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सामान्य अध्ययन-2: गरीबी और भूख से संबंधित विषय।

संदर्भ: संयुक्त राष्ट्र ने विश्व में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति (SOFI) 2026 रिपोर्ट जारी की, जिसमें भूख में कमी लाने की दिशा में वैश्विक स्तर पर सीमित प्रगति को रेखांकित किया गया है। साथ ही, रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्य–2: शून्य भूख प्राप्त करने की दिशा में विश्व अभी भी निर्धारित मार्ग से पीछे है।

विश्व में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति (SOFI) के बारे में

  • यह वैश्विक स्तर पर भूख, खाद्य असुरक्षा एवं कुपोषण पर संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट है।
  • इसे संयुक्त रूप से खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ), विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • यह रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य–2: शून्य भूख की दिशा में वैश्विक एवं क्षेत्रीय प्रगति का आकलन करती है, भूख, खाद्य असुरक्षा, आहार की गुणवत्ता एवं पोषण संबंधी संकेतकों का मूल्यांकन करती है तथा सरकारों एवं विकास सहयोगियों के लिए साक्ष्य-आधारित नीतिगत सिफारिशें प्रदान करती है।
  • SOFI 2026 का विषय: स्वस्थ आहार की बढ़ती लागत, इन लागतों को बढ़ाने वाले संरचनात्मक एवं आर्थिक कारक तथा पौष्टिक भोजन को अधिक किफायती एवं सुलभ बनाने हेतु नीतिगत उपाय।

रिपोर्ट के प्रमुख वैश्विक निष्कर्ष

  • लगातार तीसरे वर्ष भूख में कमी दर्ज की गई: एक अनुमान के अनुसार, 2025 में 64.5 करोड़ लोग (वैश्विक जनसंख्या का 7.8 प्रतिशत) भूख से प्रभावित थे।
    • यह संख्या 2024 की तुलना में लगभग 1.4 करोड़ कम तथा 2022 के उच्चतम स्तर की तुलना में 4.3 करोड़ कम है।
    • हालांकि, यह संख्या 2019 (कोविड-19 पूर्व) की तुलना में अभी भी 6.1 करोड़ अधिक है।
  • विश्व अभी भी सतत विकास लक्ष्य–2 (शून्य भूख) प्राप्त करने की दिशा में निर्धारित मार्ग से पीछे है: विश्व 2030 तक सतत विकास लक्ष्य–2: शून्य भूख प्राप्त करने की दिशा में अभी भी निर्धारित मार्ग से पीछे है।
    • अनुमान है कि 2030 तक भी लगभग 52 करोड़ लोग भूख का सामना कर सकते हैं।
  • खाद्य असुरक्षा में सुधार हुआ: 2025 में लगभग 210 करोड़ लोगों ने मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना किया।
    • यह संख्या 2024 की तुलना में लगभग 8.6 करोड़ कम थी।
    • सबसे अधिक सुधार दक्षिण अमेरिका एवं एशिया, विशेषकर दक्षिणी एशिया में दर्ज किया गया।
  • अफ्रीका वैश्विक भूख का प्रमुख केंद्र बन गया: पहली बार अफ्रीका ने एशिया को पीछे छोड़ते हुए सर्वाधिक भूखे लोगों वाला क्षेत्र बनने का स्थान प्राप्त किया।
    • वर्ष 2025 में अफ्रीका में 30.9 करोड़ तथा एशिया में 29.2 करोड़ लोग भूख से प्रभावित थे।
    • अफ्रीका में भूख की दर 20 प्रतिशत रही, जबकि एशिया में यह 6 प्रतिशत थी।
    • वर्ष 2017 के बाद पहली बार अफ्रीका में भूख की बढ़ती प्रवृत्ति में रुकावट दर्ज की गई तथा भूख की व्यापकता 2024 के 20.3 प्रतिशत से घटकर 2025 में 20.0 प्रतिशत हो गई।
  • स्वस्थ आहार अभी भी अधिकांश लोगों की पहुँच से बाहर है: विश्व की लगभग एक-तिहाई जनसंख्या अभी भी स्वस्थ आहार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं है।
    • इसके कारण लाखों लोग कुपोषण तथा आहार-संबंधी गैर-संचारी रोगों के जोखिम में बने हुए हैं।

रिपोर्ट के भारत संबंधी प्रमुख निष्कर्ष

  • अल्पपोषण में उल्लेखनीय कमी: अल्पपोषण की व्यापकता 2004–06 के 21.1 प्रतिशत से घटकर 2023–25 में 9.8 प्रतिशत हो गई।
    • अल्पपोषित लोगों की संख्या 24.39 करोड़ से घटकर 14.25 करोड़ रह गई, अर्थात लगभग 10.1 करोड़ लोगों की कमी दर्ज की गई।
  • स्वस्थ आहार अभी भी वहनीय (किफायती) नहीं है: 2025 में लगभग 52.01 करोड़ लोग (जनसंख्या का 35.5 प्रतिशत) स्वस्थ आहार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं थे।
    • यह अनुपात 2017 के 59.8 प्रतिशत से घटा है, किन्तु आज भी भारत में प्रत्येक तीन में से एक से अधिक व्यक्ति नियमित रूप से पोषण की दृष्टि से पर्याप्त आहार का खर्च वहन नहीं कर सकता।
  • स्वस्थ आहार की लागत में वृद्धि हुई: 2017 के बाद से भारत में स्वस्थ आहार की लागत में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
    • वर्ष 2025 में स्वस्थ आहार की लागत क्रय-शक्ति समता के आधार पर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 4.11 अमेरिकी डॉलर थी।
    • दक्षिण एशिया में स्वस्थ आहार की लागत के मामले में पाकिस्तान के बाद भारत दूसरा सबसे कम लागत वाला देश रहा।
  • निम्न-मध्यम आय वाले देशों में सुधार का प्रमुख आधार भारत रहा: निम्न-मध्यम आय वाले देशों में स्वस्थ आहार का खर्च वहन करने में असमर्थ लोगों की संख्या में आई कमी का प्रमुख कारण भारत रहा।
    • रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत को इस समूह से बाहर कर दिया जाए, तो अनुमान बढ़ती हुई प्रवृत्ति दर्शाते हैं।
  • बाल पोषण में सुधार हुआ, किन्तु चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं: पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में बौनापन 2012 के 41.7 प्रतिशत से घटकर 2024 में 32.9 प्रतिशत हो गया।
    • दुबलापन की दर 2024 में 18.7 प्रतिशत रही, जो अभी भी विश्व में उच्च दरों में से एक है।
    • पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अधिक वजन की दर 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई।
  • वयस्कों के पोषण संबंधी चिंताएँ: वयस्क जनसंख्या में मोटापे की दर दोगुनी हो गई है।
    • 15–49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में रक्ताल्पता की व्यापकता 50.1 प्रतिशत से बढ़कर 53.7 प्रतिशत हो गई है।

Sources:
Downtoearth
Downtoearth
Who
Fao

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