• अनौपचारिक अर्थव्यवस्था :
    • ऐसी आर्थिक गतिविधियाँ जो औपचारिक कानूनी, कर, पंजीकरण एवं सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आतीं या अपर्याप्त रूप से आती हैं।
    • इसमें छोटे गैर-निगमित उद्यम, स्वरोजगार, आकस्मिक श्रमिक तथा औपचारिक प्रतिष्ठानों में अनौपचारिक रोजगार शामिल हैं।
    • ILO के अनुसार:
      • अनौपचारिक क्षेत्र – उद्यम आधारित अवधारणा।
      • अनौपचारिक रोजगार – रोजगार/नौकरी आधारित अवधारणा।
  • भारत में वर्तमान स्थिति:
    • ASUSE-2025 के अनुसार लगभग 7.92 करोड़ गैर-कृषि असंगठित उद्यम।
    • इन उद्यमों में 12.8 करोड़ से अधिक श्रमिक कार्यरत।
    • PLFS-2025 के अनुसार:
      • स्वरोजगार → 56.2%
      • आकस्मिक श्रमिक → 20.2%
      • नियमित वेतनभोगी → 23.6%
    • भारत के लगभग 90% कार्यबल को अनौपचारिक रोजगार की परिस्थितियों से जोड़ा जाता है।
    • अनौपचारिक क्षेत्र का GDP में योगदान लगभग 45%।
    • स्वयं के स्वामित्व वाले छोटे उद्यमों की संख्या बहुत अधिक है।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • गैर-निगमित एवं छोटे पैमाने के उद्यम।
    • श्रम-प्रधान उत्पादन व्यवस्था।
    • कम पूंजी एवं आधुनिक तकनीक का सीमित उपयोग।
    • अनौपचारिक लेखांकन एवं सीमित वित्तीय रिकॉर्ड।
    • मौखिक रोजगार समझौतों की अधिकता।
    • सामाजिक सुरक्षा का सीमित कवरेज।
    • आय एवं रोजगार में अधिक अस्थिरता।
    • औपचारिक ऋण एवं बाजारों तक सीमित पहुँच।
  • प्रमुख चुनौतियाँ:
    • कम उत्पादकता – पुरानी तकनीक और कम पूंजी निवेश।
    • वित्तीय अपवर्जन – बैंक ऋण के लिए संपार्श्विक एवं औपचारिक रिकॉर्ड का अभाव।
    • सामाजिक सुरक्षा का अभाव – पेंशन, बीमा, बीमारी एवं मातृत्व लाभों की कमी।
    • रोजगार असुरक्षा – लिखित अनुबंध एवं शिकायत निवारण की कमी।
    • गिग अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता – आय, कार्य-समय एवं भुगतान में अस्थिरता।
    • जलवायु जोखिम – गर्मी एवं चरम मौसम से कार्य-दिवस और आय का नुकसान।
    • नियामकीय बोझ – जटिल अनुपालन से छोटे उद्यमों के विस्तार में बाधा।
    • सामूहिक सौदेबाजी का अभाव – श्रमिकों की सौदेबाजी शक्ति कमजोर।
  • औपचारिकीकरण के प्रमुख सरकारी प्रयास:
    • ई-श्रम पोर्टल – असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस।
    • उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म – अनौपचारिक सूक्ष्म इकाइयों को औपचारिक MSME पहचान।
    • PM SVANidhi – स्ट्रीट वेंडरों को सूक्ष्म ऋण।
    • PM विश्वकर्मा योजना – पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्त एवं बाजार सहायता।
    • GeM एवं ONDC – छोटे उद्यमों को डिजिटल बाजार उपलब्ध कराना।
    • Account Aggregator – डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर ऋण सुविधा।
    • PMKVY 4.0 एवं RPL – अनौपचारिक कौशल का मूल्यांकन एवं प्रमाणन।
    • स्किल इंडिया डिजिटल हब – डिजिटल कौशल प्रमाण-पत्र एवं रोजगार अवसर।
    • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 – असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रावधान।
  • आगे की राह:
    • सरल एवं कम लागत वाली कर एवं अनुपालन व्यवस्था।
    • छोटे उद्यमों के लिए चरणबद्ध औपचारिकीकरण।
    • डिजिटल लेन-देन के आधार पर कैश-फ्लो आधारित ऋण।
    • औद्योगिक क्लस्टरों में साझा मशीनरी एवं परीक्षण सुविधाएँ।
    • गिग श्रमिकों के लिए प्रभावी सामाजिक सुरक्षा।
    • महिला श्रमिकों के लिए क्रेच एवं देखभाल सुविधाएँ।
    • कौशल प्रमाणन एवं आधुनिक तकनीक तक पहुँच।
    • सरकारी खरीद में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों की भागीदारी बढ़ाना।
    • अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सामूहिक सौदेबाजी एवं शिकायत निवारण को मजबूत करना।
  • निष्कर्षतः भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था रोजगार और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। अतः लक्ष्य अनौपचारिक गतिविधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, उत्पादकता और अवसर के साथ समावेशी औपचारिकीकरण होना चाहिए।

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