संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-1: शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और रक्षोपाय।
सामान्य अध्ययन-2: मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान।
संदर्भ: बाकू में आयोजित ‘वर्ल्ड अर्बन फोरम 13’ में जारी की गई यूएन-हैबिटेट की एक प्रमुख नई रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि अरबों लोगों को प्रभावित करने वाले वैश्विक आवास संकट का समाधान समावेशी, अधिकार-आधारित और जलवायु-अनुकूल आवास रणनीतियों के माध्यम से किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

- वैश्विक आवास संकट का पैमाना: विश्व भर में लगभग 3.4 अरब लोगों के पास पर्याप्त आवास की उपलब्धता नहीं है।
- 1.1 अरब से अधिक लोग अनौपचारिक बस्तियों और मलिन बस्तियों में रहते हैं, जो कि अब तक का उच्चतम स्तर है।
- संकट के प्रमुख चालक: यह संकट पांच परस्पर जुड़े हुए कारकों से निर्मित होता है: वहनीयता, विस्थापन, अनौपचारिकता, संधारणीयता और घटती जीवन योग्यता।
- तीव्र शहरीकरण, भूमि की बढ़ती कीमतें, बढ़ती असमानता, सट्टा-आधारित आवास बाजार और जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर आवास की कमी को और अधिक गंभीर बना रहे हैं।
- आवास सामर्थ्य की चुनौतियाँ: वैश्विक स्तर पर लगभग 44% परिवार अपनी आय का 30% से अधिक हिस्सा आवास पर व्यय करते हैं।
- आवास की कमी वर्ष 2010 के 25.1 करोड़ यूनिट से बढ़कर वर्ष 2023 में 28.8 करोड़ यूनिट हो गई है।
- बढ़ते किराए और आवास की कीमतें असमानता को बढ़ा रही हैं तथा कब्ज़ा-अधिकार की असुरक्षा को बढ़ा रही हैं।
- अनौपचारिक बस्तियाँ और शहरी अपवर्जन: अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोगों की संख्या वर्ष 2000 के 89.5 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024 में लगभग 1.13 अरब हो गई है।
- बढ़ती गरीबी और सामाजिक अपवर्जन के बावजूद कई देशों में जबरन बेदखली और मलिन बस्तियों को हटाने की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
- विस्थापन और आवास असुरक्षा: वर्ष 2024 के अंत तक, संघर्ष, हिंसा, उत्पीड़न और आपदाओं के कारण वैश्विक स्तर पर 12.3 करोड़ से अधिक लोग जबरन विस्थापित हुए थे।
- विस्थापित आबादी का एक बड़ा हिस्सा असुरक्षित और उप-मानक शहरी आवास स्थितियों में जीवन यापन कर रहा है।
- जलवायु परिवर्तन और आवास: जलवायु-संबंधी खतरों के कारण वर्ष 2040 तक लगभग 16.7 करोड़ घर नष्ट हो सकते हैं।
- वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भवनों की हिस्सेदारी लगभग 37% है, जो आवास को जलवायु कार्रवाई का एक मुख्य केंद्र बिंदु बनाती है।
- कम आय वाले और अनौपचारिक बस्तियों के निवासियों को सबसे अधिक जलवायु जोखिमों और सबसे कमजोर अनुकूलन क्षमता का सामना करना पड़ता है।
- एक मानव अधिकार के रूप में आवास: यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि जबरन बेदखली, असुरक्षित कब्ज़ा-अधिकार और बेघर होना प्रमुख मानव अधिकार चिंताएं बनी हुई हैं। यह विभिन्न कब्ज़ा-अधिकार प्रणालियों, किराये के आवास, सहकारी समितियों और समुदाय-नेतृत्व वाले आवास दृष्टिकोणों को मान्यता देने का आह्वान करती है।
- सफल वैश्विक उदाहरण: थाईलैंड के ‘बान मानकोंग’ कार्यक्रम को अनौपचारिक बस्तियों के समुदाय-नेतृत्व वाले उन्नयन के लिए विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
- ब्राजील की ‘फावेला’ उन्नयन परियोजनाएं जबरन बेदखली के स्थान पर ‘यथा-स्थान’ विकास के लाभों को प्रदर्शित करती हैं।
- कंबोडिया और फिलीपींस जैसे देशों में समुदाय-नेतृत्व वाली जलवायु-अनुकूल आवास पहलों को सफल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यूनाइटेड नेशन्स ह्यूमन सेटलमेंट प्रोग्राम (यूएन–हैबिटेट)
- यह मानव बस्तियों और सतत शहरी विकास के लिए उत्तरदायी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है।
- वर्ष 1976 में हैबिटैट I सम्मेलन (वैंकूवर) के पश्चात 1978 में स्थापित, यह सभी के लिए पर्याप्त आवास सुनिश्चित करने हेतु समावेशी, सुरक्षित, लचीले और सतत शहरों को बढ़ावा देती है।
- यूएन-हैबिटैट का मुख्यालय नैरोबी में है और यह सतत शहरीकरण पर अनुसंधान, नीतिगत सहायता, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण के माध्यम से देशों का समर्थन करता है।
- भारत और यूएन-हैबिटैट: भारत अपनी स्थापना के समय से ही यूएन-हैबिटैट से जुड़ा रहा है और उसने 1976 में संयुक्त राष्ट्र मानव बस्ती केंद्र की स्थापना में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी।
- डॉ. आरकोट रामचंद्रन ने वर्ष 1978 से 1993 तक यूएनसीएचएस (UNCHS) के प्रथम कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य किया, तथा भारत ने वर्ष 1988 में यूएनसीएचएस के 11वें सत्र और वर्ष 2006 में आवास एवं मानव बस्तियों पर प्रथम एशिया प्रशांत मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की मेजबानी की थी।
- भारत ने वर्ष 2017-19 के दौरान यूएन-हैबिटैट गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और वह वर्ष 2019 से मई 2025 तक इसके कार्यकारी बोर्ड का सदस्य था।
- यूएन-हैबिटैट और शहरी पहलों के साथ भारत का जुड़ाव: यूएन-हैबिटैट के साथ भारत का जुड़ाव स्मार्ट सिटीज मिशन, अमृत (AMRUT), हृदय (HRIDAY), राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन और राष्ट्रीय रूर्बन मिशन जैसी प्रमुख शहरी पहलों के अनुरूप है।
- ये कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और न्यू अर्बन एजेंडा के अनुरूप सतत शहरीकरण, बेहतर शहरी अवसंरचना, आजीविका सृजन और संतुलित ग्रामीण-शहरी विकास का समर्थन करते हैं।
