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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) [FCNR(B)] जमा प्रोत्साहन योजना को निर्धारित समय से पहले समाप्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह योजना अपनी निर्धारित समाप्ति तिथि 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी।

अन्य संबंधित जानकारी

  • RBI ने FCNR(B) जमा प्रोत्साहन योजना को समय से पहले वापस लेने की किसी भी संभावना से इनकार किया है। RBI के अनुसार, इस योजना ने सभी प्रमुख मानकों पर अपेक्षित परिणाम दिए हैं और इसके माध्यम से विदेशों से लगातार मजबूत पूंजी प्रवाह हो रहा है।
  • 31 जुलाई 2026 तक बैंकों ने विशेष सुविधा के अंतर्गत कुल 40.816 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं। इसमें 36.725 अरब अमेरिकी डॉलर FCNR(B) जमा के माध्यम से, 2.575 अरब अमेरिकी डॉलर विदेशी मुद्रा में बाह्य उधारी (OFCBs) के माध्यम से, 1.516 अरब अमेरिकी डॉलर  बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECBs) के माध्यम से जुटाए गए।
  • पात्र जमाओं के लिए रियायती अमेरिकी डॉलर–रुपया विनिमय सुविधा तथा अस्थायी विनियामकीय छूट 30 सितंबर 2026 तक जुटाई गई जमाओं के लिए उपलब्ध रहेंगी। हालांकि, विनिमय सुविधा स्वयं 16 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी।

RBI के उपायों के पीछे तर्क

  • स्थिर विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करना: अनिवासी भारतीयों (NRIs) को भारतीय बैंकों में नई विदेशी मुद्रा जमा करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • रुपये को समर्थन देना: वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों तथा पूंजी प्रवाह में अस्थिरता से उत्पन्न दबाव के विरुद्ध रुपये को सहारा प्रदान करना।
  • बाह्य क्षेत्र को सुदृढ़ करना: भारत के भुगतान संतुलन (BoP) में सुधार करना तथा विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना।
  • घरेलू तरलता में वृद्धि करना: रियायती अमेरिकी डॉलर–रुपया विनिमय सुविधा के माध्यम से रुपये की तरलता उपलब्ध कराना।
  • जमा संग्रहण को सुगम बनाना: ब्याज दर की अधिकतम सीमा में अस्थायी छूट देकर बैंकों को अधिक लचीलापन प्रदान करना। पात्र FCNR(B) जमाओं को नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) की आवश्यकताओं से छूट देना।

FCNR(B) जमा योजना के बारे में

  • यह योजना अनिवासी भारतीयों (NRIs) को अधिकृत भारतीय बैंकों में निर्धारित विदेशी मुद्राओं में सावधि जमा रखने की अनुमति देती है।
  • चूँकि ये जमाएँ विदेशी मुद्रा में रखी जाती हैं, इसलिए जमाकर्ता को भारतीय रुपये और जमा की मुद्रा के बीच विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलती है।
  • FCNR(B) खाते विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) तथा RBI के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत विनियमित होते हैं।
  • पृष्ठभूमि
    • FCNR(B) योजना 15 मई 1993 से प्रभावी हुई।
    • इसने वर्ष 1975 में शुरू की गई FCNR(A) योजना का स्थान लिया।
    • प्रारंभ में इस योजना के अंतर्गत अमेरिकी डॉलर, पाउंड स्टर्लिंग, जर्मन मार्क, जापानी येन में जमा स्वीकार की जाती थी।
    • बाद में यूरो को वर्ष 2000 में, कनाडाई डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को वर्ष 2005 में शामिल किया गया।
    • 26 जुलाई 2005 से बैंकों को FCNR(B) जमा स्वीकार करने की अनुमति दी गई, जिसकी अधिकतम परिपक्वता अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई।
  • पात्र मुद्राएँ:
    • अमेरिकी डॉलर (USD)
    • पाउंड स्टर्लिंग (GBP)
    • यूरो (EUR)
    • जापानी येन (JPY)
    • ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD)
    • कनाडाई डॉलर (CAD)
  • RBI के विशेष उपाय (2026)
    • RBI ने अमेरिकी डॉलर–रुपया रियायती विनिमय सुविधा की घोषणा की, जो 8 जून 2026 से प्रभावी हुई।
    • यह सुविधा 8 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच जुटाई गई नई FCNR(B) जमाओं के लिए उपलब्ध है, जबकि विनिमय सुविधा स्वयं 16 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी।
    • RBI ने अस्थायी रूप से 3 वर्ष से अधिक और 5 वर्ष तक की नई FCNR(B) जमाओं तथा 3 वर्ष और उससे अधिक अवधि की नई NRE जमाओं पर लागू ब्याज दर की अधिकतम सीमा को हटा दिया।
    • निर्धारित अवधि के दौरान जुटाई गई पात्र FCNR(B) जमाओं को नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) की आवश्यकताओं से छूट दी गई है।

FCNR(B) योजना का महत्व

  • जमाकर्ताओं को विनिमय दर जोखिम से सुरक्षा: जमा विदेशी मुद्रा में रखी जाती है, जिससे NRIs को रुपये की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलती है।
  • स्थिर विदेशी बचत का संग्रहण: यह भारतीय बैंकों को विदेशों से स्थिर एवं अपेक्षाकृत दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जमा जुटाने में सहायता करती है।
  • भारत की बाह्य स्थिति को सुदृढ़ करना: यह विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने तथा बाहरी आर्थिक झटकों के प्रति भारत की सहनशीलता बढ़ाने में योगदान देती है।
  • विनिमय दर स्थिरता में सहायता: वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के समय रुपये की व्यवस्थित एवं स्थिर गति बनाए रखने में सहायता करती है।
  • बैंकिंग क्षेत्र के संसाधनों में सुधार: विशेष RBI उपायों के माध्यम से बैंकों को विदेशी जमा अधिक प्रभावी ढंग से जुटाने में सक्षम बनाती है।
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