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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने सूअरों के लिए भारत का पहला MA-104 सेल लाइन आधारित जीवित क्षीणित अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) टीका विकसित किया है। यह पशु चिकित्सा जैव-प्रौद्योगिकी एवं पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

टीके के बारे में

  • ICAR–राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD), भोपाल द्वारा विकसित किया गया है।
  • भारत का पहला स्वदेशी MA-104 कोशिका-रेखा आधारित जीवित दुर्बलित अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) टीका है।
  • MA-104 कोशिका-रेखा में विशिष्ट जीन विलोपन वाले नवीन दुर्बलित ASFV जीनोटाइप-II विषाणु का उपयोग करके विकसित किया गया है।
  • व्यापक रूप से उपलब्ध MA-104 कोशिका-रेखा का उपयोग, जिससे बड़े पैमाने पर और कम लागत में उत्पादन संभव हुआ है।
  • व्यावसायिक रूप से लाइसेंस प्राप्त ASF टीकों में प्रयुक्त स्वामित्व वाली विनिर्माण प्रणालियों पर निर्भरता समाप्त करता है।
  • 8 सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों के लिए 1 मिलीलीटर अंतःपेशीय खुराक, जिसके 14 दिन बाद बूस्टर खुराक दी जाती है।

अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) के बारे में

  • अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) एक अत्यधिक संक्रामक सीमा-पार विषाणुजनित रोग है, जो अफ्रीकी स्वाइन फीवर विषाणु (ASFV) के कारण होता है।
  • यह घरेलू एवं जंगली सूअरों को प्रभावित करता है।
  • इसकी प्रमुख विशेषताओं में तेज बुखार, रक्तस्राव तथा अत्यधिक मृत्यु दर शामिल हैं, जो लगभग 100% तक हो सकती है।
  • यह विश्व के सबसे विनाशकारी पशुधन रोगों में से एक है तथा सूअर पालन क्षेत्र को गंभीर सामाजिक-आर्थिक क्षति पहुँचाता है।
  • इसका कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है और इस टीके के विकास से पहले भारत में व्यावसायिक रूप से स्वीकृत ASF टीका उपलब्ध नहीं था; रोग नियंत्रण के लिए त्वरित निदान, सूअरों को मारना तथा कड़े जैव-सुरक्षा उपायों पर निर्भरता थी।
  • भारत में ASF का प्रभाव:
    • ASF का पहली बार भारत में 2020 में पता चला और इसके बाद यह कई राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में फैल गया।
    • इसके प्रकोप से बड़े पैमाने पर सूअरों की मृत्यु, सूअर उत्पादन में व्यवधान, पशु आवागमन एवं व्यापार पर प्रतिबंध तथा विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र के छोटे सूअर पालकों पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
    • 2020–21 के असम प्रकोप के दौरान सूअरों की मृत्यु एवं उन्हें मारने के कारण अनुमानित ₹276 करोड़ का नुकसान हुआ।
    • मिजोरम में 2025 तक ASF से 11,382 से अधिक परिवार प्रभावित हुए, जिससे अनुमानित ₹982 करोड़ का नुकसान हुआ।
मापदंडअफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF)क्लासिकल स्वाइन फीवर (CSF)
विषाणुअफ्रीकी स्वाइन फीवर विषाणु (ASFV)क्लासिकल स्वाइन फीवर विषाणु (CSFV)
जीनोमबड़ा, आवरणयुक्त, द्वि-रज्जुक डीएनए विषाणुछोटा, आवरणयुक्त, धनात्मक एकल-रज्जुक आरएनए विषाणु
कुलएस्फरविरिडे (वंश: एस्फ़िविरस)फ्लेविविरिडे (वंश: पेस्टिवाइरस)
वाहकस्थानिक क्षेत्रों में कोमल टिक (ऑर्निथोडोरोस)कोई ज्ञात जैविक वाहक नहीं
मृत्यु दरअधिक; अत्यधिक विषाणुजनित प्रकारों में 90–100% तकपरिवर्तनशील; छोटे सूअरों में अधिक तथा वयस्क सूअरों में कम

टीके का महत्व

  • रोग नियंत्रण: इस टीके से ASF के विरुद्ध प्रभावी निवारक साधन उपलब्ध होगा, जिससे सूअरों की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
  • किसानों की आजीविका: यह आर्थिक नुकसान को कम करेगा तथा विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के सूअर पालकों की आजीविका को मजबूत करेगा, जहाँ ASF का प्रकोप सबसे गंभीर रहा है।
  • पशु स्वास्थ्य सुरक्षा: यह भारत की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा, रोग-पूर्व तैयारी तथा पशुधन जैव-सुरक्षा को मजबूत करेगा।
  • किफायती उत्पादन: व्यापक रूप से उपलब्ध MA-104 कोशिका-रेखा के उपयोग से स्वामित्व वाली विनिर्माण प्रणालियों पर निर्भरता समाप्त होगी और बड़े पैमाने पर कम लागत में टीका उत्पादन संभव होगा।
  • वैज्ञानिक उपलब्धि: यह विकास स्वदेशी पशु चिकित्सा टीकों एवं उन्नत पशु स्वास्थ्य तकनीकों के निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
  • खाद्य एवं जैव-सुरक्षा: सूअर आबादी की रक्षा करके यह टीका खाद्य सुरक्षा, जैव-सुरक्षा तथा भारत के पशुधन क्षेत्र के सतत विकास में योगदान देगा।
  • आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी टीका आयातित पशु चिकित्सा तकनीकों पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाता है।
  • वैश्विक संभावना: भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास स्वदेशी ASF टीका विकसित करने की क्षमता है, जिससे देश किफायती पशु चिकित्सा टीकों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ता है।
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