO विकास बैंक: प्रस्तावित बैंक का उद्देश्य बहुपक्षीय परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण उपलब्ध कराना है।
    • कज़ाकिस्तान ने मुख्यालय की मेजबानी करने की तत्परता व्यक्त की।
  • कनेक्टिविटी और सतत विकास: भारत ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और चाबहार बंदरगाह को प्रमुखता से प्रस्तुत किया।
    • इसने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, महिला-नेतृत्व वाले विकास, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI), मिशन LiFE और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया। साथ ही, संपर्क परियोजनाओं में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर बल दिया।
  • एशियाई आर्थिक संवाद: राजनाथ सिंह ने SCO के पहले एशियाई आर्थिक संवाद के आयोजन का उल्लेख किया।
  • संयुक्त विज्ञप्ति: सदस्य देशों ने संयुक्त विज्ञप्ति अपनाई, जिसमें बैठक के निर्णयों, वर्ष 2027 के बजट और PMTEC कार्ययोजना को शामिल किया गया।
  • सभ्यतागत सहयोग: भारत ने सदस्य देशों को पहले SCO सभ्यतागत संवाद मंच में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया, जिसकी मेजबानी भारत 2026 के अंत में करेगा।
  • अगली बैठक: अध्यक्षता उज्बेकिस्तान को सौंप दी गई, जो वर्ष 2027 में अगली बैठक की मेजबानी करेगा।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में

  • स्थापना: इसकी स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई में हुई थी। इसका विकास वर्ष 1996 में स्थापित शंघाई फाइव तंत्र से हुआ।
  • मुख्यालय: बीजिंग, चीन।
  • आधिकारिक भाषाएँ: चीनी और रूसी।
  • महासचिव: नूरलान येरमेकबायेव, जिन्होंने 1 जनवरी 2025 को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण किया।
  • सदस्यता: 10 सदस्य देश—चीन, रूस, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस।
  • पर्यवेक्षक और संवाद भागीदार: शंघाई सहयोग संगठन में 2 पर्यवेक्षक देश (अफगानिस्तान और मंगोलिया) तथा 15 संवाद भागीदार हैं। वर्ष 2025 में एकीकृत “SCO भागीदार” का दर्जा स्वीकृत किया गया, लेकिन इसे अभी पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
  • सदस्यता का विस्तार: भारत और पाकिस्तान 2017 में, ईरान 2023 में तथा बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य बने।
  • प्रमुख उद्देश्य:
    • सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, अच्छे पड़ोसी संबंधों और मैत्रीपूर्ण संबंधों को सुदृढ़ करना।
    • क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना।
    • आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और अन्य सीमापार खतरों का मुकाबला करना।
    • व्यापार, निवेश, ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना।
  • मार्गदर्शक सिद्धांत: शंघाई भावना (Shanghai Spirit), जो आपसी विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, सांस्कृतिक विविधता के सम्मान और साझा विकास की दिशा में प्रयास पर बल देती है।
  • स्थायी निकाय:
  1. SCO सचिवालय: बीजिंग, चीन।
  2. क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) की कार्यकारी समिति: ताशकंद, उज्बेकिस्तान।
  • संगठनात्मक संरचना: राष्ट्राध्यक्ष परिषद (CHS), शंघाई सहयोग संगठन का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, जो प्रमुख प्राथमिकताएँ निर्धारित करने के लिए उत्तरदायी है। वहीं, शासनाध्यक्ष परिषद (CHG) मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग और बजट संबंधी मामलों पर ध्यान केंद्रित करती है।

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