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सामान्य अध्ययन–2: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पहलू; ई-शासन—अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ।
सामान्य अध्ययन–3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन में उनके प्रभाव।
संदर्भ: हाल ही में जारी विश्व बैंक की रिपोर्ट भारत विकास अद्यतन: भारत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता—विकास के अवसर का लाभ उठाना में भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए तैयारी के मामले में अग्रणी उभरते बाजारों के शीर्ष 10 देशों में शामिल किया गया है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
• मजबूत आधार, लेकिन शुरुआती चरण में अपनाने की स्थिति: विशाल तकनीकी कार्यबल, एकीकृत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के कारण भारत AI को अपनाने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने के लिए अच्छी स्थिति में है। हालाँकि, AI का उपयोग अभी शुरुआती चरण में है और संगणना क्षमता की सीमित उपलब्धता उन्नत AI के विकास में बाधा बन रही है।
• AI निवेश और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में वृद्धि: निजी क्षेत्र में AI निवेश 2024 के 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर से तीन गुना से अधिक बढ़कर 2025 में 4.1 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। वहीं, वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs) में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या 19 लाख से बढ़कर 23.6 लाख हो गई।
• विकास की व्यापक संभावनाएँ: यदि भारत बड़े शहरी उद्यमों से आगे बढ़कर AI के उपयोग का विस्तार करता है, तो इससे उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं और सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति में सुधार हो सकता है।
• उन्नत AI के विकास के बजाय उसे अपनाने और अनुकूलित करने पर जोर: भारत के लिए बड़ा अवसर AI को अपनाने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में निहित है। वहीं, संगणना क्षमता की सीमित उपलब्धता फिलहाल उन्नत AI के विकास में बाधा बनी हुई है।
• श्रम बाजार पर प्रभाव अनिश्चित: यद्यपि दीर्घकाल में AI के प्रभावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन वर्तमान साक्ष्य बताते हैं कि भारत में उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में श्रम के स्थान पर AI के उपयोग का जोखिम कम है। इसका एक कारण यह है कि भारत में बौद्धिक कार्यों से संबंधित नौकरियों का अनुपात कम है, जिससे उत्पादकता बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएँ बनी हुई हैं।
• AI अपनाने में अभी भी बड़ा अंतर: केवल 23.4% औपचारिक भारतीय उद्यमों ने AI के किसी न किसी रूप का उपयोग करने की सूचना दी, जबकि अमेरिका में यह अनुपात 42.7% है। यह भारतीय उद्यमों में AI के उपयोग का विस्तार करने की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।
वर्तमान में भारत का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पारिस्थितिकी तंत्र
• प्रौद्योगिकी और प्रतिभा का आधार: भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र का वार्षिक राजस्व 2025 में 280 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान था। प्रौद्योगिकी और AI पारिस्थितिकी तंत्र में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत थे।
• नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: भारत में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र (GCCs) हैं, जिनमें 500 से अधिक AI-केंद्रित केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, देश में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं। पिछले वर्ष शुरू हुए स्टार्टअप में से लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में AI का उपयोग किया।
• उद्यमों और विभिन्न क्षेत्रों में AI का उपयोग: नैसकॉम (NASSCOM) AI अंगीकरण सूचकांक में भारत का स्कोर 4 में से 2.45 है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, 87% उद्यम सक्रिय रूप से AI समाधानों का उपयोग कर रहे हैं। उद्योग एवं ऑटोमोटिव क्षेत्र, उपभोक्ता वस्तुएँ एवं खुदरा व्यापार, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ एवं बीमा (BFSI) तथा स्वास्थ्य सेवा AI अपनाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। ये क्षेत्र मिलकर AI के कुल मूल्य में लगभग 60% का योगदान देते हैं।
• AI परिपक्वता का उभरता स्तर: PIB द्वारा उद्धृत BCG सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 26% भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर AI परिपक्वता हासिल कर ली है। यह दर्शाता है कि कंपनियाँ धीरे-धीरे प्रयोग के चरण से आगे बढ़कर व्यापक स्तर पर AI अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
सरकार की प्रमुख पहल और नीतिगत प्रोत्साहन
• इंडियाएआई मिशन: मार्च 2024 में स्वीकृत इस मिशन के लिए पाँच वर्षों में 10,371.92 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य सात स्तंभों के माध्यम से एक व्यापक AI पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। इन स्तंभों में संगणना क्षमता, अनुप्रयोग, डेटासेट, आधारभूत मॉडल, कौशल, स्टार्टअप वित्तपोषण तथा सुरक्षित एवं विश्वसनीय AI शामिल हैं।
• संगणना क्षमता, डेटा और स्वदेशी मॉडल: किफायती पहुँच उपलब्ध कराने के लिए इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत 38,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, AIKosh साझा डेटासेट और AI मॉडल उपलब्ध कराता है। आधारभूत मॉडल संबंधी स्तंभ भारतीय डेटा और भाषाओं के अनुरूप स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने में सहायता करता है।
• अनुप्रयोग, अनुसंधान और मानव पूँजी: सरकारी पहलों में स्वास्थ्य सेवा, कृषि, सतत शहरों और शिक्षा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, भारत-विशिष्ट AI अनुप्रयोगों का विकास तथा AI क्षमताओं के विस्तार के लिए फ्यूचरस्किल्स और डेटा एवं AI प्रयोगशालाएँ शामिल हैं। इनका उद्देश्य मौजूदा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र से आगे भी AI क्षमताओं का विस्तार करना है।
• उत्तरदायी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI: सुरक्षित एवं विश्वसनीय AI स्तंभ के अंतर्गत निजता, पक्षपात, व्याख्येयता और शासन से संबंधित मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है।
- स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के 2025 ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल में भारत के समग्र AI पारिस्थितिकी तंत्र को विश्व स्तर पर तीसरा स्थान दिया गया। यह AI प्रतिभा, अनुसंधान, निवेश, अवसंरचना और नीतिगत प्रगति में भारत की उपलब्धियों को दर्शाता है।
विकास के लिए AI की क्षमता का लाभ उठाने में चुनौतियाँ
• उद्यमों में AI का असमान उपयोग: विश्व बैंक के अनुसार, केवल 23.4% औपचारिक भारतीय उद्यम AI का उपयोग करते हैं। यह भारत के सुदृढ़ प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र और AI के वास्तविक उपयोग के बीच अंतर को दर्शाता है, विशेषकर छोटे उद्यमों के संदर्भ में।
• संगणना क्षमता और अवसंरचना संबंधी बाधाएँ: AI के उपयोग के लिए आवश्यक अवसंरचना और संगणना क्षमता तक सीमित पहुँच एक प्रमुख बाधा बनी हुई है। यह समस्या विशेष रूप से उन्नत AI के विकास तथा स्थापित प्रौद्योगिकी केंद्रों से आगे इसके व्यापक उपयोग में बाधा उत्पन्न करती है।
• कौशल और कार्यबल का रूपांतरण: AI के कारण कार्यों और व्यवसायों की प्रकृति में बदलाव आ रहा है। ऐसे में भारत को श्रमिकों की क्षमताओं को मजबूत करने तथा कार्यबल को निरंतर नए कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है, हालाँकि वर्तमान में उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में श्रम के स्थान पर AI के उपयोग का जोखिम कम है।
• शासन और समावेशन: AI के लाभों को व्यापक स्तर पर पहुँचाने के लिए अनुकूल कारोबारी वातावरण और अनुकूलनशील शासन व्यवस्था आवश्यक है। इससे नियामकीय अनिश्चितता कम करने के साथ-साथ डेटा सुरक्षा और निजता की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
आगे की राह
• AI के उपयोग का व्यापक विस्तार: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और छोटे उद्यमों के लिए AI अपनाने की बाधाओं को कम किया जाना चाहिए, ताकि उत्पादकता में वृद्धि का लाभ केवल बड़े एवं प्रौद्योगिकी-प्रधान उद्यमों तक सीमित न रहे।
• AI के अनुकूल कार्यबल का निर्माण: कौशल विकास, पुनःकौशल विकास और कार्यबल की क्षमताओं को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिक बदलते कार्यों के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें और तकनीकी बदलाव के कारण रोजगार से विस्थापित होने के जोखिम के प्रति संवेदनशील बने रहने के बजाय AI के साथ मिलकर अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
• स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप AI को बढ़ावा: भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप AI को अपनाने और अनुकूलित करने पर ध्यान देना चाहिए। इसमें कृषि, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों के लिए किफायती ‘लघु AI’ अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना शामिल है, जहाँ स्थानीय बाधाएँ और सीमित संपर्क सुविधाएँ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
• अनुकूल आधारभूत सुविधाओं और शासन को सुदृढ़ करना: भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना का विस्तार किया जाना चाहिए, स्थानीय AI नवाचार को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए तथा एक स्पष्ट एवं अनुकूलनशील नियामकीय ढाँचा स्थापित किया जाना चाहिए, जो डेटा सुरक्षा और निजता की रक्षा करते हुए नवाचार को बढ़ावा दे।
