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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा करार।
संदर्भ: भारत और जापान ने हाल ही में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भारतीय नौसेना और जापान समुद्री आत्मरक्षा बल के बीच सहयोग को बढ़ाने के लिए रूपरेखा प्रदान करता है।
अन्य संबंधित जानकारी
- समझौता ज्ञापन का उद्देश्य विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA), सूचना साझाकरण, खोज एवं बचाव (SAR), तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) में व्यावहारिक और परिचालनात्मक समुद्री सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना है।
- इसमें नौसैनिक यात्राओं, संयुक्त अभ्यासों, कार्मिकों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान तथा बंदरगाहों एवं रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं सहित रसद सहायता के माध्यम से समुद्री संचार लाइनों (SLOCs) की सुरक्षा के लिए बेहतर समन्वय की भी परिकल्पना की गई है।
- यह समझौता भारत–जापान के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी, औद्योगिक और परिचालनात्मक सहयोग को गहरा करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसमें जहाज निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी तथा बढ़ती जटिलता वाले सैन्य अभ्यास शामिल हैं।
समुद्री सुरक्षा समझौते के प्रमुख प्रावधान
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सूचना साझाकरण
- भारतीय नौसेना और जापान समुद्री आत्मरक्षा बल के बीच समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) सहयोग और सूचना साझाकरण को मजबूत करना।
- बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा वातावरण के आकलन को साझा करना।
- परिचालन सहयोग और समुद्री रसद
- नौसैनिक यात्राओं, संयुक्त अभ्यासों तथा कार्मिकों और विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) के आदान-प्रदान के माध्यम से समुद्री संचार लाइनों (SLOC) की सुरक्षा के लिए समन्वय को मजबूत करना।
- बंदरगाहों और रखरखाव एवं मरम्मत सुविधाओं के माध्यम से रसद सहायता प्रदान करना, जिसमें जहाज-मरम्मत सुविधाओं का पारस्परिक प्रावधान शामिल है।
- समुद्री सुरक्षा, HADR और विशेषीकृत क्षमताएँ
- खोज एवं बचाव (SAR) और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) में सहयोग बढ़ाना, जिसमें समुद्री आपात स्थितियों और आपदाओं से निपटने की कार्रवाई शामिल है।
- खदान-रोधी उपायों की क्षमताओं में सुधार करना और मानवरहित प्रणालियों के अधिक एकीकरण, अल्प सूचना पर संयुक्त अभ्यासों तथा विशेष अभियान बलों के आदान-प्रदान के माध्यम से अभ्यासों का विस्तार करना।
- रक्षा जहाज निर्माण और औद्योगिक सहयोग
- जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमताओं का लाभ उठाते हुए नौसैनिक जहाज निर्माण और डिजाइन में संयुक्त विकास की संभावनाओं का पता लगाना।
- मेक इन इंडिया के तहत सहयोग को गहरा करना, जिसमें भारत की उत्पादन क्षमताओं का अधिक उपयोग और जहाज-मरम्मत में पारस्परिक सहयोग शामिल है।
- कार्यान्वयन तंत्र: एक महानिदेशक/संयुक्त सचिव-स्तरीय कार्य समूह परिचालन, खुफिया, उपकरण, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग का समन्वय करेगा तथा प्रत्येक देश की नीतियों और संप्रभु विकल्पों का सम्मान करते हुए कार्यान्वयन में तेजी लाएगा।
भारत और हिंद-प्रशांत के लिए महत्व
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत करना: अधिक सूचना साझाकरण से भारत को अधिक व्यापक समुद्री परिदृश्य विकसित करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के प्रति प्रतिक्रिया में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
- समुद्री व्यापार को सुरक्षित करना: SLOC की सुरक्षा, रसद और जहाज मरम्मत पर सहयोग दोनों देशों तथा व्यापक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार और ऊर्जा प्रवाह की प्रत्यास्थता को मजबूत कर सकता है।
- परिचालनात्मक अंतःसंचालनीयता को बढ़ाना: अधिक जटिल अभ्यास, कार्मिक आदान-प्रदान, रसद और विशेषीकृत बलों के बीच सहयोग द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को अधिक परिचालनात्मक तत्परता और अंतःसंचालनीयता की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।
- रक्षा-औद्योगिक और तकनीकी समन्वय: जापान की तकनीकी विशेषज्ञता को भारत की उत्पादन क्षमताओं के साथ जोड़ना नौसैनिक जहाज निर्माण, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग और घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा दे सकता है।
- मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत का समर्थन: यह समझौता नौवहन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा में बाधा डालने वाली या बल अथवा दबाव के माध्यम से यथास्थिति बदलने का प्रयास करने वाली एकतरफा कार्रवाइयों के विरोध को मजबूत करता है। यह भारत के महासागर (MAHASAGAR) दृष्टिकोण और जापान के मुक्त और खुले हिंद प्रशांत (FOIP) विजन का भी पूरक है।
भारत–जापान रक्षा सहयोग के मौजूदा स्तंभ
- संस्थागत ढाँचा: जापान–भारत विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी, जिसे 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद का समर्थन प्राप्त है, रक्षा सहयोग के लिए व्यापक ढाँचा प्रदान करती है।
- सैन्य अभ्यास: धर्म गार्जियन, JAIMEX और वीर गार्जियन 26 सेना, नौसेना और वायु सेना की अंतःसंचालनीयता के लिए स्थापित मंच प्रदान करते हैं। वीर गार्जियन 26 के तहत जापानी लड़ाकू विमानों के पहली बार भारत में भाग लेने की संभावना है।
- रसद सहयोग: आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान संबंधी समझौता और हिंद-प्रशांत रसद नेटवर्क (IPLN) रसद तथा आपदा-प्रतिक्रिया सहयोग के लिए आधार प्रदान करते हैं।
- क्षेत्रीय सहयोग: भारत और जापान अभ्यासों, उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और अन्य पहलों के माध्यम से तीसरे देशों के साथ अपने सहयोग का विस्तार कर रहे हैं, जिससे उनकी द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को व्यापक हिंद-प्रशांत आयाम मिल रहा है।
